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कम्युनिष्ट सरकार में बढ़ रही है महिला हिंसा : चन्दा चौधरी

देश के गृहमन्त्री रामबहादुर थापा का वक्तव्य आया था कि पुँजीवाद के कारण देश मे बलात्कार की घटना बढ़ रही है । पता नही किस पुँजीवाद की दलील दे रहे है गृहमन्त्री जी । वही पुँजीवाद जिसका अन्त करने के लिए उनके तत्कालीन पार्टी नेकपा माओवादी ने सत्रह हजार नेपालियों का कत्लेआम किया था ?

हिमलिनी, अंक अक्टूबर 2018 । देश मे अभी महिला हिंसा और बलात्कार की घटना से सम्बन्धित समाचार दिन प्रतिदिन पढ़ने को मिल रहा है । नारी अस्मिता से रोज खेला जा रहा है नेपाल में । कन्चनपुर की निर्मला पन्त, महोत्तरी की अन्जली और रौतहट की सम्झना दास प्रतिनिधिमूलक पात्र है । ऐसा कोई प्रदेश और जिला नहीं जहाँ बलात्कार और महिला हिंसा नहीं होती हो । पहले भी होती थी ऐसी घटनाएँ । परंतु दो तिहाई वाली सरकार की निरीहता भी देखने लायक है ।
बात करें निर्मला पन्त की बलात्कार और फिर हत्या की । दो महीने पहले निर्मला के साथ बलात्कार कर उनकी हत्या कर दी गई थी । संसद मे हरेक सांसद द्वारा आवाज उठाई गई निर्मला को न्याय दिलाने के लिए । परंतु नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी की दो तिहाई वाली सरकार कुछ नही कर पाई । बहुत दुखद हाल है । कहा जाता है कि निर्मला जब घर वापस नही आई थी तो उनकी माँ नेपाल प्रहरी के दफ्तर जा कर निर्मला को खोज करने के लिए विनती की थी । परंतु प्रशासन ने यह कह कर टाला की अभी रात हो चुकी है । क्या प्रशासन का ऐसा कहना उचित था ? दूसरी बात, जब निर्मला का शव गाँव के पास मिला तो प्रशासन ने उसका भी अनुसन्धान नही किया था । निर्मला के कपडे जला दिए गए । उसके शरीर पर लगे निशानों को पानी से साफ कर दिया गया, प्रशासन के द्वारा । उतना ही नही । निर्मला के परिवारजनो की विनती थी कि जबतक निर्मला के हत्यारों का पता न चल जाए तबतक उसका दाह संस्कार नही होगा । पर कौन सुनता है ? जबरदस्ती उसकी लाश को जलाया गया । प्रशासन के इन हरकतो से यह पता चलता है कि अपराधी के निकट के लोग हैं प्रशासन के अधिकारी । या कहे तो अपराधी कोई बडेÞ लोग ही है । जिसका सम्बन्ध अभी के नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी नेताओ से घनिष्टतम है ।
सरकार द्वारा गठित छानबीन समिति ने प्रतिवेदन गृहमन्त्री को पेश किया है । परंतु उसका कार्यान्वयन न होना तय है । जैसे कि अभी संसद का अधिवेशन का भी अन्त हो चुका है । ऐसी परिस्थिति में हम सांसद अब सरकार से कोई सवाल भी नही कर सकते है, सांसद मे । परंतु सड़क के माध्यम से ही सही राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल सरकार से सवाल करने से पीछे नहीं हटेगी । और हरेक राजनीतिक दल की यह जिम्मेदारी बनती है कि बढ़ रही महिला हिंसा अन्त करने के लिए नेकपा सरकार से सवाल पूछती रहे । नही तो सरकार का उन्माद और ज्यादा बढ़ सकता है ।
