Thu. May 28th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

मधेश आन्दोलन के पुरोधा स्व• गजेन्द्र नारायण सिंह को सादर नमन : गंगेश कुमार मिश्र

gajendra narayan singh
 

सादगी के प्रतिमूर्ति स्व• गजेन्द्र नारायण सिंह नेमधेश को स्वाभिमान के साथ जीने की जो प्रेरणा दी, उसके लिए मधेश की पावन धरती उनकी सदैव ऋणी रहेगी।

” जब सो रहा मधेश था;
निस्तेज था, बीमार था;
बिन मांझी, बिन पतवार;
कोई न था, तारनहार;
ऐसे में आया, वीर एक;
सिंह सा दहाड़ता;
गजेन्द्र सिंह, गजेन्द्र सिंह।
बाँह कटा कुर्ता, साधारण सी धोती पहनें जब गजेन्द्र बाबू मंच पर खड़े होते; एक दुर्लभ आभा-मण्डल उनके चेहरे पर दिखाई देती। मधेश के सम्मान और पहचान के लिए जीवन पर्यन्त संघर्षरत रहने वाले गजेन्द्र बाबू, अब हमारे बीच तो नहीं हैं; किन्तु उन्होंने मधेश को स्वाभिमान के साथ जीने की जो प्रेरणा दी, उसके लिए मधेश की पावन धरती उनकी सदैव ऋणी रहेगी।
गजेन्द्र बाबू नें ऐसे समय में नेपाल सद्भावना पार्टी की नीव रखी; जब चारों तरफ़ कांग्रेस और कम्यूनिस्टों का बोलबाला था; इस पार्टी को लोग अस्पृश्य कहते थे, जनता के बीच भ्रम फैलाया जाता, ये पार्टी मधेश और पहाड़ को बाँटने का कार्य कर रही है। सबसे अधिक दुःख इस बात का था, के मधेश की रहनुमाई करने वाले तथाकथित मधेशी नेताओं नें इस पार्टी का सबसे अधिक विरोध किया; जो कालान्तर में धुरन्धर मधेशवादी नेता कहलाए।
दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति के धनी, स्व• गजेन्द्र बाबू  विघ्न-बाधाओं का परवाह किए बिना, मधेश की पहचान की लड़ाई लड़ते रहे; बहुत से साथियों नें उनका साथ भी छोड़ा, किन्तु वे सतत् अपने कर्तव्य-पथ पर अग्रसर रहे।
” कुछ सर्प थे, आस्तीन के;
कुर्सी के थे, जो लालची;
रण छोड़ के, चलते बने;
रथ छोड़ के, ज्यों सारथी;
फ़िर भी, दहाड़ता रहा;
गजेन्द्र सिंह, गजेन्द्र सिंह। “
आज हमारे बीच, न होते हुए भी जो वैचारिक क्रान्ति का बिगुल गजेन्द्र बाबू नें फूँका है; उसकी प्रतिध्वनि मधेश की वादियों में गूँजती रहेगी । गंगेश कुमार मिश्र’, कपिलबस्तु |
gajendra narayan singh

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *