मधेशी समुदाय में यम द्वितिय अर्थात् भैया दुईज के दिन में भुर्की पूजन
नेपालगन्ज, (बाके) पवन जायसवाल ।
मधेशी समुदाय में यम द्वितिय अर्थात् भैया दुईज के दिन में भुर्की पूजन करके अपने अपने बडे और छोटे भाई को टीका लगाकर दिपावली के अन्तिम दिन टीका लगाकर चूरा, भुर्की और मिठाई खिलाते है ।
घर के आंगन में गाई का गोबर से लीपपोत करके भाई का चित्र बनाकर, नदी तलाब, पर्बत, बाघ, भालु, सर्प, बन जगंल का चित्र बहनें बनाती है, और बन जंगल में मिलने वाला कुश लगायत बिभिन्न काटे रखकर उस के उपर सिलौटा रखकर पूजा करने की चलन रहा है । उस सिलौटा पर चामल का आ“टा से नदी नाला मधेशी समुदाय की महिलाए“ लोग बनाकर उसी में धर्म भाई का मुर्ती बनाकर पूजा करती है ।
गा“व टोला पडोसी के सम्पूर्ण महिलाए“ एकजुट होकर सामुहिक रुप में भुर्की पूजन करने की परम्परा रहा है । उसी क्रम में भाई बहन के सुख, समृद्धि और शान्ति के लियें बिभिन्न प्रकार की कथा, कहानी भी सुनाने की चलन रही है । भुर्की पूजन के क्रम में दिदी बहनें अपने—अपने दादा और भाई की सुख, शान्ति, उन्नति, सु–स्वाथ्य, प्रगति लगायत की कामनाए“ भी करती है । भर्की पूजा किया गया चूरा भुर्की दूर– दूर रहने वाली दिदी बहने लोग अपने– अपने दादा और भाई को कार्तिक पुर्णिमा तक भी चूरा भुर्की खिलाने की प्रचलन रही है ।
इसी तरह बाँके जिला के नेपालगन्ज उपमहानगरपालिका वार्ड नं.– १९ सुर्जी गावँ में कार्तिक १२ गते मंगलवार को मधेशी महिलाएँ भुर्की पूजन किया ।