पिछले महीने देश के गृहमन्त्री रामबहादुर थापा का वक्तव्य आया था कि पुँजीवाद के कारण देश मे बलात्कार की घटना बढ़ रही है । पता नही किस पुँजीवाद की दलील दे रहे है गृहमन्त्री जी । वही पुँजीवाद जिसका अन्त करने के लिए उनके तत्कालीन पार्टी नेकपा माओवादी ने सत्रह हजार नेपालियों का कत्लेआम किया था ? गृहमन्त्री जी जिस देश मे गरीबों की संख्या आसमान छू रही है वहाँ आप बलात्कार के कारण के रूप में पुँजीवाद का तर्क करते हैं ? गौरतलब है कि राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल ने निर्मला हत्या प्रकरण को ले कर संसदीय छानबीन समिति गठन के लिए माँग की थी । परंतु गृहमन्त्री ने यह कह कर नकार दिया की संसदीय छानबीन सरकार के क्षेत्राधिकार का बिषय नही । तो क्या बलात्कारियों को संरक्षण देना ही सिर्फ सरकार के क्षेत्राधिकार मे पड़ता है ?
बीते महीने गण्डकी प्रदेश के मुख्यमन्त्री पृथ्वी सुब्बा गुरुङ की लज्जास्पद अभिव्यक्ति आयी थी कि नेपाल मे वेश्यावृति को कानूनी वैधानिकता देने से बलात्कार की घटना भी कम होगी और सरकार वेश्यावृति से टेक्स वसूल कर आर्थिक प्रगति भी कर सकती है । पता नही नेकपा के मुख्यमन्त्री को किसने ऐसा सुझाव दिया जिससे नारी जाति का अपमान कर सके । क्या मुख्यमन्त्री को यह पता नही की नेपालमे नारी का एक अपना वजुद है । उन्हे यह पता होना चाहिए की नेपाल किसी अमेरिकन वा युरोपियन देश नही जहाँ वेश्यावृति के नाम पर रेडलाईट एरिया बनाना चाहिए । जब देश मे चोरीछिपे कर हो रही वेश्यावृति पे भी लगाम लगाने की वजह ऐसी निल्र्लज अभिव्यक्ति किसी भी नेता को शोभा नही देती ।
आश्चर्य तो तब हुआ जब संयुक्त राष्ट्रसंघ के महा सभा में प्रधानमन्त्री भाग लेने को गए थे तो वहाँ उन्होंने कहा कि निर्मला हत्याकाण्ड की गुत्थी सुलझने मे बारह बर्ष लग सकता है । प्रधानमन्त्री जी नैतिकता की किस धरातल पर खड़े हो कर ऐसा मन्तव्य दे रहे हैं पता नही । परंतु पता यह चलता है कि कम्युनिस्ट सरकार में महिलाआें की कोई इज्जत नहीं । इस सरकार को बस गरीब जनता से विभिन्न बहाने टेक्स वसूल करना है और अपना आधिपत्य कायम रखना है । परंतु आम नेपाली को यह कतई मान्य नही ।
महोत्तरी मे सात महीने की बच्ची का बलात्कार हुआ । और उस घटना की भी अभी तक अनुसन्धान नही हो पायी है । रौतहट मे एसिड प्रहार से हुई सम्झना की मौत का अपराधी अभी तक प्रशासन के गिरफ्त में नहीं आ पाया है । आखिर करती क्या है प्रशासन । जनता के कर से वेतन ले कर एैश की जिन्दगी जीना ही उनका कर्तव्य है ?
यह नेपाल है । यहाँ नारी शक्ति की पूजा की जाती है । दुर्गा पूजा का महीना है । वही दुर्गा जिसने राक्षस महिसासुर का वध किया था । वध मतलब असत्य पे सत्य की जीत । अभी की तानाशाही प्रवृत्ति वाली सरकार को सचेत हो जाना चाहिए । नेपाल की नारी बहुत ताकतवर है । सीता और भृकुटी की अनुयायी है नेपाल की नारी । अगर निर्मला हत्याकाण्ड लगायत के बलात्कार की घटनाओं का आरोपित अपराधियों को जल्द से जल्द सजा नही दी गयी तो देश में महिला आन्दोलन का उग्ररूप तय है । और अब जरुरत है नेपाल के संविधान और अन्तरष्ट्रीय कानून मे परिवर्तन कर बलात्कारियाें फाँसी की सजा तय करने की । साथ ही देश के हरेक गाँव और कसबां मेें रहे पुलिस कर्मचारियों को जिम्मेवार बनाने की भी आवश्यकता है । वरना पुलिस को क्यों पालने की आवश्यकता है ?
अन्त में , नारी सम्मान के बिना किसी भी देश का विकास नहीं हो सकता ।
(लेखक चौधरी राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल की ओर से संघिय सांसद हैं)

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