साहित्य, विश्व को बंधुत्व की बंधन में बाँधता है : बसन्त चौधरी
क्रांतिधरा मेरठ साहित्यिक महाकुंभ द्वारा आयोजित मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल में बरिष्ठ सहत्यकार, कवि , समाजसेवी, उद्योगपति तथा गजलकार श्री बसन्त चौधरीजी का संदेश
समस्त विद्वत वर्ग में मेरा सादर अभिवादन । आज प्रत्यक्ष तौर से मैं आपके समक्ष नहीं हूँ किन्तु अपनी भावनाओं को आप तक सम्पे्रषित करने से खुद को नहीं रोक पाया । अक्सर ऐसा होता है हम जो चाहते हैं वो होता नहीं है । पिछले कई महीनों से इस क्षण का इंतजार था किन्तु चाह कर भी इस साहित्यिक महोत्सव पर उपस्थित नहीं हो पाया । परम पूज्य जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज के अमूल्य सानिध्य और आशीर्वचनों से भी मैं वंचित रह गया । साहित्य के इस महाकुम्भ में मैं स–शरीर शिरकत नहीं कर पाया किन्तु सच कहूँ तो मानसिक रूप से मैं आप सबके बीच ही हूँ और इस पावन घड़ी को जी रहा हूँ ।
मुझे पूरी उम्मीद है कि पिछले दो वर्षों की ही भाँति इस वर्ष भी मेरठ साहित्यिक महोत्सव पूर्ण गरिमा और सफलता के साथ सुधी–जनों की उपस्थिति में सु–सम्पन्न होगा । समस्त विद्वत वर्ग की उपस्थिति इस महोत्सव को एक ऊँचाई प्रदान करेगी । साहित्य की यह ज्ञान गंगा समस्त सुधीजन को लाभान्वित करेगी ।
क्रांतिधरा मेरठ की उर्वरा भूमि अपनी ओर खींचती है । मेरठ की धरती बहुत से ऋषि मुनियों की तपोस्थली रही है । जहाँ आना सुकून देता है । क्रांति की इस जमीन को समस्त भारत व नेपाल में पर्यावरण, शिक्षा, शोध व् साहित्य के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर सेवारत संस्था ग्रीन केयर सोसाइटी के द्वारा, मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल, का पिछले दो वर्षों से किया गया आयोजन एक नई पहचान दिला रहा है और मेरठ एक साहित्यिक नगरी के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है । साहित्य के गुणीजनों का एक साथ एक मंच पर आना निःसन्देह एक अविस्मरणीय कार्य है, इसके लिए आयोजक वर्ग की जितनी प्रशंसा की जाय कम ही होगी । एक वर्ष के अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप यह महायोजन होने जा रहा है जो अमूल्य है । नवांकुरों को मंच प्रदान करना और सार्थक चर्चा परिचर्चा को कार्यक्रम में शामिल करना, एक सार्थक संदेश अवश्य प्रसारित करेगा ।साथ ही यह एक ऐसा आयोजन है जो विश्व स्तर पर बंधुत्व की भावना को जगाता है और साहित्य के बंधन में बाँधता है । साहित्य की परिभाषा सहित में है, वह जो सबको साथ लेकर चलता है जहाँ सबकी भावना समाहित होती हैं । निश्चय ही साहित्य की इस परिभाषा को यह कार्यक्रम सार्थक करता है ।
यह साहित्य उत्सव सफल और सार्थक हो मेरी आत्मिक कामना है । शुभकामनाओं के साथ आपका बसंत चौधरी ।



