Thu. Nov 7th, 2019

जब शादी की पहली रात ने ही सारी खुशियाँ छीन ली, बीबीसी अरबी की एक रिपाेर्ट

 

 

शादी को लेकर पूरी दुनिया में लोगों में बहुत उत्सुकता रहती है. लेकिन, दुनिया के कुछ हिस्सों में शादी से जुड़े कुछ जश्न, बहुत से ज़ख़्म दे जाते हैं. उनकी शादी की पहली रात ऐसी गुज़रती है, जिसकी बुरी यादें ताज़िंदगी उनका पीछा करती हैं.

कई अरब और मुस्लिम देशों में ये उम्मीद की जाती है कि शादी की पहली रात को महिलाएं कुंवारी हों.

बीबीसी अरबी ने अलग-अलग सामाजिक तबक़े से आने वाली कई महिलाओं से इस बारे में बात की और ये समझने की कोशिश की कि शादी से जुड़े इस रिवाज का उनकी शादीशुदा ज़िंदगी पर क्या असर पड़ा और किस तरह सेक्स एजुकेशन की कमी ने उनकी शादी पर प्रभाव डाला.

ये उन महिलाओं से हुई बातचीत के संक्षिप्त अंश हैं, जिस में वो ये बता रही हैं कि सुहागरात के साथ ही उनकी ज़िंदगी किस तरह उलट-पुलट हो गई.

सोमैया, उम्र-33 साल
सोमैया ने अपने ब्वॉयफ्रैंड इब्राहिम से शादी करने के लिए परिवार से लंबी लड़ाई लड़ी थी. परिवार इसके लिए राज़ी नहीं था. लेकिन, सोमैया, इब्राहिम से बेइंतिहा मोहब्बत करती थीं और उसे किसी भी लड़की के लिए आदर्श शौहर मानती थीं.

लेकिन, सोमैया को इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि उन्हें बहुत बड़ा सदमा लगने वाला है.

शादी के बाद इब्राहिम के साथ पहली रात को ही कुछ ऐसा हुआ, जब सोमैया की सारी मोहब्बत काफ़ूर हो गई. शादी के बाद पहली रात या सुहागरात को ‘प्रवेश की रात’ भी कहते हैं. उस रात सोमैया के कौमार्य को लेकर उठे सवाल ने उसके दिल से इब्राहिम के लिए मोहब्बत को हमेशा के लिए मिटा दिया.

उस वक़्त सोमैया की उम्र 23 बरस थी. वो सीरिया की राजधानी दमिश्क की यूनिवर्सिटी में अरबी साहित्य में पढ़ाई कर रही थी. उसकी डिग्री पूरी ही होने वाली थी. लेकिन, वो इब्राहिम से बहुत प्यार करती थी. इब्राहिम ने भी सोमैया से वादा किया था कि कुछ भी हो जाए, लेकिन वो उसे पढ़ाई पूरी करने देगा.

सोमैया का परिवार चाहता था कि वो पहले अपनी पढ़ाई पूरी कर ले. साथ ही सोमैया के परिवार को इस बात से भी दिक़्क़त थी कि इब्राहिम के पास अपना घर नहीं था. फिर भी सोमैया, इब्राहिम से शादी के लिए अड़ी हुई थीं. उन्होंने अपने पूरे परिवार के विरोध का डट कर मुक़ाबला किया. यहां तक कि ये भी कह दिया कि वो इब्राहिम की मां के पास रहने चली जाएंगी, जिन्हें वो अपनी मां की तरह ही मानती थीं.

लेकिन, सुहागरात को सोमैया को ज़बरदस्त सदमा लगा. अभी सोमैया शादी की रस्में निपटा कर ठीक से सांस भी नहीं ले पायी थीं कि उनका शौहर शारीरिक संबंधों के लिए ज़ोर डालने लगा.

सोमैया के पति इब्राहिम को बस उनका कौमार्य जांचने की जल्दी थी. वो बस ये जानना चाहता था कि सोमैया की योनि द्वार की झिल्ली सही सलामत है या नहीं. इब्राहिम ने उसे ये कहकर समझाने की कोशिश की कि ये तो उसकी सोमैया के प्रति मोहब्बत है, जो वो उसे पाने के लिए इतना उतावला हुआ जा रहा है.

