प्रदेश नं. २ में मैथिली को सरकारी कामकाजी की भाषा बनाने के लिए जोर
राजविराज, २२ फरवरी । प्रदेश नंं. २ में मैथिली भाषा को सरकारी कामकाजी भाषा बनाने के लिए मैथिली भाषियों ने मांग किया है । अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर मैथिली साहित्य परिषद् द्वारा बिहीबार राजविराज में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए वक्ताओं ने ऐसी मांग की है । उन लोगों का कहना है कि सरकारी सेवा में प्रवेश करनेवालों के लिए भी यहां मैथिली में ही लोकसेवा आयोग की प्रश्नपत्र बनानी चाहिए ।
कार्यक्रम में बोलते हुए मैथिली महासंघ के अध्यक्ष विष्णु मण्डल ने कहा कि प्रदेश नं. २ में अधिकांश जनता मैथिली बोलते हैं और समझते हैं, इसीलिए यहां मैथिली भाषा का विकल्प खोजना ठीक नहीं है । उन्होंने कहा– ‘पहचान के नाम में आन्दोलन करनेवाले राजनीतिक दल और नेता ही आज अपनी मातृभाषा को भूल रहे हैं, जिसके चलते मैथिली भाषा का अपमान हो रहा है । ऐसे नेताओं को बहिष्कार करना है या मार्गदर्शन, अब हम लोगों को सोचने का वक्त आ गया है ।’
अध्यक्ष मण्डल का कहना है कि मैथिली भाषा का अपना ही लिपी, संस्कृति और पहचान है, इसीलिए मैथिली भाषा को ही प्रदेश नं. २ के लिए सरकारी कामकाज की भाषा बन सकती । कार्यक्रम में राजनीतिक विश्लेषक अमरकान्त झा, मैथिली साहित्य परिषद् के अध्यक्ष अशोक झा तथा श्याम सुन्दर यादव, मञ्जु श्रेष्ठ आदि वक्ताओं ने मातृ भाषा संरक्षण पर जोर दिया ।

