विभेद विरुद्ध कानून बनाए जाने की माँग करते हुए प्रदेश नम्बर दाे के न्याय अधिवक्ता काे ज्ञापनपत्र
जनकपुर १३ मई
तराई मधेश उत्थान फाउन्डेसन द्वारा प्रदेश नम्बर दाे के न्याय अधिवक्ता श्री दीपेन्द्र झा काे एक पत्र दिया गया है जिसमें हाल में नागरिकता वितरण के क्रम में नम्रता वागले द्वारा एक वीडियाे जारी कर के जिसमें सभी मधेशियाें काे भारतीय कह कर नागरिकता लेने की बात कही गई है पर आपत्ति जताते हुए नस्ल विराेधी कई मुद्दे का उल्लेख किया गया है । पत्र मे माँग की गई है कि विभेद के विरुद्ध पुख्ता कानून प्रदेश नम्बर दाे में बनाया जाना चाहिए ।
आदरणीय न्यायअधिवक्ता जी
प्रदेश नं. २, जनकपुर, नेपाल
महोदय, नेपाल में संघीयता मधेशी–थारु लगायत सम्पूर्ण सीमाकृत समुदाय के सर्वोच्च बलिदान का परिणाम है । नेपाल के नस्लवादी शासन के खिलाफ लडने के लिए लोगों ने अपना जान की कुरवानी दी है । हमारा कर्तव्य है कि हम शहीदों के सपनों को पूरा करें और सीमान्तकृत समुदाय लगायत नेपाल के करोडो लोगों की आकंक्षा को पूरा करे, जो न्याय, समानता और भाईचारा पर आधारित शासन व्यवस्था चाहते है । यद्यपि नेपाल में संघीयता प्राप्त हो गया है, भेदभाव और एक जातीय शासन के खिलाप लडाई अभी तक पूरी नही हुई है । वर्तमान संघीय ढाँचा अधूरा है और संघीयता, स्वशासन (स्वराज) के सिद्धान्त के खिलाफ है । प्रदेश सरकार के पास लोगो की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सीमित संसाधन और शक्ति है । स्व–शासन की कमी के कारण लोगो में अपनत्व भावना का अभाव है ।
संघवाद की वर्तमान संरचना अधूरी है, कमजोर है; और संघवाद नस्लवादी शासन द्धारा लगातार हमले के अधीन रहा है । मधेशी, मुस्लिम, थारु और जनजाति हमेशा हमले और विभेद का का शिकार बनते आ रहे है । इस सन्दर्भ में हम आप का ध्यान हाल की विरगञ्ज में हुई घटना की ओर ले जाना चाहते है । नम्रता वागले ने जिला प्रशासन कार्यालय के कतार में लगे पर्सा लगायत के लोगो पर भारतीय होने का आरोप लगाते हुए भिडियो भाइरल किया और सामाजिक सदभाव विगाडती हुई लोगो का गुमराह करने की कोशिश की । वागले नेपाल में ऐसे लोगो का एक वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है जो त्वचा के रंग और लोगो के नस्ल के आधार पर राष्ट्रवाद का फैसला करती है । इस तरह की घटना एक सोची समझी साजिश की तरह नियमित रुप से किया जाता है । ये एक इतिहास रहा है राष्ट्रीय स्तर के कुछ मिडिया और कई स्थानिय मिडिया विषेस रुप से मधेशी, मुस्लिम, थारु और जनजातियो के खिलाप पक्षपात करते आ रहे है । प्रदेश २ सरकार संघीयता की जननी है और संघीयता स्थापित करने में हमारे शहिदो का अतुलनीय योगदान रहा है । प्रदेश २ सरकार को न्याय के ध्वजवाहक के रुप में कार्य करना चाहिए । सरकार को प्रदेश के बाहर रहे मधेशी, मुस्लिम,थारु और जनजाति शहीद और आन्दोलन के घायल के लिए सरकारी सहायता कार्यक्रम का विस्तार करना जिम्मेवारी बनती है । हमारे प्रधानमन्त्री का सुखी नेपाली और समृद्ध नेपाल का नारा तभी पूरा हो सकता है जब कतार के अंतिम ब्यक्ति का भी समान अबसर और संसाधन में समान साझेदारी हो । न्याय और समानता, सामाजिक सदभाव, समृद्धि और दिर्घकालिन शान्ति प्राप्त करने के लिए आधार है । हम पनी सरकार से नम्रता वागले द्धारा किया गया रंगभेदी तथा नस्लीय घटना के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और नस्लीय दुव्र्यवहार के खिलाफ लडने के लिए विशेष टास्क फोर्स स्थापित करने का माँग करते हैं । सरकार द्धारा जनता को न्याय महशुस कराने के लिए नम्रता वागले जैसे लोगो को कानुन के कटघरे में लाकर देश और समाज में न्याय, समानता और भाईचारा स्थापित करने के लिए निम्न लिखित मांग करते हैं।
१) जातीय विभेद जैसे मदिशे, धोती, देशी, काले, मनुमखि मर्सिया खः आदि इत्यादि रंगभेदी शब्द और इसको बढावा देने पे कम से कम पाँच साल की जेल सजा हो ।
२) बुदा नं. १ को लागु करने के लिए प्रदेश सरकार द्धारा एक शसक्त कानुन पारित हो और संघिय सरकार भी इसी तरह का कानुन लाय उसके लिए प्रदेश सरकार द्धारा पहल हो ।
३) नम्रता वागले और उसको साथ देने वाले और लोगो के भी उपर प्रदेश सरकार द्धारा कारवाई की प्रक्रिया आगे बढाया जाय ।
४) ऐसे विद्युतिय माध्यमद्धारा सामाजिक सदभाव खलबलाने पर और रंगभेदी व्यवहार को वढावा देने के विरुद्ध प्रदेश सरकार द्धारा साईबर क्राइम का पुख्ता कानुन लाया जाय ।
तराई मधेश उत्थान फाउन्डेसन प्रतिनिधि ……………………………………………… संजय यादव



