Mon. May 25th, 2020

पशुओं की तस्करी के आराेप में तीन भारतीय एक पाकिस्तानी काे सजा

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नेपाल की एक अदालत ने हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल मामले में चिम्पांजी की तस्करी करने वाले पांच लोगों को दोषी ठहराया। इन तस्करों की गिरफ्तारी और सजा से पहली बार नेपाल में इस बात के प्रमाण मिले कि यहां दुर्लभ और लुप्तप्राय पशुओं की तस्करी तेजी से फल फूल रही है। इस मामले में तीन भारतीय और एक पाकिस्तानी को पांच साल की सजा सुनाई गई है। पांचवां शख्स नेपाली नागरिक है।
यह तस्करी 2017 में नेपाल पहुंचने से पहले तुर्की के रास्ते से की गई थी। इस चिम्पांजी को नाइजीरिया से लाया गया था। काठमांडू जिला अदालत के अधिकारी आनंद श्रेष्ठ ने बताया कि इन तस्करों की मदद करने के जुर्म में नेपाली नागरिक को ढाई साल की सजा दी गई है।

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हाल के वर्षों में, नेपाल ने ऐसे सैकड़ों तस्करों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने भारत और चीन के साथ अपनी सीमाओं का लाभ उठाया है। कानून प्रवर्तन अधिकारियों को इस बात का भी संदेह है कि देश में गैरकानूनी रूप से गैंडे के सींग, तिब्बती सेलेरो से ऊन, दुर्लभ उल्लू और लुप्तप्राय वानरों की भी तस्करी चल रही है।

पकड़े गए तीन भारतीयों के नाम मोहम्मद शरीफ साहिद, उस्मान और मोहम्मद फैम हैं। पाक तस्कर जावेद असलम खान इन सबका मुखिया था। जबकि नेपाली नागरिक संजीव पक्षियों की दुकान चलाता है।
इस तरह पकड़ा गया रैकेट
नेपाल के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क जांच से बचने के लिए, तस्करों ने एक टोकरे में चिम्पांजी के बच्चे को रख दिया और उसे छुपाने के लिए आसपास के दर्जनों तोते, तीतर और बंदरों को रख दिया। जब यह टोकरा नेपाली नागरिक संजीव के घर पहुंचा तभी मुखबिर की सूचना पर अधिकारियों ने वहां जाकर उसे पकड़ लिया। संजीव घर पर ही पक्षी बेचने की दुकान चलाता है।

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