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फेसबुक ने रंगभेद आधारित राष्ट्रवाद व अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले कन्टेन्ट पर लगाया राेक

 

द न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन।

 

सोशल मीडिया  फेसबुक ने रंगभेद आधारित राष्ट्रवाद व अलगाववाद को बढ़ावा देने व उसका समर्थन करने वाले सभी कंटेंट पर रोक लगा दी है। न्यूजीलैंड की दो मस्जिदों पर ऑस्ट्रेलिया के श्वेत बंदूकधारी द्वारा अंधाधुंध गोलियां बरसाने के बाद फेसबुक ने यह फैसला लिया है। इस हमले में 50 लोगों की जान गई थी। हमलावर ने फेसबुक पर लाइव रहते हुए इस घटना को अंजाम दिया था। इसके चलते फेसबुक सवालों के घेरे में है। कई नागरिक अधिकार समूह का भी आरोप था कि फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म पर रंगभेद आधारित नफरत व हिंसा फैलाने वाली सामाग्री पर रोक लगाने में असफल रहा है।

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उल्लेखनीय है कि फेसबुक ने इससे पहले रंगभेद आधारित वर्चस्ववाद संबंधी कंटेंट पर रोक लगाई थी। लेकिन इससे जुड़े अलगाववाद या राष्ट्रवाद संबंधी सामाग्री प्रतिबंधित नहीं थे। बुधवार को फेसबुक ने कहा कि नागरिक अधिकार समूह व नस्ली मामलों के विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद उसने अपनी नीति बदली है। लॉयर कमिटी फॉर सिविल राइट के अध्यक्ष व कार्यकारी निदेशक क्रिस्टेन क्लार्क ने कहा, ‘रंगभेद आधारित वर्चस्ववाद के विचार को रंगभेद आधारित राष्ट्रवाद व अलगाववाद से अलग करके देखा जाता है, लेकिन इन सब में कोई अंतर नहीं है। इन सब से नफरत व हिंसा को बढ़ावा दिया जाता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे विचारों से सोशल मीडिया पर नफरत फैलाई जा रही है जिसे रोकना बहुत जरूरी है। फेसबुक का यह कदम इस दिशा में बेहतरीन प्रयास है।

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फेसबुक ने फिलीपींस में हटाए 200 अकाउंट

फेसबुक ने अप्रामाणिक व्यवहार के चलते फिलीपींस के 200 अकाउंट व पेज हटा दिए हैं। उसका कहना है कि इन अकाउंट को उनके कंटेंट नहीं बल्कि व्यवहार के लिए हटाया गया है। दरअसल, कुछ प्रमाणिक व फर्जी अकाउंटों से एक साथ चुनाव संबंधी स्थानीय व राष्ट्रीय खबरों को फैलाया जा रहा था। फेसबुक ने इस ऑनलाइन गतिविधि में ऑमनीकॉम मीडिया ग्रुप के सीईओ निक गबुंदा के शामिल होने की बात कही है। निक 2016 के चुनाव में राष्ट्रपति रोड्रिगो दुर्तेते का ऑनलाइन अभियान संभालने का दावा कर चुके हैं।

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