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चंद्रयान-2 से जुड़ी नारी शक्ति, काैन है रॉकेट वुमन ऑफ इंडिया

 

चंद्रयान-2  मिशन से कई महिला वैज्ञानिक जुड़ी थीं। यह विश्व के लिए गर्व की बात रही ।

चंद्रयान-2 की मिशन निदेशिका रितू करिधल को बनाया गया। उनके साथ एम वनीता को प्रोजेक्टर डायरेक्टर की भूमिका सौंपी गई। ये कोई पहला मौका नहीं है, जब इसरो में महिला वैज्ञानिकों को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे पहले मंगल मिशन में भी आठ महिला वैज्ञानिकों को प्रमुख भूमिका में रखा गया था। जानते हैं चंद्रयान 2 में प्रमुख भूमिका निभाने वाली महिला वैज्ञानिकों के बारे में। इस पूरे अभियान में 30 फीसद महिला वैज्ञानिक शामिल रहीं।

रॉकेट वुमन ऑफ इंडिया

इसरो की महिला वैज्ञानिक रितू करिधल चंद्रयान-2 की मिशन डायरेक्टर हैं। उन्हें रॉकेट वुमन ऑफ इंडिया भी कहा जाता है। इससे पहले वह मार्स ऑर्बिटर मिशन में डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर रह चुकी हैं। रितू करिधल ने एरोस्पेस में इंजीनियरिंग की पढाई की है। साथ ही वह लखनऊ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने वर्ष 2007 में उन्हें इसरो यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया था। पूर्व में दिए अपने साक्षात्कारों में रितू करिधल ने बताया था कि भौतिक विज्ञान और गणित में उनकी खास रुचि रही है। वो बचपन में नासा और इसरो के बारे में अखबार में छपी खबरों या अन्य जानकारियों की कटिंग काटकर अपने पास रखती थीं। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने इसरो में नौकरी के लिए आवेदन किया और स्पेस साइटिस्ट बन गईं। करीब 21 वर्ष से इसरो में बतौर वैज्ञानिक काम कर रहीं रितू करिधल पहले भी मार्स ऑर्बिटर मिशन समेत कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम कर चुकी हैं।
मंगल की महिलाएं

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बीबीसी को पूर्व में दिए एक साक्षात्कार में रितू करिधल ने कहा था कि आम मान्यता है कि पुरुष मंगल ग्रह से आते हैं और महिलाएं शुक्र ग्रह से आती हैं। मंगल अभियान की सफलता के बाद लोगों ने महिला वैज्ञानिकों के लिए ‘मंगल की महिलाएं’ कहना शुरू कर दिया। ये सुनकर अच्छा लगता है।

बेस्ट वुमन साइंटिस्ट पुरस्कार हासिल कर चुकी हैं एम वनीता

चंद्रयान-2 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर की जिम्मेदारी इसरो की दूसरी महिला वैज्ञानिक एम वनीता को सौंपी गई है। एम वनीता के पास डिजाइन इंजीनियरिंग का लंबा अनुभव है। वह काफी समय से सेटेलाइट्स पर काम कर रही हैं। वर्ष 2006 में एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया ने उन्हें बेस्ट वुमन साइंटिस्ट के पुरस्कार से सम्मानित किया था। जानकारों के अनुसार किसी भी मिशन में प्रोजेक्ट डायरेक्टर की भूमिका काफी अहम होती है। अभियान की सफलता की पूरी जिम्मेदारी प्रोजेक्ट डायरेक्टर पर ही होती है। वह पूरे अभियान का मुखिया होता है। किसी भी अंतरिक्ष अभियान में एक से ज्यादा मिशन डायरेक्टर हो सकते हैं, लेकिन प्रोजेक्ट डायरेक्टर केवल एक ही होता है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर के ऊपर एक प्रोग्राम डायरेक्टर भी होता है।

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