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जल्द ही अराजकतावादी केजरीवाल को दिल्ली की जनता सत्ता से बेदखल करेगी : हर्ष वर्धन

नई दिल्ली, 13 सितम्बर। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री और दिल्ली से सांसद डॉ. हर्ष वर्धन ने आज दिल्ली सरकार की पिछली कांग्रेस और वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार पर राजधानी में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के मुद्दे पर दिल्ली भाजपा कार्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये निशाना साधा। इस अवसर पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री विजय गोयल, सांसद श्रीमती मीनाक्षी लेखी, श्री रमेश बिधूड़ी, श्री प्रवेश वर्मा, श्री गौतम गंभीर, श्री हंसराज हंस, मीडिया प्रभारी श्री प्रत्यूष कंठ, मीडिया प्रमुख श्री अशोक गोयल देवराहा उपस्थित थे।
 केन्द्रीय मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन कहा कि कांग्रेस और आप पार्टी, दोनों ने अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले गरीब लोगों के साथ विश्वासघात किया है। इन पार्टियों ने हर बार चुनाव से पहले इन लोगों को कॉलोनियां नियमित करने का वायदे का लॉलीपाप दिखाया लेकिन यह वादा कभी पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री का पूरी तरह पर्दाफाश हो गया है क्योंकि उनके प्रशासन के सिद्धांत, ढकोसलों और व्यापक भ्रष्टाचार पर आधारित हैं। केजरीवाल सरकार के असत्य, तिकड़मबाजी और धोखे का पर्दाफाश करते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने जोर देकर कहा कि केजरीवाल ने लोगों का विश्वास तोड़कर दिल्ली की जनता को गुमराह किया है।
 डॉ हर्ष वर्धन ने केजरीवाल पर पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केवल वोटों की फसल काटने के लिए अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले सीधे-साधे लोगों से बड़े-बड़े वायदे और गलत दावे करने का आरोप लगाया। चुनाव से पहले वोट हासिल करने के मंसूबे से जनता को गुमराह किया गया लेकिन ‘आप’ के सत्तारूढ़ होने के बाद कुछ नहीं किया गया। यह बड़े दुख का विषय है कि इन पार्टियों ने अपने-अपने चुनाव घोषणा पत्र और 2015 चुनाव-पूर्व एजेंडे में झूठे दावे किए लेकिन जब इन पार्टियों को जीत मिली तो उन्होंने अपने वायदों पर मूक बनकर चुप्पी साध ली।
 डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में आप सरकार की निष्क्रियता के कारण लाखों लोगों को अनधिकृत कॉलोनियों में पानी, बिजली और साफ सफाई जैसी सुविधाओं के बिना नारकीय स्थिति में मजबूरन जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है।
 डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने बार-बार धोखा किया, अब दिल्ली की जनता को उनसे जवाब मांगना चाहिए। डॉ. हर्ष वर्धन ने पूछा कि क्या अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की उनकी जिम्मेदारी नहीं है ? हालांकि उन्होंने निर्धन लोगों को राहत प्रदान करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, इसके विपरीत उन्होंने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की केन्द्र सरकार की प्रक्रिया के बारे में दुष्प्रचार किया ताकि लोगों को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रखा जा सके।

भाजपा के अनुरोध पर भारत सरकार द्वारा एक समिति गठित किए जाने और इसकी सिफारिशों पर अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किए जाने की कार्यवाही का आम आदमी पार्टी ने झूठ एवं फरेब का परिचय देते हुए श्रेय लेने की कोशिश की। डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने हाल ही में प्रेस को कुछ झूठे एवं निराधार बयान जारी कर आरोप लगाया कि “मोदी सरकार अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के विचार के खिलाफ है” और “अगर भाजपा केन्द्र में फिर सत्ता में आई तो वह अनधिकृत कॉलोनियों को गिरा देगी।”

 डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने अरविंद केजरीवाल को दुष्प्रचार अभियान नहीं करने का अनुरोध किया था और कहा था कि इसकी बजाय वह अनधिकृत कॉलोनियों की सीमाओं की पहचान के लिए टोटल स्टेशन मशीन (टी.एस.एम.) सर्वे को पूरा करने और नियमित किए जाने की अन्य प्रक्रियाओं पर ध्यान केन्द्रित करें।
 दुष्प्रचार अभियान रोकने की हमारी चेतावनी के बावजूद अरविंद केजरीवाल ने 17 जुलाई, 2019 को बयान में कहा कि दिल्ली मंत्रिमंडल ने नवम्बर, 2015 में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के केन्द्र को भेजे गए प्रस्ताव को केन्द्र सरकार ने स्वीकृति दे दी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार ने अपने मंत्रिमंडल की मंजूरी से सिफारिश की है कि 1 जनवरी, 2015 तक की अनधिकृत कॉलोनियों में मालिकाना हक दिया जाए।
 डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि हालांकि यह सब सफेद झूठ के अलावा कुछ नहीं है। आम आदमी पार्टी सरकार की निष्क्रियता को उजागर करते हुए, डॉ. हर्ष वर्धन ने 2015 के आम आदमी पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र के बिन्दु सं.-56 को पढ़ा जिसमें कहा गया था कि “हम अनधिकृत कॉलोनियों में चरणबद्ध और नियोजित तरीके से पानी और सीवर लाईन, बिजली, स्कूल और अस्पताल की सुविधाएं प्रदान करेंगे। अनधिकृत कॉलोनियों को सशक्त बनाने का एकमात्र रास्ता यही है कि इन मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बहुस्तरीय कार्रवाई की जाए जिसके लिए भाजपा और कांग्रेस ने कभी कोई प्रयास नहीं किया। दिल्ली में हमारी सरकार के गठन के एक वर्ष के भीतर इन अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा और निवासियों को मालिकाना हक दिए जाएंगे।”
 2008 के विनियम जो पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा आप सरकार को सौंपे गए थे, वे उनको सशक्त करते थे कि वे इन कॉलोनियों की सीमाओं का रेखांकन और उसकी पुष्टि करें, भूमि का टाइटल देने के लिए समिति का गठन सत्तारूढ़ होने के दो महीने के अंदर करें और नियमित करने का शुल्क तय करें। हालांकि केजरीवाल सरकार ने इन सभी बिन्दुओं पर एक भी कदम आगे नहीं बढ़ाया, मतलब वही ढाक के तीन पात की हालत बनी रही।
 भारत सरकार द्वारा दिल्ली सरकार से पत्राचार के आधार पर माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय को दिए गए आश्वासन और केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय के बार बार अनुरोध के बावजूद दिल्ली सरकार ने अनधिकृत कॉलोनियों की सीमाओं को अंतिम रूप नहीं दिया बल्कि वह सीमाओं के रेखांकन के लिए सीमा अवधि बढ़ाने का बार बार अनुरोध करती रही। दिल्ली सरकार ने 2017 में 2019 तक अवधि बढ़ाने की सिफारिश की और 2019 में दो वर्ष अवधि और बढ़ाने का अनुरोध किया। इसलिए भारत सरकार द्वारा दिल्ली सरकार के कथन से माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित कर दिया गया कि रेखांकन दिसंबर 2021 से पहले पूरा नहीं किया जा सकता।

अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने पर निर्णय लेने और इस प्रक्रिया की बाधाएं दूर करने के लिए शहरी कार्य और आवास मंत्रालय ने सितम्बर 2016 में दो पत्र लिखकर दिल्ली सरकार से कुछ सूचना देने का अनुरोध किया। सभी प्रयासों और कई बार के अनुरोध के बावजूद केजरीवाल सरकार ने आज तक कोई भी सूचना नहीं भेजी। इससे बढ़कर लापरवाही क्या हो सकती है ?
 दिल्ली सरकार के साथ लगातार फॉलो अप करने के बाद भी जब दिल्ली सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई तबभारत सरकार ने स्वतः 2019 में दिल्ली के माननीय उप-राज्यपाल की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी ताकि वह इस मुद्दे पर विचार के बाद अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक/गिरवी रखने का अधिकार देने की सिफारिश कर सके।
 डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि आप सरकार दिल्ली की भोली-भाली जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस सरकार भी 2007-2013 में अनधिकृत कॉलोनी को नियमित करने में बुरी तरह असफल रही थी। उन्होंने भी सीमाओं का रेखांकन/पुष्टि नहीं की, भूमि के टाइटल देने के लिए समिति का गठन नहीं किया और अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के लिए शुल्क/फी तय नहीं की।
 दरअसल,2008 में संशोधित विनियमों के अंतर्गत कांग्रेस सरकार ने प्रोविजनल (अनंतिम) प्रमाण पत्र जारी किए। हालांकि उनका एकमात्र उद्देश्य राजनीतिक फायदा उठाना था। 2008 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक भव्य समारोह और शिविरों का आयोजन कर तत्कालीन सत्तारूढ़ दल (कांग्रेस) के राजनेताओं ने 1218 अनधिकृत कॉलोनियों में यह प्रमाण पत्र बांटे थे। हालांकि इन प्रमाण पत्रों से अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को कोई फायदा/सुविधा नहीं मिली। दिल्ली की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2008 के विधानसभा चुनाव के बाद अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने और उनके अधिकार देने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।
 तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2008 और 2012 के बीच में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के लिए और विनियमों को लागू करने के लिए एक बार फिर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अगले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर नियमन प्रक्रिया को नई गति दी गई। दिल्ली सरकार के अनुरोध पर विनियमों की धारा 5.3 और 5.4 में संशोधन किया गया।
 संशोधित धारा 5.3 के अनुसार “दिल्ली सरकार 50 प्रतिशत से अधिक निर्मित क्षेत्र की प्रत्येक कॉलोनी की सीमा को अंतिम रूप देगी। यह कार्य रेजीडेंट सोसायटी द्वारा तैयार कराए गए ले-आउट प्लान के अनुसार 2007 में सेटेलाइट/हवाई सर्वे को सुपर इंपोज कर किया जाएगा। अगर सेटेलाइट चित्र में दिखाई गई किसी नाली, सड़क, रेल लाइन, नाले और बाई-लाइन के साथ होगी तो उसी पर सीमाओ को अंतिम रूप दिया जाएगा।” धारा 5.4 के अनुसार “पैरा 5.3 के अनुसार ले आउट प्लान के आधार पर सीमाएं तय करने के बाद दिल्ली सरकार ले-आउट प्लान स्थानीय निकाय को भेजेगी। इसके साथ ही दिल्ली सरकार सार्वजनिक भूमि पर बनी कॉलोनियों के बारे में भूमि के मालिकाना हक वाली एजेंसी की ओर से भूमि की कीमत वसूल कर इसे भूमि की मालिकाना एजेंसी के खाते में जमा कराएगी। इसके बाद, तय की गई सीमा के अनुसार कॉलोनी को नियमित करने के आदेश जारी करेगी। इसके बाद डीडीए भूमि उपयोग में परिवर्तन करेगी और संबंधित स्थानीय निकाय ले-आउट प्लान को मंजूर करेगा। स्थानीय निकाय रेजीडेंट सोसायटी/व्यक्तियों से निर्धारित विकास शुल्क का संकलन करेगा।”
 सच्चाई तो यह है कि चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक फायदा उठाने के उद्देश्य से ये संशोधन किए गए थे। यह प्रक्रिया कॉलोनीनियमित करने के आदेश जारी किए जाने से पहले की जानी थी। इन संशोधनों के फलस्वरूप दिल्ली सरकार को कॉलोनी नियमित करने के आदेश जारी करने के लिए प्रक्रिया को उलट दिया गया और इसलिए औपचारिकताएं बाद में पूरी करने का निर्णय लिया गया।
 एक बार फिर सितम्बर, 2012 में 2013 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले दिल्ली सरकार ने 895 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के आदेश जारी किए। इन कॉलोनियों में 312 निजी भूमि पर और 583 पूरी तरह या आंशिक रूप से सार्वजनिक भूमि पर बनी थीं। इन आदेशों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करने के लिए भूमि की कीमत वसूल की जानी थी और अनधिकृत कॉलोनियों की सीमाओं को बाद में अंतिम रूप दिया जाना था। हालांकि तत्कालीन दिल्ली सरकार नेइस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया और अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को इन आदेशों से कोई फायदा नहीं हुआ, क्योंकि अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक नहीं दिए गए थे। इसलिए यह स्पष्ट है कि इस मामले में भी आम जनता को गुमराह किया गया और ऊपर बताए गए संशोधन सत्तारूढ़ सरकार ने फायदा उठाने के मकसद से किए थे और कॉलोनियों को नियमित करने के आदेश का उद्देश्य भी राजनीतिक बढ़त हासिल करना था।