सोमैया कहती हैं, “मैं थकी हुई थी लेकिन मैंने सहयोग किया. उसकी ज़िद के आगे मैं झुक गई.”

‘जब अचानक हवा हो गया रोमांस’
लेकिन, सोमैया का रूमानी एहसास तुरंत ही हवा हो गया. जैसे ही यौन संबंध बनाने के बाद इब्राहिम ने कहा कि ख़ून तो निकला नहीं. तो सोमैया को लग गया कि उसके पति को उसके कौमार्य पर शक हो गया है. इब्राहिम को ये लग रहा है कि वो वर्जिन नहीं है.

पहली बार यौन संबंध बनाने पर ज़्यादातर महिलाओं को ख़ून निकलता है. इसकी तादाद अलग-अलग महिलाओं में अलग होती है. इसकी वजह होती है, योनि के ऊपर लगी एक पेशियों की झिल्ली जिसे हाइमेन कहते हैं.

लेकिन, डॉक्टरों और जानकारों के मुताबिक़, पहली बार यौन संबंध बनाने पर हर लड़की को ख़ून निकले, ये ज़रूरी नहीं है क्योंकि हाइमेन भी अलग-अलग तरह के होते हैं. कई तो इतने मोटे होते हैं कि उन्हें काटना पड़ता है. वहीं, कई इतने नाज़ुक होते हैं कि बिना ख़ून बहे ही फट जाते हैं. वहीं, कई महिलाओं की योनि में हाइमेन होता ही नहीं है. या फिर, किसी हादसे की वजह से उनकी योनि की ये झिल्ली बचपन में ही फट जाती है.

सोमैया अपने शौहर की प्रतिक्रिया के बारे में बताती हैं, “उसकी आंखों के ख़ंजर मेरे सीने में चुभ रहे थे. उसने ये जाना ही नहीं कि उस नज़र ने मेरी हस्ती को मिटा दिया.”

सोमैया बताती हैं, “इब्राहिम ने मुझसे बात करने की भी कोशिश नहीं की. मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं संदिग्ध हूं और मुझ पर मुक़दमा चलने वाला है. शादी से पहले हमने बहुत सी बातों पर चर्चा की थी. यहां तक कि हम ने सुहागरात के बारे में भी बातें की थी, जो हमारी ज़िंदगी की सबसे हसीन रात होनी चाहिए थी. हमें ये लगता था कि हम एक-दूसरे के बारे में बहुत कुछ जानते हैं. लेकिन, जब सुहागरात को ख़ून नहीं निकला, तो सारी मोहब्बत हवा हो गई.”

‘ख़ून से सनी चादरें’
हालांकि, जिस समाज से सोमैया ताल्लुक़ रखती है, वहां ऐसी बातें आम हैं. लेकिन, सोमैया को इसका कतई अंदाज़ा नहीं था कि ख़ुद उन्हें भी ऐसे तजुर्बे से गुज़रना पड़ेगा. सोमैया को लगता था कि नई पीढ़ी के लोगों का नज़रिया ऐसी बातों पर बदला है. उनका होने वाला पति भी अक़्लमंद है, खुले ज़हन का है और उसने यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की है.

लेकिन, जब शादी के अगले दिन इब्राहिम ने सलाह दी कि सोमैया के कौमार्य की तस्दीक़ के लिए उन्हें डॉक्टर के पास जाना चाहिए, तो वो हैरान हो गई.

लड़कियों का कौमार्य परीक्षण, बहुत पुरानी परंपरा है. लेकिन, इसका मक़सद और वर्जिनिटी जांचने का तरीक़ा, दोनों ही हर जगह और समाज के हिसाब से बदल जाते हैं.

बहुत से रुढ़िवादी परिवारों में किसी लड़की की शादी वाली रात को उसके कुंवारी साबित होने का जश्न बड़े ज़ोर-शोर से मनाया जाता है. मसलन, दूल्हा और दुल्हन के परिवार को ख़ून के धब्बों वाली चादर दिखाई जाती है. कई बार तो कौमार्य की तस्दीक़ होने पर ख़ास आयोजन भी किए जाते हैं.

