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फोरम पर्सा मिलापत्र.. दिल्ली अभी दूर है ! निर्वाचन समिति गठन,

 
रेयाज आलम, बीरगंज, चैत्र ७ गते बिहीबार | स.स.फोरम,नेपाल ने पर्सा जिल्ला अधिवेशन के लिए जिल्ला निर्वाचन समिति का गठन किया है। तीन सदस्य के जिल्ला निर्वाचन समिति में नवल किशोर यादव, दिनेश महतो और विश्वनाथ यादव का चयन किया गया है। स.स.फोरम, पर्सा, नेपाल के स्थानीय तह से लेकर जिल्ला तह तक का निर्वाचन की जिम्मेदारी निर्वाचन समिति की है। स.स.फोरम,नेपाल के निर्वाचन सम्बन्धी नियमावली सन २०१६ (२०७३) और केंद्रीय कार्यालय के चैत्र ४ गते परिपत्र अनुसार निर्वाचन सम्पन्न करने का कार्य निर्वाचन समिति की है। निर्वाचन समिति गठन से पहले जिल्ला कार्य समिति ने ३ दिन में जिल्ला सदस्य के उपस्थिति में वड़ा अधिवेशन करने का निर्णय किया था, निर्वाचन समिति के द्वारा स्थानीय तह से लेकर जिल्ला तह तक का निर्वाचन की जिम्मेदारी होने के कारण जितने वड़ा में निर्वाचन समिति के अनुपस्थिति में अधिवेशन किया गया है, वे अबैध हो जायेंगे।
पर्सा फोरम में सक्रीय सदस्यता फार्म भरने के समय से विवाद चल आ रहा है। सक्रीय सदस्य्ता भरने के बाद एक पक्ष ने एकतर्फी रूप से तीन दिन में अधिवेशन करने का तुगलगी फरमान जारी कर दिया,जिससे आहत होकर दूसरे पक्ष ने पत्रकार सम्मेलन करके निर्णय वापस लेने का ४ घंटे का समय दिया। पत्रकार सम्मेलन को नेतृत्व गण में गंभीरता से लेते हुए, जिला नेतृत्व को निर्देश दिया।
आलाकमान के निर्देश के बाद दोनों पक्ष बैठे और गठन हो चुके वार्ड में दूसरे पक्ष के लोगो को मिलाकर पुनर्गठन करने और नए वार्ड में गठन करने से पहले एक दूसरे को जानकारी कराकर संयुक्त उपस्थिति में गठन करने के निर्णय के साथ सहमति हुआ, लेकिन सहमति के बाद भी गठन प्रक्रिया की जानकारी दूसरे पक्ष को नहीं दिया गया और विवाद यथावत है।
दोनों पक्षों के विवाद में सबसे रोचक निर्वाचन आयोग का गठन रहा। स्त्रोत अनुसार मुख्यमंत्री पक्ष अपने अनुकूल निर्वाचन समिति गठन करवाया था, लेकिन पत्र जारी होते समय बारा जिला के लिए गठित समिति पर पर्सा अंकित करके भेजा हुआ पाया गया, इससे संगठन के भीतर मुख्यमंत्री की कमजोर होती पकड़ उजागर होती है। मुख्यमंत्री का पक्ष दोनों गुटों में जल-मल देकर दोनों को लड़ाने और दोनों का चहेता बनने का प्रयास किया, लेकिन वर्तमान अवस्था में पर्सा के दोनों पक्ष मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं करते और दोनों पक्ष के मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, अगर ऐसा हुआ तो मुख्यमंत्री अपने चाटुकारो के साथ अलग-थलग पड़ जाएंगे।

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