आज दिखेगा सूपर स्नाे मून । आज रात का चांद बेहद विशाल और बहुत खूबसूरत होगा
आज माघ पूर्णिमा है। हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का दिन बेहद खास होता है। वैसे तो पूर्णिमा पर चांद का विशेष महत्व होता है, लेकिन आज माघ का चांद खगोलीय घटना के लिहाज से भी बहुत खास होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार आकाश में ऐसा खूबसूरत चांद अब 2555 दिनों बाद दिखेगा। ऐसे में आज चांद के दीदार का मौका खोया तो लंबे समय तक पछताना पड़ेगा।

आज आकाश में साल का सबसे बड़ा चांद दिखेगा। खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार आज रात का चांद बेहद विशाल और बहुत खूबसूरत होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार चांद का ये अनोखा स्वरूप केवल पूर्णिमा की वजह से ही नहीं, बल्कि एक खास खगोलीय वजह से दिखेगा। इस वजह से वैज्ञानिक इस खगोलीय घटना को सुपर स्नो मून (Super Snow Moon) कह रहे हैं। दुनिया के कुछ देशों में इस खगोलीय घटना को स्ट्रॉम मून (Storm Moon) या हंगर मून (Hunger Moon) या बोन मून (Bone Moon) कह रहे हैं।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार सुपर स्नो मून तब होता है, जब पूर्णिमा के दिन चांद-धरती के सबसे नजदीक होता है। इस वजह से इसका आकार और रोशनी आम पूर्णिमा के चांद के मुकाबले काफी ज्यादा होता है। इस दौरान चांद ज्यादा चमकीला और बड़ा दिखाई देता है। इसलिए इस खगोलीय घटना को सुपर स्नो मून कहा जाता है।

भारत समेत ये सुपर स्नो मून दुनिया के कई देशों में दिखेगा। सुपर स्नो मून का समय आज रात नौ बजकर 23 मिनट से शुरू होगा। भारत में सुपर स्नो मून आज (19 फरवरी 2019) की शाम 6:30 बजे, मुंबई में 5:20 बजे और कोलकाता में सूरज डूबने के बाद देखा जा सकता है। सुपर स्नो मून का समय रात 11 बजकर 23 मिनट तक बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार इन दिनों मौसम करवट ले रहा है। लिहाजा मौसम के अनुसार सुपर स्नो मून के समय में परिवर्तन भी हो सकता है।
सात साल बाद दिखेगा ऐसा चांद
वैज्ञानिकों के अनुसार अगले सुपर स्नो मून का नजारा आज के बाद करीब सात साल (लगभग 2555 दिन) बाद दिसंबर 2026 में दिखेगा। दुनिया भर में लोग इस खूबसूरत चांद को मोबाइल या कैमरे के जरिए तस्वीरों में कैद करते हैं और सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं। इससे पहले हुए सुपर स्नो मून की कई खूबसूरत तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर देखी जा सकती हैं। इस दौरान चांद अपने सामान्य आकार से लगभग 14 फीसद बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकीला दिखेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार चांद के पूरे आकार और रोशनी को देखने के लिए दूरबीन या टेलिस्कोप की मदद ली जा सकती है।