वहीं, कौमार्य के सबूत हासिल करने के भी कई तरीक़े प्रचलित हैं. अगर किसी लड़की की योनि की झिल्ली फट गई है, तो उसे सर्जरी के माध्यम से दोबारा सिला जा सकता है. फिर चीन में बने हुए प्रोस्थेटिक हाइमेन भी आते हैं. जब यौन संबंध बनाते वक़्त उन पर दबाव पड़ता है, तो उनसे ख़ून जैसा दिखने वाला लाल द्रव निकलता है.

लेकिन, महिलाओं को फिर भी अलग तरह के हालात का सामना करना पड़ सकता है. अगर उनका कौमार्य शादी वाली रात को साबित नहीं हुआ तो, उनकी सम्मान के नाम पर हत्या भी की जा सकती है.

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‘जब सेक्स से नफ़रत हो गई’
शादी के अगले दिन सोमैया और उनका पति एक डॉक्टर से मिले. जिसने जांच के बाद बताया कि सोमैया का हाइमेन काफ़ी मोटा था और ये तभी फटेगा, जब वो क़ुदरती तौर पर किसी बच्चे को जन्म देगी. ये जानकर सोमैया के ख़ाविंद ने राहत की सांस ली और उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई. लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. सोमैया ने मन बना लिया था कि वो इब्राहिम से जितनी जल्द हो सके तलाक़ लेंगी.

तलाक़ लेने में इतनी देर करने के बारे में सोमैया बताती हैं, “मेरा पति मेरे लिए पूरी तरह से अजनबी बन चुका था. मुझे इस बात ने बहुत परेशान कर दिया था कि उसकी सोच भी वैसी ही थी, जैसी समाज के अन्य लोगों की. वो भी वर्जिनिटी को लेकर वही सोच रखता था, जो दूसरे लोग. मुझे अब इस बात का अंदाज़ा ही नहीं था कि वो अब आगे क्या कर सकता है. कुछ भी हो सकता था. मैं अब उसके साथ रह कर ख़ुद को महफ़ूज़ नहीं महसूस करती थी. उसने बरसों की मोहब्बत का कुछ ही लम्हों में क़त्ल कर दिया था.”

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कुछ देर ठहर कर सोमैया आगे बताती हैं, “हक़ीक़त तो ये है कि मुझे ये भी नहीं पता कि मैं अपना हाल कैसे बयां करूं. मैं उस रात के बाद उसके बारे में कैसा महसूस करती थी. लेकिन, जिस दिन से उसने मेरी हस्ती को महज़ एक मामूली झिल्ली तक समेट दिया था, उस दिन से मेरे लिए उसके साथ एक-एक पल गुज़ारना दुश्वार हो गया था. आख़िर मैं एक इंसान हूं, एक मांसपेशी का टुकड़ा तो नहीं.”

उस दिन के बाद से सोमैया का ज़हनी सुकून छिन गया था. उन्होंने लोगों से मिलना-जुलना छोड़ दिया था. वो कहीं भी आने जाने से बचती थीं. उन्हें लगता था कि वो किसी आम महिला जैसी ज़िंदगी ही जी रही हैं, जहां पर पत्नी, अपने शौहर की रज़ामंदी के बग़ैर कमज़ोर होती है. उसकी अपनी कोई हस्ती नहीं होती.

 

अगले तीन महीनों तक वो बेमन से इब्राहिम के साथ सेक्स करती रहीं. सोमैया बताती हैं, “जब वो मेरे साथ हमबिस्तर होता था, तो मुझे अंदर से घिन आती थी. मैं उसे नहीं चाहती थी. मुझे कुछ भी महसूस नहीं होता था क्योंकि मेरा सारा उत्साह सुहागरात को ही ख़त्म हो चुका था. मैं बस उसके काम निपटाने का इंतज़ार करती थी, ताकि वो मुझे तन्हा छोड़ दे. उसके साथ सेक्स करना मुझे गंदा और धोखेबाज़ी जैसा लगता था. मेरे लिए ये एक काम था. एक ज़िम्मेदारी थी, जो निभानी होती थी. ये मोहब्बत नहीं थी.”

