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पर्सा फोरम द्वारा बिरगंज महानगरपालिका अधिवेशन के अद्भुत घटना : मुरलीमनोहर तिवारी

 

मुरली मनोहर तिवारी (सीपू), बीरगंज, चैत्र १६गते शनिवार
राजनीती में असल राजनेता वही होता है, जो अपने काम, कर्तव्य और व्यवहार से सबको आश्चर्यचकित कर दे। उसकी रणनीति और प्रस्तुति इतनी सबल हो की सभी साज़िश, सभी आशंकाओ को उल्ट कर रख दे। जहाँ भयंकर विवाद हो, टकराव के लक्षण हो, टूट-फुट की आशंका हो, ऐसे में नेता वही है जो चुटकी बजाकर सबको मिला दे। कुछ ऐसा ही दृश्य स.स.फोरम पर्सा, बीरगंज महानगर अधिवेशन में देखने को मिला। वास्तव में ये महानगर अधिवेशन नहीं शक्ति प्रदर्शन का अधिवेशन था। इस अधिवेशन पर सिर्फ पर्सा ही नहीं सम्पूर्ण मधेश की नजर थी। बिभिन्न पार्टियां आँख-कान खोलकर देख रही थी, की कब अधिवेशन में कोई दुर्घटना घटे और वे लोग लपक ले। संचार जगत ब्रेकिंग न्यूज़ और टीआरपी बढ़ने वाले मसाला न्यूज़ के इंतजार में थे।

नगर अधिवेशन में फोरम के दो गुट आमने सामने थे। एक तरफ ठाकुर राम बहुमुखी कैंपस के अध्यक्ष बनकर अपना राजनितिक जीवन शुरू करने वाले और स.स.फोरम के पूर्व नगर अध्यक्ष और वर्तमान में स.स.फोरम के जिला सह सचिव मुकेश द्विवेदी उम्मीदवार थे तो दूसरी तरफ मधेश आंदोलन में अग्रणी भूमिका निर्वाह करने वाले युवा नेता और महानगर के निवर्तमान अध्यक्ष  ईश्वर यादव उम्मीदवार थे। निर्वाचन समिति में एक दूसरे के घोर विरोधी माने जाने वाले केंद्रीय सदस्य शशि कपूर और जिला अध्यक्ष प्रदीप यादव थे। पहली आशंका तो मंच पर ही दोनों में ठन जाने की थी। दूसरी समस्या, दोनों उम्मीदवारों से कोई तमाशा खड़ा होने की थी। तीसरी समस्या, समर्थकों द्वारा बखेड़ा खड़ा करने की थी। चौथी समस्या, किसी घुसपैठिया द्वारा साजिश की थी। पांचवी समस्या, चुनाव होने पर पार्टी दो चिर में बट जाने की थी, और हारने वाले को शर्मिन्दगी के कारण पार्टी तक छोड़ने  की थी। छठी समस्या, चुनाव से कार्यकर्त्ता को खुलकर किसी का साथ देना पड़ता, जिससे दुरी बढ़ती और कार्यकर्त्ता का मनोबल गिरता। सातवीं समस्या, अगर कोई पक्ष नहीं मानता और समानांतर कमिटी बनता तो जिला भर समांतर कमिटी बनाने का शृंखला खड़ा हो जाने की थी । आठवीं समस्या, पर्दा के पीछे, रिमोट कण्ट्रोल से संचालित करने वालो को अनैतिक लाभ की थी। नौवीं समस्या, विवाद समाधान नहीं होने पर, फोरम के जिला भर के नेता पर नेतृत्व क्षमता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होने की थी। इस प्रकार कई विकराल समस्या मुँह बाये खड़े थे।
बीरगंज के टाउन हॉल में जिला अध्यक्ष ने इतना चुस्त-दुरुस्त इंतजाम किया था की घुसपैठिया तो क्या परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। सबसे पहले मंच पर शशिकपूर और प्रदीप यादव की जुगलबंदी ने माहौल बदल दिया। दोनों का तालमेल अविस्मरणीय था। दोनों राम-लक्ष्मण के रूप में प्रस्तुत हुए। अगर दोनों नेता इसी प्रकार मिलकर रहे तो पर्सा में इनसे प्रभावशाली नेतृत्व किसी पार्टी का नहीं हो सकता। दोनों अपने-अपने विशेषता के साथ अपने-अपने फिल्ड के दिग्गज है। जो बात शशिकपूर में नहीं वो प्रदीप यादव में है और जो बात प्रदीप यादव में नहीं वो शशिकपूर में है।

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जब उम्मीदवारी की बात आई तो दोनों उम्मीदवार और समर्थक में ठन गई, लेकिन बड़ी कुशलता से दोनों नेताओ ने दोनों उम्मीदवार को मना लिया। जब अपने राजनितिक जीवन का उल्लेख करते हुए, अपने भाषण में भावुक होकर मुकेश दिवेदी कहा की, “मेरी राजनीती मधेशवाद से शुरू नहीं हुई थी, फिर भी फोरम में मुझे स्थान मिला, मुझे अवसर मिला इसका मै आभारी हु, आज कांग्रेस-कम्युनिस्ट हमारे फूटने के इंतजार में है, मैं उनका सपना कभी पूरा नहीं होने दूंगा। उनका मुँह कला करने के लिए और मधेश को मजबूत करने के लिए मैं मुकेश दिवेदी,  ईश्वर यादव को महानगर अध्यक्ष का घोषणा करता हूँ।” बड़ा ही मनोहर और भावुक दृश्य था, हाल में उपस्थित सभी की आँखे छलछला आई। मंच पर ईश्वर यादव को मुकेश दिवेदी ने माला पहनाया, दोनों गले मिले।

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मधेश हमेशा गुट और फुट का शिकार होता आया है। ये मधेश की नई पीढ़ी है जिसमे शशिकपूर, प्रदीप यादव, मुकेश दिवेदी, ईश्वर यादव जैसे नेता है जो आपस में लड़ेंगे-झगड़ेंगे लेकिन मधेश विरोधी को लाभ नहीं पहुंचने देेगे  ।  यह संकल्प इसी तरह रहा तो पर्सा जैसे पहले फोरम का क़िला रहा है आगे भी रहेगा और उस किला में कोई सेंध नहीं लगा पाएगा।

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