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दहेज मिलता है भालू और साप !

 

काठमांडू, २० अक्टूबर । सिरहा सुखीपुर–८ निवासी मुस्मिल समुदाय के नट जाति के साबिर ने अपने बेटे को अंश के रुप में भालू दिया । साबिर के पिता अबु मोहम्मद और चाचा फूल मोहम्मद भालू का चटक दिखाकर जीवन चलाते आ रहे हैं । इसीलिए अंश के रुप में उनको भालू मिलना स्वभाविक है ।
आज प्रकाशित कान्तिपुर दैनिक के अनुसार मुस्लिम समुदाय के नट जाति में अंशबंडा में ही नहीं, दहेज में भी भालु और साप देना पड़ता है । वैसे तो दहेज लेना और देना कानूनतः बंदेज हैं । लेकिन इस जाति में परम्परागत रुप में दहेज में साप और भालू दिया जा रहा है, जो आज भी जारी है । अन्य समुदाय के लोग दहेज में जमीन एवं मोटरसाइकिल मांग करते हैं, लेकिन इस समुदाय के लोग दहेज में भालू तथा साप ही मांग करते हैं ताकि शादी के बाद भालू और साप संबंधि विविध चटक दिखा कर वे लोग जीवन चला सकें ।

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