मनोचिकित्सक अमल अल-हामिद जोड़ों को शादी की पहली रात के लिए सलाह देती हैं ताकि अनचाही परेशानियां न पैदा हों.
शादी की रात के लिए सलाह
सोमैया, जिस समाज से ताल्लुक़ रखती हैं,वहां ऐसी बातें आम हैं. उनकी जैसी बहुत-सी महिलाएं हैं, जो मज़बूती से बंद दरवाज़ों के पीछे ख़ुद को ख़ुद से छुपाए हुए ज़िंदगी जी रही हैं, ताकि समाज के तानों और नफ़रत भरे बोलों से ख़ुद को बचा सकें.

लेकिन, ऐसी शादियों से होने वाले बच्चों और परिवारों पर ऐसी बातों का बहुत बुरा असर होता है. ख़ासतौर से जब ऐसे मसलों पर खुल कर चर्चा नहीं होती.

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अमल अल-हामिद एक मनोचिकित्सक हैं. उन्होंने बीबीसी से इस बारे में बात की और बताया कि शादी की रात किसी लड़की की हालत कैसी होती है.

अमल, ऐसी तमाम लड़कियों को और जोड़ों को मशविरे देती हैं, जिनकी शादी होने वाली होती है ताकि अनचाही परेशानियां न पैदा हों. अमल कहती हैं, “हमारे समाज में आम तौर पर मनोवैज्ञानिक सलाह नहीं ली जाती क्योंकि इसे लेकर कई तरह के पूर्वाग्रह हैं.”

अमल अल-हामिद मानती हैं कि शादी से पहले ऐसे सलाह-मशविरों से शादीशुदा ज़िंदगी की शुरुआत कड़वाहट से नहीं होती. क्योंकि किसी भी शादीशुदा ज़िंदगी की बुनियाद एक-दूसरे से खुलकर बात करने और समझने से ही अच्छी बनती है.

अमल कहती हैं, “शादी करने वाले जोड़ों को चाहिए कि वो निकाह से पहले काम की बातें जान लें और कोई भी बात चाहे कितनी भी निजी क्यों न हो, उसके बारे में पूछें. जैसे कि हाइमेन के अलग-अलग प्रकार और ये सुनिश्चित करना की पहली बार सेक्स कैसे करें, ताकि लड़कियों को इस से जीवन भर के लिए ज़ख़्म न मिलें. लेकिन, हक़ीक़त में होता इसके उलट है. महिलाओं के लिए सुहागरात, ज़िंदगी की सबसे बुरी रात बन जाती है.”

अमल बताती हैं, “बहुत से मामलों में ऐसी समस्याओं को सुलझाने के बजाय, जख़्म रिसने के लिए छोड़ दिए जाते हैं, जो आगे चल कर और परेशानी का सबब बन जाते हैं.”

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‘कुंवारी होने का सबूत’

बीबीसी ने 20 लोगों से पूछा कि अगर, उन्हें पहली बार शारीरिक संबंध बनाते समय बीवियों में ‘कौमार्य के सबूत’ नहीं मिले, तो वो क्या करेंगे.

इन लोगों की उम्र 20 से 45 बरस के बीच थी. इनमें से कई शादीशुदा थे और कई तो पढ़े-लिखे तबक़े से ताल्लुक़ रखते थे, जो डॉक्टर थे, अध्यापक थे और ख़ुद के ‘खुले ज़हन वाला’ होने के दावे करते थे.

और इनके जवाब क्या थे? ज़्यादातर के जवाब सीधे या घुमा-फिराकर नकारात्मक ही थे.

ज़्यादातर आदमियों ने चादर पर ख़ून के दाग़ को लड़की के कुंवारी होने का सबूत माना. उनके मुताबिक़ ये ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी की बुनियाद थी, जो भरोसे और आपसी समझ के साथ शुरू होती थी.

वहां न प्यार बचा था, न जुनून
शादी के कुछ महीनों बाद सोमैया ने अपने शौहर से तलाक़ लेने की ख़्वाहिश जताई और साथ ही उसने ये भी कहा कि कोई भी बात उनका फ़ैसला नहीं बदल सकती है. क्योंकि उन्हें, इब्राहिम के आस-पास अपनी जान को ख़तरा लगता है और पहली रात को जो हुआ, उसके बाद दोनों के बीच अब न प्यार बचा था और न ही जुनून.

