Fri. Oct 4th, 2019

बढता हुआ कर और लहराता हुआ भ्रष्टाचार : कैलाश महतो

लजिस्टिक समिट उदघाटन समारोह
काठमाडौँमा आइतबार आयोजित इन्डिया–नेपाल लजिस्टिक समिट उदघाटन कार्यक्रममा प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली र नेपालका लागि भारतीय राजदूत मञ्जिभसिंह पुरीलगायत । तस्बिर ःप्रदीपराज वन्त photo साभार

कैलाश महतो | कर असुली इतिहास की बात की जाय तो इसका कोई निश्चित तिथि नहीं दिखाई देती । मगर इतना जरुर है कि प्राचीन समय से ही इस प्रणाली की शुरुवात हुई है । प्राचीन काल के राजा महाराजाओं के अनावश्यक खर्चें ही इसकी मूल दिखाई देती है । राजा महाराजाओं के ऐशो आराम तथा उनके दरबार व राज्यों के सुरक्षा में खटने बाले सैनिकों के भरण पोषण के साथ भी होता है ।
मध्य काल में इसके रुप में कुछ परिवर्तन किये गये । मिश्र में कर असुल करने बालों को scribes कहा जाता था जो सरकार के तरफ से नियुतm अधिकारी होते थे । वे सरकार के कर प्रणाली अन्तर्गत मिश्र के जनता द्वारा उसके घरों में प्रयोग होने बाले तेल पर कर वसूल करते थे ।
ग्रीस के शासकों ने अपने जनता पर जो कर लागू की थी, उसे eisphora कहा जाता था । प्रत्येक परिवार के लिए वह कर राज्य के खाते में जमा करना अनिवार्य होता था जब देश किसी युद्ध में रहा हो । मगर ग्रीक जनता इतना सक्षम थी कि देश युद्ध के खतरों से बाहर आते ही कर देना बन्द कर देती थी । आवश्यकता से ज्यादा जब सरकार के पास कर का ज्यादा रकम हो जाता, सरकार जनता को रकम वापस भी करती थी ।
ग्रीक सरकार Athenian के रुप मेें विदेशीे लोगों से पुरुष से एक दिरहम ‐drachma_) और महिला से आधा दिरहम प्रति व्यतिm कर वसूल करती थीे ।
रोमन साम्राज्य में Caesar Augustus के शासन काल में वंशीय कर प्रणाली लागू हुई थी जो सैनिकों को retirement funds के रुप में सरकार द्वारा प्रदान की जाती थी । उस कर प्रणाली कोProtoria कहा जाता था । वह कर वस्तुओं के आयात और निर्यात पर लागू था । सीजर के शासन काल में बिक्री कर १%, दास बिक्री कर ४% और अन्य वस्तुओं के बिक्री पर १% की कर लागू थी ।
ब्रिटेन में पहली बार कर प्रणाली तब लागू हुआ जब रोमन साम्राज्य का ब्रिटेन पर आधिपत्य स्थापित हुआ ।Lady Godiva एक Anglo-Saxon महिला थी जो ब्रिटेन में ११वीं शताब्दीतक रहीं । उन्होंने ब्रिटेन में कर प्रणाली की शुरुवात की । बाद में जब रोमनों की समाप्ति हुई, Saxon Kings ने जमीन और सम्पति पर Danegeld नामक कर लगायी ।
इंग्ल्याण्ड और फ्रान्स के बीच सन् १३३७ से १४५३ तक चले द्वन्दात्मक युद्ध में ब्रिटेन ने जनता पर तेज कर लागू की थी । १४वीं शदी में ब्रिटन में कर उच्च स्तर पर था । सन् १३७७ में व्यतिm कर ५२० गुणा ज्यादा हो गया था । वह कर किसानों से असूला जाता था । फिरभी शुरुवा के सालों में गरीबों से किसी प्रकार का कर नहीं ली गयी । कर केवल व्यापारी, कार्यालय के अधिकारी और कलर्जियों से लिये जाते थे ।
ब्रिटेन में चाल्र्स प्रथम के द्वारा बाद में जब गरीबों से भी कर लिये जाने लगे तो सन् १६४३ में आलिभर क्र्रौमवेल और राजा के बीच में दूरी बढी जिसके कारण राजा का गर्दन काटकर हत्या कर दी गयी ।
औपनिवेशिक अमेरिका अपने जनता और उसके अन्दर के उपनिवेशों पर शीरा ऐक्ट Molasses Act) के तहत कर वसूल करता था । उसकी सुधार सन् १७६४ में हुई जब शीरा, चिनी, शराब लगायत अन्य वस्तुओं पर आयात कर लागू हुई । उसे Sugar Act कहा जाता है । मगर उस ऐक्ट ने सन् १७६५ में Stamp Act लागू किया । उस Actने सारे समाचार पत्रों तथा व्यापारिक एवं कानुनी दस्तावेजों समेत पर प्रत्यक्ष कर लगा दी ।
उत्तर अमेरिकी विद्रोह के पश्चात् अमेरिका ने राजकीय राजस्व बढावा के नाम पर सन् १७९१ में कर प्रणाली लागू की जिसका विरोध जमकर सन् १७९४ में हुआ । उस विद्रोह को व्हिस्की विद्रोह कहा जाता है । उस विद्रोह को दवाने के लिए राष्ट्रपति जर्ज वासिंगटन ने लडाकू के कुछ डफ्फे भी भेजे थे । बाद में उन्होनें विद्रोहियों को माफ कर दी । सन् १७९८ में अमरिका ने फ्रान्स से संभावित युद्ध को ध्यान में रखते हुए संघीय सम्पति कर लागू कर सैनिक खर्च के लिए राजस्व संकलन का योजना बनाया । अमेरिका ने आय कर प्रथम दफे सन् १८१२ में लागथू की जब वह युद्ध में था । वह कर ब्रिटिश कर ऐक्ट १७९८ पर आधारित था ।
कर के लफडों के इतिहास के क्रम में अमेरिकी काँग्रेस के १६वां अनुमोदन के बाद सन् १९५० से अमेरिका में व्यतिm के आय पर भी कर लगने का प्रावधान कायम हुआ ।
Collins English Dictionary के अनुसार ः

