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जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी चांद से नहीं टपकते, बल्कि पड़ोस से ही आते हैं : फुल्वियो मार्टुसिएलो

 

 

पाकिस्तान को यूरोप के 28 देशों के संगठन यूरोपीय संघ से निराशा हाथ लगी है। यूरोपीय संघ की संसद के कई सदस्यों ने कश्मीर पर भारत के पक्ष का समर्थन किया और पाकिस्तान को आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने के लिए कठघरे में खड़ा किया। इन सदस्यों ने साफ कहा कि भारत, खासकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी चांद से नहीं टपकते, बल्कि पड़ोस से ही आते हैं।

यूरोपीय संसद में ‘कश्मीर में हालात’ पर चर्चा

यूरोपीय संसद में ‘कश्मीर में हालात’ विषय पर चर्चा के दौरान ज्यादातर सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के फैसले को भारत का आंतरिक मामला बताया। इन सदस्यों ने यूरोपीय संघ से भी भारत की संप्रभुता का सम्मान करने का आग्रह किया।

आतंकवाद’ का समर्थन

यूरोपीयन कंजर्वेटिव एंड रिफॉर्मिस्ट ग्रुप के ज्योफ्रे वैन ऑर्डेन ने कहा कि पाकिस्तान ने शुरू से ही नियंत्रण रेखा के पार ‘दमन और आतंकवाद’ का समर्थन करने के लिए अपनी सुरक्षा एजेंसियों को खुली छूट दे रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है।

कश्मीर 70 साल से आतंकवाद का दंश झेल रहा

उन्होंने कहा, ‘कश्मीर पिछले 70 साल से सीमा पार के दमन और आतंकवाद का दंश झेल रहा है। आखिरकार, इस हालत को बदलने का मौका आया है। कानूनी रूप से तो पूरा क्षेत्र भारत का हिस्सा होना चाहिए था, लेकिन पाकिस्तान ने उसके कुछ भाग पर अवैध कब्जा जमा रखा है और वहीं से सीमा पार में दमन और आतंकवाद को समर्थन दे रहा है, जिसकी कीमत हजारों लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है।’

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भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मामला

सदस्यों ने साफतौर पर कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मामला बताते हुए कहा कि इस पर दोनों देशों को सीधी बातचीत करनी चाहिए, ताकि इसका समाधान निकल सके। सदस्यों ने इस बात पर भी जोर दिया कि इसमें किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और यह भी कहा कि उसकी कश्मीर में कोई भूमिका नहीं है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र

ऑर्डेन की भावना का समर्थन करते हुए यूरोपीय संसद में इटली के सदस्य फुल्वियो मार्टुसिएलो ने कहा, ‘भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। हमें भारत खासकर, जम्मू-कश्मीर में होने वाले आतंकी हमलों को व्यापक नजरिए से देखने की आवश्यकता है। ये आतंकी चांद से नहीं आते हैं, वे पड़ोसी देश से आ रहे हैं। हमें भारत का समर्थन करना चाहिए।’

पाक में बैठकर यूरोप में हमले की योजना बनाते हैं आतंकी

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मार्टुसिएलो ने कहा कि पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी दी है, जो चिंता का विषय है। पाकिस्तान ऐसा स्थान है जहां बैठकर आतंकवादी यूरोप में हमले की योजना बनाने में सफल होते हैं। पाकिस्तान में मानवाधिकारों का जबरदस्त उल्लंघन होता है।’

कश्मीर भारत का आंतरिक मामला

कश्मीर पर भारत के पक्ष का समर्थन करते हुए स्लोवाकिया के सदस्य मिलान यूहरिक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन भारत का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा, ‘हम दूसरों से मिली जानकारी पर भरोसा कर रहे हैं, क्योंकि हमें नहीं पता भारत में क्या हो रहा है..यह कभी नहीं हुआ है कि भारत की संसद ने यूरोप के किसी देश की उसके आंतरिक नीतियों में हस्तक्षेप या निंदा की हो। हमें भी ऐसा करना चाहिए, हमें भारत की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।’

इसके अलावा और कई सदस्यों ने भी कश्मीर पर भारत के पक्ष का समर्थन करते हुए दोनों देशों से आपसी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की।

कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र की कोई भूमिका नहीं : गुतेरस

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने बुधवार को कहा कि कश्मीर मसले को सुलझाने में संयुक्त राष्ट्र की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को आपसी बातचीत के जरिए ही इस मसले को सुलझाना है।

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यहां प्रेस कांफ्रेंस में गुतेरस ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के अनुरोध के बाद ही वह कोई पहल कर सकते हैं। कश्मीर को लेकर एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह कश्मीर मसले के समाधान के लिए लगातार वकालत करते रहेंगे।

ब्रिटिश विशेषज्ञों ने कश्मीर पर भारत का किया समर्थन

ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के भारत सरकार के फैसले का समर्थन किया। विशेषज्ञों ने कहा कि इस कदम से कश्मीरियों के जीवन में सुधार होगा।

सामाजिक और राजनीतिक विचारक डेविट वैंसी ने कहा कि भारत सरकार का कदम कश्मीर के लोगों के हित में है। उनके जीवन में इससे सुधार होगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक असफल राष्ट्र है और नाकामियों को छिपाने के लिए कश्मीर का राग अलाप रहा है।

वैंसी ने लंदन में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय मूल के लोगों पर पाकिस्तानियों के हमले की भी निंदा की। ब्रिटिश पत्रकार कैटी हॉपकिंस ने कहा कि एक ब्रिटिश नागरिक होने के नाते भारतीयों पर हमले की खबर ने उन्हें बहुत परेशान किया।

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