सोमैया ने इब्राहिम को ये भी बताया कि उसके शक ने किस तरह उनके किरदार को नीचा दिखाया था और उन्हें अपमानित किया था.

सोमैया बताती है, “मेरी बातों से इब्राहिम को ज़बरदस्त झटका लगा था. उसे ये लगता था कि मर्द होने के नाते उसे इस बात का पूरा अख़्तियार था कि वो अपनी बीवी से ये पूछे कि शादी से पहले उसके यौन संबंध थे या नहीं. उसने कहा कि वो मुझे ताउम्र तलाक़ नहीं देगा. उसने मुझे सलाह दी कि मैं अपने फ़ैसले के बारे में सावधानी से विचार करूं और अपने बाग़ी तेवरों के बारे में दोबारा सोचूं क्योंकि इस क़दम से मुझे बाद में अफ़सोस और पछतावा ही होगा.”

सोमैया कहती हैं, “हमारा समाज दोगला है. जहां मर्दों के तमाम महिलाओं से संबंध बनाने को अच्छा माना जाता है, उसकी तारीफ़ होती है वहीं, जब बात महिलाओं की आती है, तो ऐसे बर्ताव को समाज नकार देता है. कई बार इसकी सज़ा मौत के रूप में भी दी जाती है.”

सोमैया कहती हैं, “मेरा पूर्व पति ऐसा ही इंसान था. वो अपने दोस्तों को तो ये बातें बढ़-चढ़ कर बताता था कि उसने कई महिलाओं से संबंध बनाए लेकिन, मैंने एक मज़ाक़ भी किया तो वो ग़ुस्से से उबल पड़ता था.”

सोमैया के परिवार ने भी इब्राहिम से तलाक़ लेने में उसकी मदद से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि वो जिस बात को इतना बड़ा मसला बना रही हैं, वो मामूली और दरकिनार की जाने वाली बात है. इसके बाद सोमैया ने सीरिया छोड़ दिया और यूरोप चली गईं.

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जुमना, उम्र-45 बरस
जुमना ने अपनी ज़िंदगी का पेशतर हिस्सा सीरिया के अलेप्पो शहर के अलबाब मुहल्ले में बिताया था. 2016 में वो रहने के लिए बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स आ गई थीं.

जुमना ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने शौहर से तलाक़ लेने के लिए 20 बरस तक इंतज़ार किया था.

वो बताती है, “मैं उस वक़्त केवल 19 साल की थी जब मेरे अब्बा ने मेरी शादी मेरे चचेरे भाई से तय कर दी. मेरी इस शादी में कतई दिलचस्पी नहीं थी. मैं उसे पसंद नहीं करती थी. मैं पढ़ना चाहती थी. लेकिन, मेरे परिवार ने मुझ पर दबाव बनाया कि वो ही मेरे लिए सबसे सही शौहर है और धीरे-धीरे मैं उसे पसंद करने लगूंगी. बाद में प्यार हो ही जाएगा.”

बहुत से रुढ़िवादी परिवारों में, ख़ासतौर से ग्रामीण इलाक़ों में, दूल्हे और दुल्हन के बुज़ुर्ग रिश्तेदार (फिर चाहे वो महिलाएं हों या मर्द) नए शादीशुदा जोड़े के घर में लड़की के कौमार्य की तस्दीक़ होने का इंतज़ार करते हैं.

जुमना को अपनी सुहागरात का वाक़िया अच्छी तरह से याद है. वो उसके बारे में बहुत तकलीफ़ के साथ इस तरह बात करती हैं, जैसे वो अभी कल की ही बात हो.

जुमना कहती हैं, “मेरे पति ने दरवाज़ा बंद किया और कहा कि हमें जल्दी करनी चाहिए, क्योंकि परिवार के बुज़ुर्ग वर्जिनिटी के सबूत के लिए हमारा इंतज़ार कर रहे हैं.”

जुमना बताती हैं, “मुझे वो बहुत ही ख़राब लगा था. मेरे शौहर ने मुझसे एक मिनट बात तक नहीं की. उसे इस बात की परवाह ही नहीं थी. वो तो बस अपना काम पूरा करने में जुट गया, जबकि मैं डर और घिन से कांप रही थी.”