A compulsory financial contribution imposed by a government to raise revenuelevied on the income or property of persons or organizations, on the Production costs or sales prices of goods and services, etc is Tax.

सत्य कहें तो राज्य और जनता के बीच में लेनदेन का सम्बन्ध है । संसार का कोई भी राज्य नैतिक रुप से अपने जनता के प्रति वफादार या इमानदार नहीं होता । देश और जनता के प्रति न तो नेता वफादार होता है, न शासन व्यवस्था और न शासक के प्रति जनता विश्वस्त होती है । देश सेवा के नाम पर जनता से उठाये गये कर पर नेता राज करता है, सुख पाता है, सम्मान पाता है, दुनियाँ का शयर करता है और संसार में नाम कमाता है । भ्रष्टतचार करता है । अपने घर, व्यापार या व्यतिmगत सम्पति से कोई नेता देश या समाज का सेवा नहीं करता । देशप्रेम एक बहकाव है । जो अपने जिन्दा ना हो, वह कौन से देश और समाज तथा भगवान् या माता पिता का सेवा कर पायेगा । देशप्रेम और उसका विकास का नाम देकर शासक लोग जनता को भ्रम में डालकर अपना उल्लू सीधा करते हैं ।
अगर कोई शासक देश का विकास करता है तो उसका अर्थ यह नहीं कि वह देश और जनता के प्रति इमानदार और वफादार है । वह अगर वैसा है तो जनता से डर के कारण है । अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान जैसे देशों की जनता इतना सक्षम है कि अपने पैसों का हिसाब रखती है । नेता अगर गलत करता है तो मेक्सिको के नेता जैसे जनता मन्त्रीतक को सार्वजनिक रुप में सजा देती है । नेता या शासक यह कतई नहीं चाहता कि उसका जनता उसके बराबर समझदार, होशियार और तेज हों । जनता जिस रोज समझ लें कि वे कर के रुप में जो पैसे देती है, वह उसका है तो नेता डर के मारे इमानदार हो जायेगा या वह राजनीति ही छोड देगा ।
जनता सरकार को अपना सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार सुरक्षाओं के लिए कर देती है । जब राज्य, सरकार और शासक कर लेकर भी जनता को उसका मौलिक आधार उपलब्ध न करा पाये तो जनता को यह समझ लृनी चाहिए कि उसका न तो राज्य है, न सरकार और न शासक । वैसे राज्य और सरकार से नाता तोड लेनी चाहिए ।
ज्ञानेन्द्र शाही का एक आर्थिक रिपोर्ट नेपाली जनता का आँख ओलने के लिए काफी है । वह रिपोर्ट देश का आर्थिक सर्वेक्षण का है ।
नेपाली जनता गरीब क्यों है ? क्या इस अवस्था में जनता सम्पन्न हो पायेगी ?
एक नेपाली नागरिक का आय अगर आय अगर रु. १,०००÷– है तो,
उस आय में सरकार इन शीर्षकों पर करें लेती है ः
आय कर ः ३६% –रु. ३६०÷–
भ्याट ः १३% – रु. १३०÷–
आयात कर ः १०% –रु. १००÷–
ड्यूटी कर ः २५% –रु. २५०÷–
बिक्री कर ः १०% –रु. १००÷–
वैसे ही एक लाख के एक मोटरसाइकिल पर– ८०% कर लेती है ।
मोटरसाइकिल दर्ता खर्च रु. १५,०००÷– ।
दश लाख के एक चार चक्के गाडी खरीद पर –२४५% कर ‐रु.२४ लाख, ५० हजार)
हमारे ये सारे पैसे कहाँ जाते हैं ? वे सारे पैसे नेता, मन्त्री, उनके चम्चे, उनके कार्यकर्ता, अधिकारी, कर्मचारी खा जाते हैं । भ्रष्टाचार कर लेते हैं ।
देखे ट्रान्सपरेन्सी इण्टरनेशनल और सीएनएन का नेपाल में होते भ्रष्टाचार सम्बन्धि ताजा रिपोर्ट ः

