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रमण घिमिरे रचित ‘आखीझ्याल’ के ऊपर अन्तरक्रिया

 

काठमांडू, २५ मार्च । पत्रकार तथा रंगकर्मी रमण घिमिरे लिखित पुस्तक ‘आँखिझ्याल’ के ऊपर काठमांडू में एक अन्तरक्रिया आयोजन किया गया है । आँखिझ्याल वह कृति है, जहां नेपाली साहित्य, संगीत तथा कला क्षेत्र के शिखर पुरुष (१३ व्यक्तित्व) के बारे में लिखा गया है, जो लेखक रमण घिमिरे के साथ अन्तरंग संबंध रहे थे । पुस्तक में उन लोगों की जीवनी है, जो लेखक घिमिरे के साथ जूडा हुआ है ।
काठमांडू पुस्तक मेला के अवसर पर सोमबार आयोजित अन्तरक्रिया में अशेष मल्ल, शेखर खरेल और यशोदा तिम्सिना ने पुस्तक के बारे में समीक्षा की । समीक्षकों को मानना है कि पुस्तक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दस्तावेज है, लेकिन व्याकरणीय दृष्टिकोण से कई जगहों में त्रुटी भी पाई गई है ।

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नाट्यकर्मी तथा लेखक अशेष मल्ल को कहना है कि पुस्तक के अन्दर जो शाब्दिक अशुद्धियां दिखाई दी है, पुस्तक में समावेश पात्र, विषयवस्तु और लेखन शैली उसको भूला देती है । उनका मानना है कि पुस्तक पढते वक्त, पाठक पुस्तक में समावेश विषयवस्तु और संबंधित पात्र की जीवन कथा में इसतरह डूब जाता है कि उसको शाब्दिक अशुद्धियां की ओर खयाल ही नहीं रहता ।
इसीतरह दूसरे समीक्षक तथा लेखक एवं पत्रकार शेखर खरेल ने भी कहा कि पुस्तक में उतना ही विषयवस्तु को समावेश किया गया है, जितना लेखक घिमिरे के साथ जुड़ा हुआ है । राष्ट्रीय सूचना आयोग के सदस्य तथा पत्रकार यशोदा तिम्सिना ने कहा कि शाब्दिक अशुद्धियां के अलगा पुस्तक उत्कृष्ट है । लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तक में समावेश कूल १३ पात्रों में से १२ पात्र पुरुष और १ महिला हैं, जो समावेशी सहभागिता की दृष्टिकोण से सही नहीं लगता । उनका कहना है कि अगर आगामी दिनों में भी इस तरह का पुस्तक लिखा जाता है तो इसमें भी खयाल करनी चाहिए ।

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अन्त में लेखक रमण घिमिरे ने समीक्षकों की जिज्ञासा और प्रश्नों का जवाफ देते हुए कहा कि शाब्दिक और भाषिक अशुद्धियां को आगामी संस्करण में करेक्सन की जाएगी । उनका यह भी कहना है कि पुस्तक में समावेश जो भी पात्र हैं, यह उनकी सम्पूर्ण जीवन नहीं है, सिर्फ जीवन का एक पार्ट है, जो उनके साथ सम्बन्धित है ।
स्मरणीय है, आंखिझ्याल में अमर गुरुङ, ईश्वर बल्वभ, कमल दीक्षित, जगदिश घिमिरे, भीम बहादुर थापा जैसे व्यक्तित्व समावेश हैं । १३ व्यक्तित्व में से आज सिर्फ १ व्यक्ति ही जीवित हैं और १२ स्वर्गीय हो चुके हैं । इसीलिए वक्ताओं ने कहा कि नयी पीढ़ी के लिए यह पुस्तक एक संग्रहीणय दस्तावेज भी है । कार्यक्रम को साहित्यकार तथा लेखक राजेन्द्र सलभ ने सहजीकरण किया ।

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