ब्रहम्हांड में सबसे पहले दिखे ब्लैक हाेल का किया गया नामकरण, जानिए क्या मिला है नाम
हिलो , एपी

हवाई विश्वविद्यालय के भाषा विज्ञान के एक प्रोफेसर ने ब्रम्हांड में सबसे पहले दिखाई दिए ब्लैक होल( Black hole) का नाम ‘पोवेही’ (Powehi) दिया है। समाचार पत्र होनुलुलु स्टार एडवर्टाइजर ने गुरुवार को बताया कि हवाई विश्वविद्यालय के हिलो हवाइयन के प्रोफेसर लैरी किमूरा ने ब्लैक होल का नामाकरण किया है।
बता दें कि दुनिया में पहली बार आठ रेडियो टेलीस्कोप के डाटा से ब्लैक होल की पहली तस्वीर बुधवार को दिखाई गई थी। अखबार ने कहा कि ब्लैक होल के नाम को 18 वीं शताब्दी के हवाइयन गीत कुमुलिपो से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘अतिसुंदर अथाह अंधेरी रचना’ या ‘अंधेरे स्त्रोत को सुशोभित करती एक अनंत रचना’ है।
खगोलशास्ति्रयों ने कहा कि ब्लैक होल को हवाइयन भाषा का नाम देना इसलिए उचित था, क्योंकि ब्लैक होल परियोजना में हवाई के दो टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया गया था।
ब्लैक होल के चित्र पर कॉपी राइट का दावा करने पर चीन की एक आनलाइन कंपनी की काफी आलोचना हो रही है। कंपनी ने न केवल ब्लैक होल के चित्र के कॉपी राइट का दावा किया, बल्कि उसने अपनी वेबसाइट पर लोगो के साथ उसे लगा दिया।
चीन के एक दैनिक अखबार ने शुक्रवार को कहा, बुधवार को जैसे ही ब्लैक होल की तस्वीर जारी हुई, वेबसाइट विजुअल चाइना ग्रुप ने यह कहते हुए अपने लोगो के साथ ब्लैक होल की तस्वीर लगा ली कि जो भी इस चित्र का इस्तेमाल करेगा उसे उसके बदले में भुगतान करना होगा। कंपनी ने गुरुवार को यह दावा करते हुए एक बयान जारी किया कि उसने इवेंट होरिजिन टेलीस्कोप से मीडिया में इस्तेमाल के लिए ब्लैक होल के चित्र का कॉपी राइट हासिल कर लिया है।
अखबार ने कहा कि यूरोपियन साउदर्न ओब्जरवेटरी (इएसओ) और नासा जैसे शोध संस्थानों की वेबसाइट से चित्रों का लेना मुफ्त है। वेबसाइट से चित्र लेते समय केवल उनको क्रेडिट देना होता है। इएसओ ने कहा कि ब्लैक होल के चित्र के लिए चीनी कंपनी विजुअल ग्रुप ने उससे कोई संपर्क नहीं किया और चित्र पर किसी तरह का कॉपी राइट का दावा करना पूरी तरह से अवैध है।
दैनिक जागरण से

