एम्स ने पहली बार अमेरिकी रोबोट से रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) का ऑपरेशन किया

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने पहली बार अमेरिकी रोबोट से रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) का ऑपरेशन किया। दुनिया में केवल 80 अस्पतालों में मौजूद अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह रोबोट 15 दिन पहले ही एम्स पहुंचा है। दो दिन पहले हड्डी रोग विभाग के डॉक्टरों ने एक महिला का ऑपरेशन किया। पिछले चार वर्ष से कमर दर्द से परेशान महिला की एल-5 हड्डी खिसक गई थी।
एम्स के डॉ. भावुक गर्ग ने बताया कि कई तरह के रोबोट हैं, लेकिन स्पाइनल सर्जरी करने वाला यह रोबोट नई तकनीक से लैस है। इसे एक्सेलस्यिस रोबोट कहा जाता है। इसका फायदा है कि छोटा चीरा लगाकर रीढ़ की हड्डी में स्क्रू व अन्य इंप्लांट को बेहद कम समय और आसानी से फिट कर सकते हैं।
60 वर्षीय मौसमी बसु की सर्जरी की गई। डॉ. गर्ग ने बताया कि एशिया में अभी किसी अस्पताल में ये तकनीक उपलब्ध नहीं है। दिल्ली एम्स में कुछ ही दिन पहले ये रोबोट आने के बाद पहला ऑपरेशन मौसमी बसु का किया गया है। मौसमी के पति प्रोफेसर चंचल कुमार बसु ने बताया कि उनकी पत्नी चार वर्ष से कमर दर्द से परेशान थीं। कई अस्पतालों में दिखाने के बाद भी आराम नहीं मिला, तो उन्होंने डॉ. भावुक गर्ग से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि फिलहाल उनकी पत्नी स्वस्थ हैं।
रोबोट पर चढ़ा रहा पॉलीथिन
सोशल मीडिया पर डॉक्टरों की सराहना के साथ रोबोट पर पॉलीथिन देख आश्चर्य भी जताया जा रहा है। दरअसल ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण रोकने के लिए काफी ध्यान रखा जाता है। पॉलीथिन को लेकर जब डॉक्टरों से बातचीत की गई, तो बताया गया कि नया रोबोट होने के कारण पॉलीथिन लगी थी।
क्या होती है रोबोटिक सर्जरी
इस सर्जरी में सॉफ्टवेयर की मदद से कंप्यूटर की स्क्रीन पर डॉक्टर शरीर के अंदर का हिस्सा देखते हैं और मशीन (रोबोट) को अपने हाथ से ऑपरेट करते हैं। इस तकनीक से जोखिम 50 फीसदी से भी कम रह जाता है। आमतौर पर रीढ़ की सर्जरी में काफी खतरा रहता है।