वो कहती हैं, “शारीरिक तकलीफ़ और जज़्बाती तनाव के बावजूद, मेरे शौहर को फ़िक्र थी तो ख़ून के कुछ धब्बों की.”

शर्मिंदगी
जुमना बताती हैं, “उस रात मुझे ख़ून नहीं निकला और तब मेरे पति ने रात के सन्नाटे को चीरने वाली चीख के साथ कहा कि ख़ून नहीं निकला. उसने मुझे इतनी भद्दी-भद्दी गालियां दी, जो मैं अपनी ज़ुबान से निकाल भी नहीं सकती. उसकी आंखें अंगारों की तरह दहक रही थीं, जो मुझे किसी भी वक़्त ख़ाक कर सकती थीं.”

क़रीब एक घंटे तक जुमना भयंकर सदमे में थीं. उनकी ज़ुबान से एक भी लफ़्ज़ नहीं निकला. उन्होंने सुबह तक भी इंतज़ार नहीं किया और उनका कौमार्य परीक्षण करने के लिए उसी रात एक डॉक्टर के पास गए, जो उनके कुंवारी होने की तस्दीक़ कर सके.

जुमना बताती हैं, “मुझे याद है कि वो डॉक्टर मुझे इस तरह सांत्वना दे रहा था,जैसे वो मेरा पिता हो. वो मेरे पति को उसकी करतूत के लिए फटकार लगा रहा था.”

जुमना को अगले कई सालों तक अपने उस शौहर के साथ रहना पड़ा, जिसने उसे सबके सामने ज़लील किया था. क्योंकि न जुमना का परिवार और न ही उनके आस-पास के लोग, तलाक़ के लिए उनका साथ देने को तैयार हुए. न तो उस रात किसी ने जुमना का समर्थन किया और न ही अगले बीस साल की शादीशुदा ज़िंदगी के दौरान.

20 साल और चार बच्चे होने के बाद भी जुमना उस ज़लालत को भूल नहीं पायी हैं. जैसे ही वो अपने बच्चों के साथ ब्रसेल्स पहुंची, उन्होंने अपनी शादी पर पूर्ण विराम लगा दिया ताकि वो अपने शौहर और उस समाज से बदला ले सके, जिसने उन्हें नीचा दिखाया था.

जुमना कहती हैं कि ब्रसेल्स की ज़िंदगी उन्हें और उनके बच्चों के लिए बेहतर है. अब वो दोबारा शादी नहीं करना चाहतीं. इसके बजाय वो अपनी पढ़ाई का सपना पूरा करना चाहती हैं, जिससे उन्हें पहले महरूम कर दिया गया था. वो अपने बच्चों को वैसी तरबीयत देना चाहती हैं, जो ख़ुद उन्हें नहीं मिल सकी.

जुमना बताती हैं, “मैं अब ख़ुश हूं, क्योंकि मैं अपनी दो बेटियों को भी अपने साथ यहां ला सकी. मैंने अपने शौहर को सिर्फ़ तलाक़ नहीं दिया. मैंने उस मआशरे को भी अलविदा कह दिया, जिसने मेरे साथ इंसाफ़ नहीं किया.”

रोज़ाना और अमीना: हाइमेन की मरम्मत की सर्जरी
एक अन्य महिला रोज़ाना बताती हैं कि आख़िर वो क्यों पांच साल बाद अपने मंगेतर से अलग हुईं. रोज़ाना कहती हैं, “मैं उस पर भरोसा करती थी और उससे बहुत प्यार करती थी. हमारी तमाम मुलाक़ातों के दौरान एक बार उसने मुझसे सेक्स करने के लिए ज़िद की. तकनीकी तौर पर तो मैं उसे अपना पति ही मानती थी, तो मैं उसकी ज़िद के आगे झुक गई और हमने संबंध बनाए.”

छह महीने बाद रोज़ाना और उसके मंगेतर के परिवार के बीच भयंकर झगड़ा हो गया. इसके बाद तब और क़यामत आ गई, जब ख़ुद रोज़ाना और उसके मंगेतर अलग हुए.

