Mon. Dec 9th, 2019

खुली सीमा आजकी आवश्यकता, मुख्यमंत्री का बयान गैरजिम्मेदाराना : चन्दन दुबे

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चन्दन दुबे, जनकपुरधाम । नेपाल भारत बीच खुला सिमा होते हुए भी कभी सुरक्षा की समस्या महसूस नहीं की गई।आज तक काठमांडू को भी कभी ये बड़ी चुनौती नज़र नहीं आई लेकिन प्रदेश न.२ के मुख्यमंत्री जी को अब यह बड़ी चुनौती दिखने लगी है ।

लगता है प्रदेश न.२ के मुख्यमंत्री कहीं से संचालित हो रहे हैं अथवा किसी प्रकार के मानसिक उठलपुथलता की स्थिति में आ गए हैं। पिछले कुछ दिनों से उनके वर्ताव व बयानों को देखा जाए तो उन्होंने बडे आश्चर्यजनक व्यवहार प्रदर्शित किए है।
• संविधान दिवस मनानेको लेकर जिस प्रकार उन्होंने शुरूमे जैसी आक्रामकता दिखाई और फिर सीधे रिवर्स गियर में पलट गए उसके बात महोत्तरी के ओडीएफ कार्यक्रम में शिरकत करते हुए जब मीडिया से मुखातिब हुए तो जिस संविधान के विरोध में और जिसको संसोधन कराने के सवाल पर जनता ने उन्हें वोट करके इस गद्दी पे बिठाया उसी संविधान को हु ब हु चित्र बहादुर के सी और प्रधानमंत्री के पी ओली की शैली में बोलते हुए विश्व का सर्वोत्कृष्ट संविधान भी कह दिया।
• जबकि उसी संविधान को उनके सुप्रीमो उपेन्द्र यादव संसोधन नहीं पुनर्लेखन तक की मांग भी कर चुके हैं।भारत नेपाल के बीच का यह खुला सिमा दोनों देशों के बीच के अटूट विश्वास का प्रतीक है, दोनों देशों के बीच के रोटी बेटी के सम्बन्धो और सहिष्णुता का प्रतीक है, अयोध्या से जनकपुर और केदारनाथ से पशुपतिनाथ के द्विपक्षीय सम्बन्धों का प्रतीक भी है।
• आश्चर्य ये है कि जिस काठमांडू के नियंत्रण और अधिकार क्षेत्र में सिमा सुरक्षा, प्रशासन, सेना और पुलिस है उसे यह चुनौती महसूस नहीं होती किन्तु इस साईकल बंटवा और बजेट चलौआ मुख्यमंत्री जिसके क्षेत्राधिकार में प्रमुख जिल्लाधिकारी और स्थानीय तह सरकार तक नही है उसे यह खुला सिमाना बड़ी चुनौती नज़र आती है।
• नेपाल और भारत के बीच महज सिर्फ रोटी बेटी का ही सम्बन्ध नहीं है अपितु इस २न.प्रदेश की ८० प्रतिशत आबादी चाहे वो पढ़ाई हो या दवाई हो अपने रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए भी सिमा पर के बाजारों पर ही निर्भर करते हैं।आज भी सीमावर्ती बहुत सारे गाँव ऐसे हैं जहाँ के लोगों को सदरमुकाम तक पहुंचने के लिए बॉर्डर पार कर के फिर वापस आना पड़ता है।
• मुख्यमंत्री के इस गैरजिम्मेदाराना बयान पे दोनों ओर सीमावर्ती क्षेत्र के बुद्धिजीवियों के कान खड़े हो गए हैं और उन्हें इसके पीछे कोई षडयंत्र दिखाई देने लगा है।लोगों को अपने सगे संबंधियों की चिंता होने लगी है।उन बुद्धिजीवियों का मानना है कि कम से कम मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेवार पद पे विराजमान व्यक्ति को इस प्रकार के अपरिपक्व बयानबाजी से बचना चाहिए।
• एक तरफ पहले ही पिछले दिनों भारतीय गाड़ियों के नेपाल प्रवेश के सम्बन्ध में जो निर्णय लिए गए हैं उससे दोनों तरफ के लोगों में आक्रोश का माहौल ऊपर से मुख्यमंत्री के इस बयान ने लोगों के जख्म पे नमक छिड़कने का काम किया है।
• चन्दन दुबे
• केन्द्रीय सदस्य
• राजपा नेपाल

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