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२०२० तक पाँच लाख पर्यट्क हमारा लक्ष्य: मन्त्री यादव

 

मनोज बनैता, सिरहा, २६ सेप्टेम्बर ।

प्रदेश सरकार द्वारा २०२० तक पाँच लाख पर्यटक को मधेस मे आकर्षित करने का दावा किया गया है । प्रदेश नम्बर २ के उद्योग, पर्यटन, वन तथा वातावरण मन्त्री राम नरेश यादव ने कहा कि भ्रमण वर्ष २०२० मे करीब पाँच लाख पर्यटक को लाने का माहौल बनाया जा रहा है । उन्होंने यह बात लाहान में बुधबार को  भ्रमण वर्ष २०२० सास्कृतिक प्रवर्द्धन प्रदेश स्तरीय कार्यशाला गोष्ठी मे कहा है । मन्त्री यादव ने कहा कि प्रदेश २ के आठौं जिला में पर्यटकको आकर्षित करने वाला स्थल है ।

यादव ने पर्यटन के महत्त्व उपर जोर देते हुवे कहा कि “पर्यटन क्षेत्र देश की आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्यटन देश का वृह्द सेवा उद्योग है। यह एक महत्वपूर्ण सेवा उन्मुखी क्षेत्र है जो सकल राजस्व और विदेशी मुद्रा के अर्जन की दृष्टि से त्वरित विकास करता है। जिसमें यात्रा एजेंट और संचालक , हवाई , गाइड होटलो के मालिक , अतिथि गृह , रेस्तरां , और दुकाने शामिल है।”

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इसी तरह जिला समन्वय समिति सिरहा के प्रमुख राम चन्द्र ठाकुर ने कहा कि पर्यटन किसी देश में रहने वाले लोगों के जीवन – स्तर तथा रहन – सहन की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार लाए जाने के साथ ही रोजगार – सृजन का भी महत्वपूर्ण कार्य करता है। पर्यटन से स्थानीय कर प्राप्तियों के रूप में अर्थव्यवस्था को जो लाभ होता है , उससे सामाजिक निर्धनता उन्मूलन , शिक्षा , स्वास्थ्य , सेवा , आवास , पेयजल , तथा स्वच्छता , मनोरंजन , के अनेक अवसरों आदि आधारभूत सेवाओं की व्यवस्थाओं को वास्तविकता में साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिरहा मे बाबा ताल, सलहेस फुलबारी, कमलदह लगायत सैकडो धार्मिक स्थल है । ठाकुर का कहना है कि सामाजिक असमानताओं को दूर करने की दृष्टि से भी पर्यटन सकारात्मक प्रभाव डालता है। पर्यटन पर्यावरण की गुणवत्ता बढ़ाने , अधिक रोजार सृजन करने के लिए प्रोत्साहन देता है। साथ ही साथ अर्थव्यवस्था के विकास को भी अभिप्रेरित करता है। उधर भ्रमण वर्षके अध्यक्ष मनिष झा ने कहा कि केन्द्र का मुँह देखके अब काम नही चलने वाला है ।

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अध्यक्ष झा ने कार्यविधि और बजेट अभित क ना आने के बाबजुद भी कार्यक्रम के शुरुआत होने की जानकारी दी है । उन्होने कहा कि मधेस के लिए पर्यटन का खास महत्व है। मधेस जैसे प्रदेश की पुरातात्विक विरासत या संस्कृति केवल दार्शनिक स्थल के लिए नहीं है। इसे राजस्व प्राप्ति का भी स्त्रोत माना जाना चाहिए । पर्यटन क्षेत्रों से कई मधेसी लोगों की रोजी – रोटी भी जुड़ी है।

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