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लाख टके का जूता : विम्मी शर्मा

हिमालिनी, अंक फेब्रुअरी 2019 | (व्यंग्य ) लाख टके की बात यह है कि हमारे बड़बोले प्रधान मंत्री ने एक लाख रुपए के जूते पहन कर कमाल कर दिया । मीडिया कर्मी इस खबर से इस तरह से बौखलाए हुए हैं कि जैसे किसी ने उनका ही जूताा चुरा लिया हो । प्रधानमंत्री क्या ईंसान नहीं हैं ? क्या उन्हे अच्छे कपडेÞ या जूते पहनने ओढने का अधिकार नहीं है ? तो फिर इतनी हायतौबा क्यों ? इस से पहले कामरेड ने अपने पहले प्रधान मंत्रित्व काल में डेढ़ लाख के पलंग पर सो कर करिश्मा दिखा चुके हैं । इसी देश के एक स्वर्गीय प्रधानमंत्री की सुपुत्री भी गुच्ची कपंनी की डेढ़ लाख रुपए का हैंड बैग ले कर बजार गर्म कर चुकी हैं । अब वर्तमान की बारी है ।

हमारे पड़ोसी देश के प्रधान मंत्री १५ लाख रुपए का सूट पहनते हैं । आखिर में मीडिया किसी भी पब्लिक फीगर नेताओं की व्यक्तिगत चालढाल और रहन सहन पर इतनी तवज्जो क्यों देती है ? या तो मीडिया के पास लिखने या दिखाने के लिए और कोई समाचार नहीं है इसी लिए शायद किसी के कपड़े जूते पर भी समाचार बना कर अपने अखवार का पन्ना भरते हैं और उपर से पाठकों का दिमाग खराब करते हैं । पाठकों की रुचि भी समाज और साहित्य से ज्यादा राजनीति और उस के कारिन्दे नेताओं पर ज्यादा है । इसी लिए इस टाईप का समाचार पढ़ कर पहले अपना दिमाग खराब करते हैं और बाद में सोशल मीडिया में शेयर कर के उल्टा, सीधा कमेंट कर के टाईम पास करते हैं । इस देश में सभी फुर्सत में होते हैं जब दूसरों की शिकायत करने और मीनमेख निकालने का मामला हो तो । पर जब किसी को कोई मदद करनी हो तो यही लोग बगले झांकने लगते हैं ।

जब पीएम खरबों रुपए का पानी जहाज और मेट्रो रेल का दिवा स्वप्न देश की जनता को दिखा सकते हैं । हवा से बिजली निकाले और अन्तराष्ट्रीय विमान स्थल बनाने के हवा महल का निर्माण कर सकते हैं तो खुद के लिए लाख रुपए का जूता खरीद कर पहन क्यों नहीं सकते ? शायद पीएम जी ने पहली बार कोई ढंग का काम कहे बिना कर के दिखाया है । भले ही वह अपने लिए ही क्यों न हो । कम से कम इस के बारे में पहले से बोला नहीं बस चट से जूता खरीद लिया और पहन लिया । इस के लिए कोई तामझाम या उदधाटन का कार्यक्रम नहीं किया । यही उन का बड़प्पन है । वह चाहते तो एक करोड़ रुपए का जूता भी पहन सकते थे पर इस गरीब देश और यहां की कंगाल जनता की कगांली का ख्याल कर के बस सिर्फ एक लाख रुपए के जूते में ही अपने मन को समझा लिया ।

उन्होने देश और जनता के लिए कितना बड़ा त्याग किया है । यह किसी को दिखता नहीं हैं । बस सब मुँह खोल कर और जीभ निकाल कर आश्चर्य व्यक्त कर रहे जैसे दुनिया का कोई नौंवा अजूबा देख लिया हो । वैसे प्रधान मंत्री खुद दुनिया के आठवें अजूबे हैं । इसी लिए योग दिवस के एक समारोह में प्रमुख अतिथि के रूप मे निमंत्रित थे । जिस में सब एक तरफ मुँह कर के योग कर रहे थे और ओली जी दूसरी दिशा में पीठ कर के घोंचू जैसा मुँह बना कर ऐसे खडेÞ थे जैसे खेत में चिडि़यों को डराने के लिए रखा गया बिजुका हो । इतनी बड़ी बड़ी बाते करने वाला देश इस का सम्मानीय पीएम सिर्फ एक लाख रुपए का जूता पहने यह बात हजम नहीं हो रही हैं । कम से कम उन्हे अपने स्तर के हिसाब से तो जूते पहनने चाहिए थे । अरबों और खरबों रुपए के हवाई योजनाओं के बारे मे बड़ी– बड़ी बाते करने वाले आदमी को कम से कम एक करोड़ रुपए का जूता तो पहनना ही चाहिए ।