इन तथ्यों से केजरीवाल सरकार और इससे पहले की कांग्रेस सरकार का अपने कपटपूर्ण तरीकों से पूरी तरह पर्दाफाश हो गया है और यह सिद्ध हो गया है कि ये दोनों पार्टियां दिल्ली की जनता की आंखों पर पर्दा डालकर उनका इस्तेमाल केवल वोट बैंक के रूप में करती रहीं।

 डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि उपरोक्त बताए गए सभी तथ्यों से स्पष्ट होता है कि दिल्ली में वर्तमान में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने नियोजित तरीके से भोली-भाली जनता को ठगा है। 2008 के विनियमों के तहत दिल्ली की आप सरकार को केन्द्रीय सरकार द्वारा यह अधिकार दिया गया था कि वे एक समिति का गठन करे और फिर इस समिति के द्वारा तय किये मानकों के अनुसार भूमि के पट्टों का फैसला करे, परंतु खेद का विषय है कि लगभग पांच वर्ष पूरे होने को आये हैं पर पट्टों पर फैसला लेना तो दूर, अभी तक समिति का गठन भी नहीं किया गया है। दूसरी ओर अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने का मामला है। जिन 895 कॉलोनियों को नियमित करने का अंतरिम निर्णय कांग्रेस सरकार द्वारा लिया गया था उन पर भी इस आप सरकार द्वारा अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इन 895 कॉलोनियों में वे 312 कॉलोनियां भी शामिल हैं जो पूरी तरह प्राईवेट लैन्ड पर बनी हुई हैं। झूठे और लोक लुभावन घोषणाओं और वादों से आजकल के जमाने में जब लोग इतने जागरूक हैं, कोई भी सरकार जनता को बेवकूफ नहीं बना सकती, क्योंकि मीडिया अपने तरीके से सरकारों द्वारा की गई घोषणाओं पर अमलीकरण की जांच करता है और यदि अमलीकरण में कोई कमी हो तो उसकी पूरी तरह बखिया उधेड़ कर, सरकारों को कठघरे में खड़ा कर देता है। इसलिए झूठे वादों और घोषणाओं से आज कल के जमाने में बात नहीं बनती।
 डॉ. हर्ष वर्धन ने दिल्ली की जनता को अरविंद केजरिवाल की विश्वासघाती मंशा से आगाह किया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल दिल्ली की मासूम जनता को गुमराह करने में माहिर है। दिल्ली मुख्यमंत्री को ‘राजनीतिक अवसरवादी’ की संज्ञा देते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि जल्द ही दिल्ली की त्रस्त जनता इस अराजकतावादी नेता को बेनकाब कर देगी।

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