The Kathmandu Post

Sunday, July 28, 2019

As I Like: Nepal is mired in corruption and it is unlikely to get better any time soon- Deepak Thapa

For the record, Nepal stood 124th in 2018 with a score of 31 while Somalia brought up the rear at 180th and a score of just 10. For the record, Nepal stood 124th in 2018 with a score of 31 while Somalia brought up the rear at 180th and a score of just 10.

Nepal is the 124 least corrupt nation out of 175 countries, according to the 2018 Corruption Perceptions Index reported by Transparency International. Corruption Rank in Nepal averaged 127.40 from 2004 until 2018, reaching an all time high of 154 in 2011 and a record low of 90 in 2004.

 

Nepal – Credit Rating at 15.00

Nepal Consumer Price Index Cpi at 127.74 Index Points

Nepal Weighted Average Interbank Transaction Rate at 6.91 percent

Nepal Interest Rate at 6.50 percent

Nepal Food Inflation at 4.70 percent

Nepal Inflation Rate at 5.30 percent

Nepal GDP per capita PPP at 2724.00 USD

Nepal GDP per capita at 812.20 USD

Nepal GDP at 28.81 USD Billion

Nepal Foreign Direct Investment at 17512.80 NPR Million

Nepal Changes In Inventories at 377968.00 NPR Million

Nepal Gold Reserves at 6.40 Tonnes

Nepal Sales Tax Rate – VAT at 15.00 percent

Nepal Military Expenditure at 397.00 USD Million

Nepal Government Debt to GDP at 30.40 percent

Nepal GDP From Utilities at 21065.00 NPR Million

Nepal GDP From Wholesale and Retail Trade at 131079.00 NPR Million

Nepal GDP From Transport at 90039.00 NPR Million

Nepal GDP From Mining at 4261.00 NPR Million

Nepal GDP From Public Administration at 16763.00 NPR Million

उद्योगपति बिनोद चौधरी के अनुसार भी नेपाल दुनियाँ के सारे देशों से ज्यादा अपने जनता से कर वसूलती है । मगर बदले में जनता को चरम गरीबी बाँटती है । अब नेपाली जनता को गंभीर होने का समय है । अनियमितता, भ्रष्टाचार, घुसखोरी, तस्करी के विरुद्ध एक होकर आगे बढें । नेतृत्व को सुधारें या उस नेतृत्व को बाहर करें ।

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