यह इस देश और जनता के लिए कितने शर्म की बात है कि उस का पीएम सिर्फ एक लाख रुपए का जूता पहनता है । पीएम को तो इस देश के अवाम के शरीर के खाल या चमड़ी के जूते बना कर पहनना चाहिए पर हमारे पीएम ओली बहुत ही दयालु है । उन को अपने देश की अवाम से बेईंतहा प्यार है इसी लिए तो एक लाख रुपए के जूते में सब्र कर लिया । जिस देश का पीएम घर–घर में पाईप से गैस आने की बात और सभी के मुँह में बिना हाथ पांव हिलाए खाने का निवाला पहुंचाने की बड़ी बड़ी बात कर के भरमाता हो उस के लिए एक लाख का जूता बहुत ही मामुली सी बात है । जिस देश के मंत्री, प्रधान मंत्री और व्यवसायियाें का स्विस बैंक में खाता हो । जहां पर इस सभी के काले धन छुप कर आराम फरमा रहे हो वहां कोई मंत्री या प्रधान मंत्री एक लाख का जूता पहने तो कोई आश्चर्य की बात नहीं हैं । बल्कि यह तो एक प्रकार से इस देश का अपमान हैं ।

जब स्विस बैंक वालो को मालुम होगा की नेपाल का पीएम सिर्फ कुछ हजार डालर का ही जूता पहनता है । तब यह बात जान कर उन स्विस बैंक वालों की कितनी बड़ी बेईज्जती हो जाएगी । हो सकता है वह स्विस बैंक के खाताधारी नेपालियों को अपने बैंक और खाते से बेदखल ही कर दे । और कहे कि “तुम जैसे भिखमगों का हमारे देश और बैंक में कोई जगह नहीं है, छी–छी तुम्हारे देश का पीएम कितना सस्ता जूता पहनता है, जिसके जूते इतने सस्ते हैं उसका विचार और कर्म और कितने सस्ते और घटिया होंगे ? ” इसी लिए मुझे पीएम से गहरी सहानुभूति है कि उन्होंने देश और जनता की गरीबी का ख्याल कर के सिर्फ एक लाख का ही जूता पहना पर अपनी इज्जत का कबाड़ा कर दिया । देश के प्रधान मंत्री को इतना दरियादिल नहीं होना चाहिए । वह सर्वहारा वर्ग के नेता हैं, जन्म से ही कम्यूनिष्ट हैं । पीएम जी को इतने सस्ते जूते पहन कर कार्ल मार्क्स, लेनिन, स्टालिन, एगेंल्स, हिगल और माओ का अपमान नहीं करना चाहिए था । बेचारों को स्वर्ग में भी चैन नहीं आ रहा होगा कि हमारे अनुयायियों ने हमारी नाक ही कटवा दी सस्ते जूते पहन कर ।
इसी लिए पीएम जी खुब बढि़या खाइए और पीजिए । खुब मंहगा और शानदार कपड़ा और जूता पहनिए ओढि़ए । हम लोग हैं न आपकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए । टैक्स के जरिए हम आप की सभी ईच्छाओं कीं पूर्ति करते ही हैं । भले ही आप सभी नेताओं की मंहगी, गाड़ी, बगंला, कपड़े, जूते और जेवर की ईच्छाओं को पूरी करते करते हमारी कमर ही आप के लगाए हुए टैक्स के पैसे देते–देते टेढ़ी हो जाए या टूट जाए । पर कोई बात नहीं हम सब गम हँस–हँस के सह लेंगे बस आप बड़ी बड़ी बातों की तरह जूते भी ज्यादा से ज्यादा महंगे पहनों और मौज करो । जैसे आप का पान की जगह पर मुहावरों से भरा मुँह है वैसा ही जूता भी पहनो । जब बिजली के खंबे पर अपना पोष्टर टांगने के लिए आठ करोड़ रुपए खर्च कर सकते हैं तो महंगे जूते खरीदने में क्यो नहीं खर्च कर सकते ? जब आप के शरीर पर ट्रान्सप्लांट हुए किडनी का मूल्य करोड़ों का है तब आप कपड़े और जूते भी उसी हिसाब सें करोड़ों रुपए का ही पहनो । तभी आप को सुहाएगा । बांकी हम हैं न ।



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