Sun. Jul 12th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों में अभी नेपाल जटिल अवस्था में है : डा. शम्भुराम सिम्खडा

 

हिमालिनी  अंक  नवंबर  2019 | नेपाल के अन्तराष्ट्रीय सम्बन्धी नीति और दृष्टिकोण पर डा. शम्भुराम सिम्खडा, अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध–विज्ञ के विचार

अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध के दृष्टिकोण से अगर देखा जाय तो नेपाल किस स्थान में है ?
कठिन स्थान में है । नेपाल देश के निर्माण काल से ही एक प्रयोगशाला बना हुआ है ।   पृथ्वी नारायण शाह ने जिस समय उत्तर में विशाल चीन, दक्षिण में उदीयमान ब्रिटिश साम्राज्य इन दोनों के बीच में हिमालय के दक्षिण भाग को और वो भी छोटे छोटे राज्यों का जो एकीकरण करके नया एकीकृत नेपाल राज्य की परिकल्पना की वह मौलिक और महत्वपूर्ण प्रकार का प्रयोग था । अभी तक हमलोग एक प्रकार के प्रयोग में ही हैं । खासकर अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध के हिसाब से अभी हम अत्यन्त जटिल अवस्था में हैं । हमारे दोनों ओर दो विशाल देश हैं जो वर्तमान अवस्था में अर्थव्यवस्था का एक उदीयमान राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है ।

डा. शम्भुराम सिम्खडा, अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध–विज्ञ

भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से नेपाल भारत के ज्यादा करीब दिखता है । आपका क्या विश्लेषण है ? कैसा है नेपाल भारत का सम्बन्ध ?
इस विषय में मेरा मौलिक दृष्टिकोण है । समीपता दो देशों के सम्बन्ध को गहरा बनाती है पर वही समीपता जटिलता भी बढाती है और सम्बन्ध संवेदनशील बनता चला जाता है ।  आज ऐसा ही है हमारे सम्बन्ध घनिष्ट हैं, महत्तवपूर्ण हैं किन्तु जटिल और संवेदनशील हैं ।
नेपाल और चीन के बीच का सम्बन्ध कैसा है ?
नेपाल और चीन के बीच के सम्बन्धों में अभी जटिलता और संवेदनशीलता दोनों ही कम है क्योंकि हम जितने करीब भारत के हैं उतने करीब चीन के नहीं हैं । इसका कारण भाषा, भौगोलिक स्थिति और सीमा की कठिनाई हो सकती है । हमारा लेना देना भारत के साथ ज्यादा है । बावजूद इसके चीन के साथ भी हमारा सम्बन्ध महत्तवपूर्ण है क्योंकि चीन हमारा दूसरा महत्तवपूर्ण पड़ोसी है । आज के समय में मैं यह देख रहा हूँ कि यहाँ भी जटिलता और संवेदनशीलता बढने वाली है ।  इसका एक उदाहरण मैं देता हूँ । अभी जब मैं बाहर था तो सुना कि नेपाल के एटीएम में चोरी हुई जिसमें चीनी नागरिक संलग्न थे ।  जिसके कारण मैंने सुना कि वक्तव्य निकाल कर माफी माँगी गई । तो जब घनिष्ठता बढती है आना जाना बढता है तो यह जटिलता भी साथ लेकर आती है ।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 10 जुलाई 2026 शुक्रवार शुभसंवत् 2083