वो बताती हैं, “हमारे समाज में कौमार्य गंवाने पर क्या सज़ा होगी इस पर कोई बहस ही नहीं है. इसकी सज़ा सिर्फ़ मौत होती है.”

रोज़ाना ने कहा, “ख़ुशक़िस्मती से उनकी दोस्त उनके साथ थीं. उन्होंने मुझे चुपके से किसी महिला डॉक्टर से मिलने की सलाह दी और कहा कि मैं सर्जरी कर के बिल्कुल नई चाइनीज़ हाइमेन लगवा लूं. उस छोटी-सी सर्जरी के बग़ैर मैं कब की मर चुकी होती.”

इसी तरह अमीना के साथ बचपन में एक हादसा हुआ था, वो बाथरूम की सीढ़ियों पर गिर पड़ी थीं और उन्हें थोड़ा ख़ून निकला था. अमीना एक रूढ़िवादी और काफ़ी ग़रीब परिवार से आती हैं.

उन्हें उस वक़्त एहसास नहीं हुआ कि क्या हुआ है, लेकिन अमीना ने ये बात अपनी मां को बताई. मां, अमीना को फ़ौरन एक महिला डॉक्टर के पास ले कर गईं. जांच में पता चला कि अमीना का हाइमेन फट गया है.

अमीना बताती हैं, “वो दिन मेरी मां के लिए बहुत तकलीफ़ भरा था उन्हें सूझ ही नहीं रहा था कि क्या करें. मेरी तीन ख़ालाओं से मशविरे के बाद एक डॉक्टर से हाइमेन की सर्जरी करने का समय लिया गया. ऐसे ऑपरेशन बहुत चोरी से किए जाते हैं, क्योंकि हमारे देश में ये ग़ैर क़ानूनी हैं. फिर चूंकि ज़्यादातर लोगों को इस बात पर यक़ीन नहीं होता कि मेरी योनि की झिल्ली गिर जाने की वजह से फटी है, तो वो लोग मेरी वर्जिनिटी पर ताज़िंदगी सवाल उठाते.”

वर्जिनिटी टेस्ट
कई अरब और मुस्लिम देशों में बहुत-सी महिलाओं को शादी से पहले वर्जिनिटी टेस्ट से गुज़रना पड़ता है. इसके बाद ही होने वाली दुल्हन को कुंवारी होने का तमगा मिलता है.

ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने इंडोनेशिया और अन्य अरब और मुस्लिम देशों में होने वाले इस तकलीफ़देह ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ की कड़ी निंदा की थी.

ऐसे देशों में आम तौर पर बुज़ुर्ग महिलाओं को इसकी ज़िम्मेदारी दी जाती है कि वो होने वाली दुल्हनों की योनि में दो उंगलियां डाल कर ये पता लगाएं कि उनकी योनि की झिल्ली महफ़ूज़ है या नहीं.

ये रिवाज मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्ऱीका के देशों में बहुत आम है. ह्यूमन राइट्स वॉच ने 2014 में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में इसे लैंगिक हिंसा का एक रूप करार दिया था, जो महिलाओं के प्रति अमानवीय भेदभाव और मानवाधिकारों का उल्लंघन है.

बीबीसी के एक अध्ययन के मुताबिक़ भारत, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, मिस्र, जॉर्डन, लीबिया, मोरक्को और दूसरे अरब देशों के साथ दक्षिण अफ्ऱीका, जैसे देश वर्जिनिटी टेस्ट में सबसे आगे हैं.

ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक़ मिस्र, मोरक्को, जॉर्डन और लीबिया में कौमार्य परीक्षण बहुत ज़्यादा आम है.

एचआरडब्ल्यू की रिपोर्ट के जवाब में मोरक्को और मिस्र ने ऐसे दावों से साफ़ इनकार कर दिया. उन्होंने दोहराया कि ऐसे रिवाज पूरी तरह से ग़ैरक़ानूनी हैं, और ये चोरी-छुपे अवैध तरीक़े से किए जाते हैं.

नोट- पहचान गुप्त रखने के लिए इस स्टोरी में शामिल किए गए चारों नाम महिलाओं के अनुरोध पर बदल दिए गए हैं.

बीबीसी न्यूज से साभार

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