नेपाल की ३६ हेक्टर जीमन चीन के कब्जे में, सरकार मौन
काठमांडू, २९ मार्च । नेपाल की ३६ हेक्टर जमीन पड़ोसी देश चीन के कब्जे पहुँच गई है । एक अध्ययन प्रतिवेदन ने इसका खुलासा किया है । उक्त प्रतिवेदन अनुसार संखुवासभा, रसुवा, सिन्धुपाल्चोक और हुम्ला जिला, जो चीन से जुड़ा हुआ है, वहां की जमीन चीन के कब्जे में पहुँच गई है । कहा गया है कि ११ नदियों ने अपनी रास्ता परिवर्तन करने के कारण उक्त जमीन नेपाल को खोना पड़ा है, जिसके संबंध में नेपाल सरकार मौन है ।
नेपाल सरकार कृषि मन्त्रालय अन्तर्गत रहे नापी शाखा द्वारा किया गया अध्ययन के अनुसार उक्त तथ्य सामने आया है । अध्ययन में ५ सर्वेयर और २० सहयोगी कर्मचारी शामील थे । बताया जाता है कि तिब्बती सीमा में जो सड़क संजाल बिस्तार हो रहा है, उसके कारण सीमा क्षेत्र में रहे नदियों ने अपनी मूल धार परिवर्तन किया, जिसके चलते नेपाली जमीन सीमाओं की पार हो गया ।
प्रतिवेदन में यह भी कहा गया है कि नेपाल–चीन सीमाओं में विकास निर्माण कार्य को इसीतरह तीव्रता दी जाएगी तो नेपाल को हजारों हेक्टर जमीन खोना पड़ सकता है । नेपाल–चीन सीमाओं में ४३ भंज्याङ (शिखर) है और ६ व्यापारिक नाका खुला है । विकास निर्माण संबंधी कार्य इसी नाकाओं के आसपास ज्यादा हो रही है । और इन्हीं नाकाओं के आसपास ही नेपाल को अपना जमीन खोना पड़ रहा है ।
जानकार लोगों को मानना है कि नेपाल–चीन सीमाओं में जो नदी नेपाल की ओर बहता है, उसमें बड़े–बेड़े खुला मैदान निर्माण होता जा रहा है, नदी के कारण ही ऐसी मैदान चीन की ओर खिसकता जा रहा है । जिससे सिर्फ नेपाल को अपनी जमीन खोना ही नहीं पड़ रहा है, नेपाल–चीन विवाद बढ़ने की सम्भावना भी दिखाई दे रही है । अगर एसी अवस्था बढ़ती जाएगी तो जल्द ही इसतरह की जमीन में चिनी सुरक्षा पोष्ट निर्माण होने की सम्भावना है ।


मात्र ३६ हेक्टोर की चिंता, पूरा कुन्ती व केरूँग जो चीन के क़ब्ज़े में आज है, जिसके लिए नेपाल तीन तीन युद्ध लड़ा। जिसे नेपाल भोट युद्ध के नाम से जाना जाता है।