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किसकी हार किसकी जीत : अजयकुमार झा

जलेश्वर, 23 मई । मोदी के नेतृत्व में बी.जे.पि. का यह जीत एक पार्टी का नहीं वल्कि पुरे भारतवर्ष का जीत है। सिर्फ भगवा का नहीं भारतीय संस्कृति का जीत है। हिंदुवादियों का ही नहीं हिन्दू सनातन संस्कृति और सभ्यता का जीत है। यह सिर्फ गांधी के अहिंसक आन्दोलन का ही नहीं वल्कि सुभाष, भगत और आजाद के क्रांतिकारी नेतृत्व का जीत है। यह सिर्फ गांधी के त्याग का ही नहीं वल्कि नाथूराम के कठोर निर्णय का भी जीत है। यह सिर्फ मानवीय प्रयास का ही नहीं वल्कि माहादेव के आशीर्वाद का भी जीत है। यह जीत नताओं के इमानदारी का ही नहीं वल्कि आम नागरिक के गहन समझदारी का भी जीत है। यह आयुष्मान भारत का जीत है। यह उज्ज्वला कार्यक्रम का जीत है। यह एक वुलंद व्यक्ति के ऊपर भारतीयों के भरोशे की जीत है। यह कथनी और करनी के बिच के तारतम्यता का जीत है। भारत के सम्मान को विश्वव्यापी कराने की जीत है। यह वशुधैव कुटुम्बम्कम के विश्वव्यापी प्रभाव का जीत है। यह सर्जिकल स्ट्राइक के जोश का जीत है।
यह एयर स्ट्राइक के नायक अभिनन्दन का ससम्मान घर वापसी का जीत है। शत्रु के घर में घुसके मारनेवाले वीर सेनाओं के उमंग का जीत है। यह सकारात्मक राजनैतिक व्यवहार का जीत है। यह वंशवाद के विरुद्ध विकासवाद का जीत है। यह जातीय उन्माद के विरुद्ध मानवीय उत्थान का जीत है। यह काश्मीर में पंडितों के पुनर्वापसी का जीत है। चीन के विरुद्ध डोकलाम में अंगद की तरह लिए गए अडान का जीत है। यह योगी के बजरंगबली का जीत है। यह सबका साथ सबका विकास का जीत है। यह आम नागरिक के विश्वास का जीत है। यह स्वरोजगारियों का जीत है। यह मोदी के लिए जनता के प्यार और आशा की जीत है। वर्त्तमान के चाणक्य अमित शाह के संरचनात्मक रणनीति का जीत है। यह वुलंद नेता, वैज्ञानिक निति और सर्वजन हिताय नीतियों का जीत है। यह भारतीय राष्ट्रवाद का जीत है। यह भारतीय चौकीदारों का जीत है। यह साध्वी साक्षी के कठोर साधना और यातना की जीत है। यह सिर्फ समृद्धि के भावो की जीत नहीं वल्कि गरिवो की भावनाओं के सम्मान का जीत है। मोदी के निश्वार्थ भावना और इमानदार चरित्र तथा पवित्र संस्कार का जीत है।
यह कुसंस्कारियों की हार है। गाली गलौज करने वालों की हार है। बुजुर्गों को अपशब्द बोलनेवालों की हार है। भारत के टुकड़े करनेवालों की हार है। वंशवाद के पृष्ठपोषकों की हार है। जनभावना के हत्यारों की हार है। लोकतंत्र को तारतार करनेवालो की हार है। कौरव दलो का हार है। पाक परस्तों का हार है। क्षुद्र निति और भ्रष्ट नैतिकता की हार है। यह धूर्त सूर्पनखा, मुर्ख पूतना और क्रूर कैकेयी का हार है। कांग्रेस के अदूरदर्शिता और माया के मूढ़ता का हार है। विहार के अशिक्षित लल्लुओं और बंगाल के देशद्रोही हिन्दू विरोधी उल्लुओं की हार है। सिद्धू जैसे उद्दण्ड बयानबाजो का हार है। साम्प्रदायिकाता के सर्जकों की हार है। भगवा आतंकवाद बोलानेबालों की हार है। यह जातीय समीकरणों की हार है। यह धार्मिक कट्टरता और जेहादी उन्मादों का हार है। यह काश्मीरी आतंकियों के समर्थकों का हार है। काश्मीर से भारतीयों को पलायन करानेवालो की हार है। व्यक्तिगत स्वार्थ हेतु धर्म के नामपर तुष्टिकरण करनेबालों की हार है। महान संत करपात्री जी द्वारा शापितों की हार है। आतंकी बिचारों का हार है। देश के गद्दारों और मक्कारों का हार है। यह मोदी से नफ़रत करानेबालों का हार है। अंत में मोदी का यह भीषण जीत अहंकारियों के ऊपर महादेव का प्रचंड प्रहार है।

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