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नेपाल मे रहे मधेश भू- खण्ड काे किसतरह मिलाया गया ? : अब्दुल खानं

 

प्राचिन समय मे मध्य देश,मझ्झिम देश से परिचित यह भू-भाग वर्तमान अवस्था मे मधेश के नाम से जाना जाता है। इस भू- अखण्ड पर राजा जनक, विराट, सल्हेस, लाेहागं सेन, सिद्धाेधन, दगीं सरण से लेकर अंग्रेज, मुगल फिर नवाब वजिर तक शासन किया है। वर्तमान मधेश का फैलावट २६.२० डिग्री से २९.१० डिग्री , ८०.१५ डिग्री से ८८.१० डिग्री भूमध्य रेखा मे अवस्थित है। दक्षिण , पुर्व अाैर पश्चिम मे भारत का सिमाना, उत्तर मे हिमालय अाैर महाभारत पर्वत श्रृङखला पडता है। मधेश के पुरव, पश्चिम लम्बाइ ८८५ किलोमिटर , अाैसत चाैडाई २६ किलोमिटर अाैर क्षेत्रफल २३,०६८ वर्ग किलोमिटर है। नेपाल सरकार की प्रशास्निक ईकाइयाें के अाधार पर तराई मे २० जिले सामिल हैं। क्षेत्रफल के अाधार पर मधेश विश्व के १०० देश अाैर जनसंख्या के अाधार पर १५० देशाें से बडा है। मधेश मे लगभग ४०% जंगल,१,२९,४००० हेक्टर कृषि याेग्य भुमि, मधेश के नदियाें ३४,७०,०६,००० घन मिटर बाेलडर २१,४२,६१,००० घन मिटर छाेटे पथ्थर अाैर २२,९२,०५,००० घन मिटर कंकड हाेने का अनुमान किया जाता है।

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सन १७६५ मे मुगल सम् नी के बदले मधेश काे ही सन १८१६ मे नेपाल के राजा काे दे दिया, सन १८६० मे पश्चिम मधेश काे भारतिय सिपाही विद्राेह काे दवाने मे नेपालियाे ने अंग्रेजका साथ देने के वजह से नेपाल के राजा काे दे दिया। सन १९२३ मे ब्रिटिश सरकार ने नेपाल काे स्वतन्त्र राज्य स्विकार करते समय मधेश काे नेपाल मे यथावत रहने दिया। सन१९४७ मे अंग्रेज से वापस जाते समय भी मधेश की वात काे दवे रहने दिया। सन १९५५ संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा नेपाल काे सदस्यता प्रदान करने से पहले उपनिवेशिक स्थती की पहिचान करनी चाहिए थी संयुक्त राष्ट्र नेपालकाे सदस्य बनाने के वाद संघ के सचिवालय ने सन१९५६ फरवरी २४ तारिख मे नेपाल सरकार से पत्राचार कर पुंछा था” नेपाल के जिम्मे मे काेई ऐसा क्षेत्र है जाे संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के ११ वें अध्याय के ७३ वें अनुच्छेद के अन्तरगत पडता हाे।” वाद मे गलत जानकारी देकर मधेश काे नेपाली सम्राज मे मिला लिया।( देखिए संयुक्त राष्ट्र संघीय प्रकाशन,ST/DPI/SER.A/73/Rev.)अंग्रेजी पृषट ८,१ अप्रैल १९५५)।

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अब्दुल खानं

अब्दुल खानं

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