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मधेशवादी दल ‘मधेशवाद की चिन्तन’ से पीछे हट रही हैः प्रो. मिश्रा

Dr Birendra Prasad Mishra 1
 

काठमांडू, २४ जनवरी । पूर्व निर्वाचन आयुक्त तथा प्रो. डा. वीरेन्द्र प्रसाद मिश्र ने कहा है कि जिसको आम जनता मधेशवादी दल के रुप में जानते हैं, उन दलों ने खूद को मधेशवादी चिन्तन से दूर किया है । गजेन्द्र नारायण सिंह की १७वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गजेन्द्र नारायण सिंह स्मृति प्रतिष्ठान द्वारा बिहीबार काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए उन्होंने कहा– ‘स्व. गजेन्द्र नारायण सिंह जी को स्मरण करते हैं तो मधेश का याद आ जाता है । मधेश के लिए वह शुरु से अंत तक लड़ते रहे, लेकिन आज उनके ही पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ‘मधेश’ शब्द नहीं है ।’

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‘गांधी, गजेन्द्र और समतावादी आन्दोलन’ विषयक उक्त विचार गोष्ठी में प्रो.डा. मिश्र ने कहा कि स्वं सिंह जी मधेश के लिए तो लड़े हैं, लेकिन उनका आन्दोलन राष्ट्रवाद के लिए और विखण्डन के विरुद्ध भी था । प्रा.डा. मिश्र ने आगे कहा कि आज के मधेशवादी नेताओं प्राथमिकता मन्त्री पद के लिए होता हैं, मधेश के लिए नहीं । वर्तमान संघीय व्यवस्था प्रति भी उन्होंने असन्तुष्टि व्यक्त किया । कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए डा. मिश्र ने कहा– ‘संविधान में संघीयता तो लिख दिया है, लेकिन संघीयता कार्यान्वयन ठीक से नहीं हो रहा है । मधेश आन्दोलन ने ही संघीय व्यवस्था स्वीकार करने के लिए बाध्य किया, लेकिन आज वहीं प्रदेश नं. २ का नामाकरण ‘मधेश’ रखने के लिए नेताओं में विवाद दिखाई दे रही है ।’

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महात्मा गांधी को राजनीति फकिर के रुप में चित्रण करते हुए स्व. गजेन्द्र नारायण जी को भी उन्होंने गांधी के साथ तुलना किया । उनका मानना है कि राजनीति में सदाचार और सद्भाव होना चाहिए, जो गजेन्द्र नारायण में था, लेकि आज की राजनीति में नहीं है । समानता के लिए सद्भाव पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि स्व. गजेन्द्र नारायण सिंह जी ने नेपाली जनता में समानता लाने के लिए ही अपनी संगठन और पार्टी का नाम सद्भावना रखे थे ।

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