अमेरिका के साथ का सम्बन्ध कैसा है ?
अमेरिका नेपाल का दूसरा सबसे पहला दौत्य समबन्ध स्थापना देश है । इसलिए यह अत्यन्त महत्तवपूर्ण है । पर अभी अमेरिका को यह लगता है कि चीन और भारत का होना ही काफी है नेपाल के लिए इसलिए वह चिन्तित है ।  दूसरे जनआन्दोलन के समय में अत्यन्त सक्रिय राजदूत यहाँ आए थे । उनका नाम जिम मोरियाट् था । उन्होंने उस समय एक अन्तर्वाता में कहा था कि नेपाल में जो हो रहा है उससे अमेरिका नर्वस है ।
पिछले समय में इ०८ो प्यासिफिक का विषय बाहर आया है । इसे कैसे देखते हैं ?
अमेरिका का इस क्षेत्र के महत्व को ध्यान में रखकर विगत का अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध का केन्द्रबिन्दु युरोप था । पर, अभी केन्द्रबिन्दु एशिया प्यासिफिक हो गया है । उसी एशिया प्यासिफिक  केन्द्रबिन्दु को अपने दृष्टिकोण में लाने के लिए अमेरिका द्वारा प्रतिपादित एक रणनीति है इ०८ो प्यासिफिक ।
इसे नेपाल के दृष्टिकोण से देखने पर क्या दिखता है  ?
नेपाल में क्यों बड़ी शक्तियों की दिलचस्पी है, इससे पहले मैंने कहा कि नेपाल का प्रयोग एक प्रयोगशाला के रुप में होता आया है । हमारी जो भूराजनीति और अवस्था है उसमें बड़ी शक्तियाँ आन्तरिक राजनीति और आंतरिक स्थिति में संलग्नता खोजती है । इसी कारण से वो नजदीक होते हैं । अमेरिका का भी राष्ट्रीय हित नेपाल के आन्तरिक विकास के साथ किसी ना किसी रूप में जुड़ा हुआ है इसलिए भी वह दिलचस्पी रखता है ।  इसलिए सबसे पहले नेपाल को अपना घर ठीक रखना होगा ।  अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध यानि ‘जानो तो सहयोग, न जानो तो हस्तक्षेप’ प्रकृति का होता है । इसे नकारात्मक रूप में मत लीजिएगा पर नेपाल विगत से ही क्रीडा स्थल रहा है । क्योंकि अतीत में भी राणा शासन में ब्रिटिश ने यहाँ कार्यालय खोला ही था । अन्य देश के साथ दौत्यसम्बन्ध बढाने पर भी उनका स्वार्थ दिखता है । हमें बस यह ध्यान रखना है कि यह क्रडिा स्थल रंगभूमि या रण भूमि ना बने ।

यह भी पढें   कांग्रेस ने की संविधान संशोधन को लेकर अपनी धारणा सार्वजनिक करने की तैयारी

क्या ऐसी कोई सम्भावना है ?
सम्बन्धों का निर्वाह अगर सही तरीके से नहीं हो तो यह सम्भावना बनी ही रहती है ।
सरकार अभी विकास और समृद्धि का ऐजेन्डा लेकर चल रही है इसके लिए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का प्रयोग कैसे कर सकते हैं ?
सबसे पहले तो हमें अपना आचरण और व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा । सञ्चार और प्रविधि के युग में अन्तराष्ट्रीय समुदाय की प्रकृति भी परिवर्तित हुई है । वो हमारे सभी काम का नजदीक से अवलोकन कर रहे हैं ।
इसलिए भाषण से अधिक आचरण और व्यवहार अगर ठीक हुआ तो अन्तराष्ट्रीय समुदाय का नजरिया भी ठीक होगा । सहयोग भी उसी प्रकार का होगा । किन्तु उनके ऐजेन्डा को हम कैसे प्रभावित कर सकते हैं यह सोचना होगा क्योंकि उनके एजेन्डे में निश्चय ही उनका स्वार्थ होगा । इसलिए हम कैसे आगे बढें यह हमें ही तय करना होगा ।

यह भी पढें   गोडैता नगरपालिका –१० के विवेक मण्डल ने किया आत्मदाह का प्रयास

अन्त में, नेपाल में आए संघीयता के प्रति आपकी क्या धारणा है ?
संघीयता अगर सही रूप से विकसित होती है तो इसमें फायदा है यह देश के लिए फायदेमन्द साबित होगा । पर अभी ऐसा कुछ मैं नही. देख रहा हूँ । संघीयता का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि यह राजनीति को जनता के करीब लेकर जाता है । और जब राजनीति नजदीक आती है तो जनता जिम्मेदार बनती है । अभ जनता नहीं जनप्रतिनिधि की सेवा सुविधा पर संघीयता केन्द्रित है ।
नेपाल में संघीयता सोच समझ कर नहीं बल्कि संवैधानिक आवेग में आया है । काम करने वाले को सेवा सुविधा चाहिए । वर्तमान में जनप्रतिनिधियों को सुविधाएँ चाहिए जैसे कि गाड़ी बंगला वह सब कहाँ से आएगा । इस सबके कारण जनता में संघीयता के प्रति वितृष्णा बढ रही है ।
हिमालय पोस्ट से साभार

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *