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प्रणाम पर्यटन : पर्यटन व साहित्य की एक गंभीर पत्रिका (पत्रिका समीक्षा)

 

कुमारी दृष्टि, लखनऊ | पर्यटन अनुभवो का जन्मदाता होता है ।  महात्मा गांधी ने विदेश से लौटने के बाद रेल के सामान्य डब्बे में देश को समझने  के लिये देशाटन किया था ।  बच्चो के कोरे मन पर भ्रमण वह पटकथा लिखता है , जो भविष्य में उनका  व्यक्तित्व व चरित्र गढ़ता है  । इसीलिये शालाओ में भ्रमण के वार्षिक सामूहिक आयोजन भी किये जाते हैं . आजकल तो सरकारें तक तीर्थ यात्रा करवा रही हैं । राहुल सांस्कृतायन जैसे घुमक्कड़ साहित्यकार हुए हैं , यात्रा वृतांत , संस्मरण पर किताबें लिखी गई हैं . प्रायः पत्रिकायें कुछ अंतिम पन्नो पर पर्यटन विषयक लेख छापती भी हैं .  ऐसे सामाजिक परिवेश में यद्यपि अंग्रेजी में कई ट्रेवेलाग मेगजीन छपती हैं पर  हिन्दी में मेरी जानकारी में कोई भी स्वतंत्र पत्रिका पर्यटन पर नही थी . ‘प्रणाम पर्यटन’ ने हिन्दी में इस लंबे समय से चली आ रही कमी को पूरा किया है .

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अक्टूबर – दिसम्बर 2018  का ‘उत्तर प्रदेश विशेषांक’ के रूप में है ।  पूरा पढ़ा . ताजमहल तो वैश्विक धरोहर है .उस पर उसी शहर में पति के लिए एक अंग्रेज़ अधिकारी की पत्नी द्वारा बनवाया ‘लाल ताज’ पर  राजगोपाल सिंह वर्मा का बहुत बढ़िया आलेख है ।  विंध्यवासिनी सिद्धपीठ पर शांति कुमार स्याल ने अच्छी जानकारी दी है । महर्षि वेदव्यास की जन्मभूमि कालपी  (बुंदेलखण्ड) में है , यह पत्रिका में शिवचरण जी के एक लेख को पढ़कर ही पता चला । लखीमपुर का मेढक मंदिर तो वास्तव में अद्भुत है।  साथ ही सहारनपुर , लखीमपुरखीरी , बस्ती , मथुरा ,मेरठ , बाबा गोरखनाथ के विषय में शोधपूर्ण लेख हैं ।  विदेशी पर्यटन पर डा आरती गोयल का आलेख कीव के संदर्भ में जानकारियो से भरपूर है । इसके अलावा कई साहित्यिक विधाओं में रचनाकारों की रचनाएं प्रकाशित की गयीं ।

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जिससे यह कहना उचित होगा कि प्रणाम पर्यटन सिर्फ सैर-सपाटे की जानकारी के लिए नहीं बल्कि हिंदी के रचनाकारों/साहित्कारों के लिए भी अच्छी पत्रिका है, साथ ही यह हमारी भारतीय संस्कृति, धर्म से भी रूबरू करवाती है ।प्रस्तुत कविताओ व गजलो काआनंद अलग है । पचमढ़ी पर कृष्न कुमार यादव , प्रयागराज पर आकांक्षा शंखधर की कवितायें उल्लेखनीय हैं तो जरूरी है ‘पर्यटन शीर्षक’ से  प्रो सी बी श्रीवास्तव विदग्ध की कविता पत्रिका के कलेवर के पूर्णतः अनुरूप है । पत्रिका में विज्ञापन नगण्य  हैं ।  सामग्री गंभीर है ।  पत्रिका पढ़ने लायक तो है ही उपहार में देने हेतु भी सर्वथा योग्य है .अपनी बात में सरदार पटेल की गुजरात में  नई लोकार्पित दुनियां में सबसे उंची मूर्ति के विषय में  संपादकीय जानकारी से परिपूर्ण है ।

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कुमारी दृष्टि, लखनऊ

kusumpsd@gmail.com

पत्रिका : प्रणाम पर्यटन (हिन्दी त्रैमासिक )

संपादक: प्रदीप श्रीवास्तव

प्रकाशक: प्रणाम पर्यटन पब्लिकेशन

पता: 537-F /64 –A , इंद्रपुरी कालोनी

आई आई एम – हरदोई रोड , बिठोली

लखनऊ-226013 (उत्तर प्रदेश)

कीमत: पचास रुपये

मेल: editorpranam@gmail॰com

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