Mon. Feb 24th, 2020

आजको साँझ: डा. कृष्ण जङ्ग राणा हाम्रो माझ, डा राणा सम्मानित

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नेपालगन्ज,(बाँके), पवन जायसवाल । नेपालगन्ज में प्रसिद्ध गजलकार तथा साहित्यकार डा. कृष्ण जङ्ग राणा के सम्मान में साहित्यिक कार्यक्रम के साथ साथ सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।
नेपालगन्ज सुर्खेत रोड स्थित सिद्घर्थ काटेज में “आजको साँझ ः डा. कृष्ण जङ्ग राणा हाम्रो माझ” नाम दे कर डा राणा को “सर्वदा साहित्य सम्मान–२०७६” और “बाँके ललित कला सम्मान” द्वारा अभिनन्दन भी किया गया ।
बाँके जिला के नेपालगन्ज घरवारी टोल में जन्मे हुये ८८ वर्ष के डा. कृष्ण जङ्ग राणा अभी धोबीघाट, जावलाखेल ललितपुर में रहते आ रहें हैं | डा. कृष्ण जङ्ग राणा का नेपाली औ हिन्दी भाषा में २० कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी है ।
कार्यक्रम संघीय संसद् की माननीय सदस्य सरवत आरा खानम के प्रमुख आतिथ्य में सम्पन्न हुआ था|  कार्यक्रम में डा. कृष्ण जङ्ग राणा की जीवनी औ साहित्यिक योगदान के बारे में चर्चा वरिष्ठ कथाकार सनत रेग्मी ने किया था, वरिष्ठ पत्रकार पूर्ण लाल चुके और अवधी साहित्यकार विष्णु लाल कुम्हार ने भी उनपर चर्चा किया था ।
डा. कृष्ण जङ्ग राणा के सुमधुर संगीतमय कुछ गजल वाचन के वीच में आयोजित कार्यक्रम में नेपाल औ भारत के नेपाली, हिन्दी औ उर्दू साहित्यकार तीन दर्जन से अधिक लोगों की सहभागिता रही थी अधिकाँश लोगों ने अपनी– अपनी रचनाएँ वाचन किये थे ।
वह कार्यक्रम में भारतीय जिला बहराईच नानपारा निवासी उर्दू साहित्यकार शारिक रब्बानी, गुल्जारे अदब नेपालगन्ज के अध्यक्ष तथा प्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार अब्दुल लतिफ शौक, गुल्जारे अदब के सचिव उर्दू साहित्यकार मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशी, अन्सार नेपाली, चरित्रा शाह, गणेशा कार्की लगायत लोगों ने भी अपनी अपनी रचनाएँ वाचन किये थे ।
वह कार्यक्रम सर्वदा साहित्य सङ्गम की उपाध्यक्ष कल्पना खरेल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ था कार्यक्रम की सहजीकरण सर्वदा साहित्य सङ्गम के अध्यक्ष तथा प्रसिद्ध गजलकार खगेन्द्र गिरि कोपिला ने किया था ।
वि.सं. २०१४ साल में नेपाल सरकार की स्वास्थ्य सेवा में प्रवेश कियें थे डा. कृष्ण जङ्ग राणा पिछले समय में संयुक्त राष्ट्र संघ में लम्बे समय तक सेवारत रहकर अवकास होने के बाद में साहित्यिक क्षेत्र में सक्रिय रहते आ रहें हैं ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में भरत बहादुर रानाभाट, हीरालाल शर्मा “चिन्तक“ औ दलजीत रसाइली की सक्रिय सहयोग रही थी ।
डा. कृष्ण जङ्ग राणा सम्बद्घता ः– जिला स्वास्थ्य अधिकृत, पाल्पा नेपाल–१९५७ में, प्रमुख अधिकृत नेपाल औलो उन्मूलन संघ, नेपाल–१९७२, सिनियर रिजनल एडवाइजर, विश्व स्वास्थ्य संघ, दिल्ली भारत–१९९३, विजिटिंग प्रोफेसर, चिकित्सा शास्त्र अध्ययन संस्था त्रिभुवन विश्व विद्यालय नेपाल–१९९५ ।
सामाजिक क्षेत्र मेंः– प्रेसिडेण्ट हर्ट क्लब नेपाल, प्रेसिडेण्ट मृगेन्द सम्झना मेडिकल ट्रष्ट नेपाल, प्रेसिडेण्ट पुल्चोक, झम्सीखेल, धोबी घाटटोल सुधार समिति लगायत जगह में ।
प्रकासित कृतियाँ ः– ज्ष्कतयचथ या ःबभिचष्ब ऋयलतचय िष्ल ल्भउब ि(द्यययप–द्दण्ण्ण् । देशको लागि मन दुखाऊ ( नेपाली कविता सङग्रह–१९७२), मेरो गीत तिम्रो लागि (नेपाली कविता सङग्रह–१९७५), बिखरें काँटे बिखरे फूल (हिन्दी कविता सङग्रह–२००५), मनका उद्गार ( नेपाली कविता सङग्रह–२००५), अन्र्भाव (नेपाली कविता सङग्रह–२०१०), मनकै सेरोफेरोमा (नेपाली गजल सङग्रह–२०१०),आस्थाको खोजीमा(नेपाली गजल सङग्रह–२०१०), भाव थरीथरी (नेपाली गजल सङग्रह–२०११), मायाँको सँगालो (नेपाली गजल सङग्रह–२०११), छल्किएका भाव मनका (नेपाली गजल सङग्रह–२०११), उकाली ओराली (नेपाली गजल सङग्रह–२०१२), जिंदगी की परछाइयाँ (हिन्दी गजल सङग्रह–२०१२), जीवन की गलियों में (हिन्दी गजल, गीत, कविता–२०१२), प्यार का तोहफा (हिन्दी गीत गजल–२०१३), जिंगदी, प्यार और खुशियाँ (हिन्दी गजल–२०१४), मंजिल की खोज (हिन्दी गजल –२०१४), धूप छाँह (हिन्दी गजल–२०१५) लगायत की कृतियाँ प्रकासित हो चुकी है ।

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