Sun. May 10th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

राजसंस्था पुनस्थापित हो सकता है ः प्रधानमन्त्री

hindi magazine
 

hindi magazineकाठमांडू, १२ अक्टुबर । प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टराई ने राजनीतिक संकट समाधान के लिए विघटित संविधानसभा पुनस्थापना पर जोड दिया है । आज तनहुँ स्थित डुम्रे बजार में आयोजित एक कॉलेज का उद्घाटन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उन्होंने यह बात बतायी । लेकिन प्रधानमन्त्री डा. भट्टराई का कहना था कि राजनीतिक दलों के बीच सहमति होने के बाद ही संविधानसभा पुनस्थापना हो सकता है । संविधानसभा का पुनस्थापना नहीं हुआ तो नए संविधानसभा की चुनाव पर प्रधानमन्त्री ने जोड़ दिया ।
राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं हुआ तो वि.सं. २००७ और ०१७ साल की अवस्था ओने की चेतावनी देते हुए प्रधानमन्त्री डा. भट्टराई ने कहा–  “उस समय में भी संविधान जारी नही होने के कारण तत्कालिन राजा महेन्द्र ने संसदीय चुनाव करवाकर सत्ता हाथ में लिया था । आज भी वही नजिर के हवाला देकर राजतन्त्र पुनस्थापना हो सकता है । अगर ऐसा हुआ तो देश को बुहत ही बड़ा क्षति भुगतना पड़ेगा ।”
४ वर्ष तक संविधानसभा में किया गया परिश्रम उसके विघटन के साथ ही नाकाम होना दुःख की बात बताते हुए प्रधानमन्त्री ने आगे बताया, “इसी के कारण राजनीतिक दल भी जनता की नजर में कलंकित और असफल सिद्ध हो गया है ।” आज भी संविधान निर्माण का विकल्प दूसरा कुछ नहीं होने की बात बताते हुए प्रधानमन्त्री डा. भट्टराई ने जिस तरह हो, संविधान निर्माण करने पर ही जोड दिया । इसके लिए संविधानसभा की पुनस्थापना क्यों न हो, इसे स्वीकार करना आज की बाध्यता होने की दावा प्रधानमन्त्री का था । इस के लिए अपने–अपने राजनीतिक अडान और दुराग्रह त्याग कर सभी दलों को सहमति में आने के लिए भी उन्होंने आग्रह किया ।
इसीतरह प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टराई ने जनता के साथ सहकार्य करने से मात्र विकास निर्माण कार्य सम्भव होने की बात बताया है । आज शुवह चितवन स्थित एक पुल का उद्घाटन करते हुए प्रधानमन्त्री डा. भट्टराई ने यह बात कही थी । उन्होंने कहा– “ग्रामिण क्षेत्र के विपन्न वर्ग की उत्थान जब तक नहीं होगा, तब तक देश की विकास सम्भव नहीं है ।”

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *