Mon. Nov 18th, 2019

मंदी है मगर धैर्य रखिये : योगेश मोहनजी गुप्ता

योगेश मोहनजी गुप्ता, मेरठ | ज भारत में आर्थिक मंदी होने की चर्चा अत्यधिक हो रही है। सम्पूर्ण विपक्ष वर्ग इसके विषय में अतिश्योक्ति के साथ जनता के समक्ष सत्तापक्ष को बदनाम करने में लगा है, जो कि विपक्ष का एक धर्म बन चुका है। श्री मनमोहन सिंह जी एक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के अर्थशास्त्री हैं, उन्होंने प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया तक के माध्यमों से वर्तमान सरकार की आर्थिक नीतियों की समीक्षा करके सरकार की आलोचना की। उन्होंने अपने निष्कर्षो के आधार पर स्पष्ट किया कि भारत बेरोजगारी की ओर अग्रसर हो रहा है। जिसका सर्वाधिक प्रभाव आॅटोमोबाइल आदि क्षेत्रों पर हो रहा है, परिणामस्वरुप उत्पादन घट रहा है। पिछली तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 5 प्रतिशत दर्ज की गयी, परन्तु अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्रों में ग्रोथ 7 प्रतिशत से अधिक भी हुई यथा – विद्युत 9 प्रतिशत, वाटर सप्लाई 8.6 प्रतिशत, होटल, परिवहन, संचार 7.1 प्रतिशत पब्लिक एडमिनीएबल 8.5 प्रतिशत। कुछ सेक्टरों में वर्षा और मौसम का प्रभाव भी पड़ता है। मनमोहन सिंह जी के तर्कों के प्रति असहमति व्यक्त करना पूर्व प्रधानमंत्री एवं विश्वविख्यात अर्थशास्त्री का अपमान हो सकता है, परन्तु कुछ तर्क ऐसे हैं जिनको आज मनमोहन सिंह जी के साथ-साथ विरोधी दलों को भी समझने की अति आवश्यकता है।
आज विश्व में परिवहन और सूचना तंत्र इतना अधिक सुदृढ़ हो चुका है कि प्रत्येक देश का हस्तक्षेप परस्पर देशों के मध्य बना हुआ है। आज एक देश से दूसरे देश में आयात-निर्यात मात्र कुछ घंटो में सम्भव हो चुका है। इसलिए सम्पूर्ण विश्व की आर्थिक स्थिति परस्पर देशों की आर्थिक स्थिति के ऊपर निर्भर करती है। अर्थात् यदि आर्थिक मंदी की समस्या है तो वह केवल भारत में ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व में समस्या व्याप्त है और इस समस्या की जिम्मेदारी भी प्रत्येक देश की है। इतना अवश्य है कि किसी देश में उसका प्रभाव कुछ कम होगा और किसी अन्य देश में ज्यादा, परन्तु इसके प्रभाव से कोई भी देश अछूता नहीं रह सकता।
मनमोहन सिंह जी एक राष्ट्रभक्त और ईमानदार प्रधानमंत्री रहें हैं और निसन्देह उनकी विश्व के सर्वश्रेष्ठ अर्थशास्त्रियों में गणना होती है। यदि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी अपने ज्ञान का सदुपयोग करके भारत की मंदी को दूर करने के उपाय सरकार को सुझाते तो जनता उनकी और अधिक प्रशंसा करती और यह जनता के हित की बात होती, परन्तु उन्होंने यह जनता के हित का कार्य ना करके केवल अपने राजनीतिक गुण को प्रकट कर किया और भाजपा की आर्थिक नीति की आलोचना एक साधारण विपक्षवर्ग की भांति की। निःसन्देह आज आॅटोमोबाइल सेक्टर में कुछ मंदी अवश्य आई है, परन्तु उसका दोषारोपण केवल मंदी पर नहीं डाला जा सकता। भारत एक संास्कृतिक देश है। यहाँ पर बाजार की मांग यहाँ की संस्कृति के अनुरूप भी चलती है। भारत में पिछले कई वर्षों के पश्चात ऐसा पहली बार हुआ है जब लगातार कई महीनों से कोई भी विवाह संस्कार का मुहर्त ना होने पर भी, आॅटोमोबाइल सेक्टर पर इसका अत्यधिक प्रभाव पड़ा है। हमारे देश में प्रत्येक माता-पिता अपनी पुत्री के विवाह में अपनी क्षमता के अनुसार दूल्हें को दहेज में कोई न कोई वाहन अवश्य देते हैं। जब शादियाँ ही नहीं होंगी तो इन वस्तुओं की बिक्री निश्चितः रूप से कम हो जाएगी। आज इसी सेक्टर की सुस्ती को विरोधी पक्ष अत्यधिक उछाल कर पूरे देश में एक निराशा का वातावरण उत्पन्न करने का प्रयास कर रहा है, जो कि देश हित में नहीं कहा जा सकता।
भारत की अपनी जनसंख्या 135 करोड़ के ऊपर है और जनसंख्या के हिसाब से भारत का बाजार चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। विश्व में ऐसा मंदी का दौर पूर्व में भी रहा है, जिससे लगभग सभी देश प्रभावित हुए। यदि कोई देश प्रभावित नहीं हुए तो वो केवल भारत और चीन थे, वो भी उनकी जनसंख्या के अप्रत्यक्ष कृपादान (दुख के भेष में सुख) के कारण थी। सरकार को इस मंदी में अत्यधिक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, क्योकिं चिंता या दवाब में अक्सर ऐसा होता है कि सरकार ऐसा कदम भी उठा लेती हैं जो उसके लिए भविष्य में अत्यधिक आत्मघाती सिद्ध होता है। इस समय सरकार को यह प्रयास करना चाहिए कि अपने घरेलू निवेशकों को प्रोत्साहित करंे कि वो अधिक से अधिक निवेश करें, जिससे कि वर्तमान मंदी समाप्त हो जाए। इसके लिए सरकार को चाहिए कि इस समय व्यापारियों व निवेशकों में जो आयकर और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के द्वारा डर का वातावरण बनाया हुआ है उसको वे सहज करे, जिससे घरेलू निवेशक इन अधिकारियों को अपना दुश्मन ना समझ कर दोस्त समझे और निवेश करने के लिए अधिक से अधिक प्रोत्साहित हो सकें। ऐसा होने पर विदेशी निवेशक भी भारत की ओर अत्यधिक आकर्षित होंगे। सरकार को चाहिए कि वे सभी सीमाएं तोड़कर निवेशको को संरक्षण प्रदान करें। उनको किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार का सामना न करने पड़े। जगह-जगह निवेशकों की सहायता के लिए कार्यालय खोले जाएं और एकल खिड़की के अन्तर्गत अर्थात् एक ही स्थान पर उनको सभी प्रकार की सुविधाएँ प्रदान कर प्रोत्साहित किया जाए। आयकर अधिकारियों को आगामी 5 वर्षों के लिए अपने नियम व कानूनों सख्त ना करके उनको कतिपय सरल व सुगम बनाया जाए, ताकि देश से आयकर व प्रवर्तन निदेशालय के प्रति जनता में व्याप्त भय का वातावरण समाप्त किया जाए, निवेश बढ़ेगा तो देश बढ़ेगा।
निश्चित है कि मोदी जी के कुशल नेतृत्व में यह मंदी अधिक समय तक नहीं रह पायेगी। इससे मुक्त होने के अनेक रास्ते हैं, जिनको यदि यह सरकार अतिशीघ्र अपना लेती तो सुस्ती से चुस्ती में पहुँचने में 3-4 माह से अधिक नहीं लगेंगे।

योगेश मोहनजी गुप्ता
चेयरमैन
आई आई एम टी यूनिवर्सिटी
मेरठ
भारत
योगेश मोहनजी गुप्ता
चेयरमैन
आई आई एम टी यूनिवर्सिटी

मेरठ
भारत

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *