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मन्त्री यादव द्वारा प्रस्तुत संविधान संशोधन संबंधी प्रस्ताव को प्रधानमन्त्री ने किया अस्वीकार

 

काठमांडू, २४ दिसम्बर । उपप्रधानमन्त्री तथा कानून मन्त्री उपेन्द्र यादव सोमबार शाम मन्त्रिपरिषद् बैठक में संविधान संशोधन संबंधी प्रस्ताव पेश कर रहे थे । संविधान संशोधन संबंधी प्रस्ताव को एक शिलबन्दी खाम में रखकर मन्त्री यादव बैठक में पहुँचे थे । जब नियमित विषयों की विचार–विमर्श खत्तम हो गई तो उन्होंने कहा कि प्रधानमन्त्री जी मेरा एक प्रस्ताव है । लेकिन उनका प्रस्ताव प्रधानमन्त्री ओली ने सिधे अस्वीकार किया है ।
समाचार स्रोत का कहना है कि मन्त्री यादव से प्रस्ताव की बात होते हुए प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली ने पूछा– ‘किस विषय का प्रस्ताव है ?’ मन्त्री यादव ने कहा कि संविधान संशोधन संबंध में है । संविधान संशोधन संबंधी विषय सुनते हुए प्रधानमन्त्री ओली ने कहा– ‘स्टप इट ।’ प्रधानमन्त्री ओली का कहना है कि यह संविधान संशोधन करने की समय नहीं है । उन्होंने यह भी कहा कि संविधान संशोधन संबंधी प्रस्ताव जिस तरह आया है, वह भी संवैधानिक नहीं है ।
प्रधानमन्त्री ओली ने कहा है कि एक बार संविधान संशोधन हो चुका है, जो देश–विदेश स्वीकार्य भी है । इसीलिए संविधान संशोधन बारबार नहीं हो सकता और यह क्याविनेट से होनेवाला निर्णय भी नहीं है । प्रधानमन्त्री ओली को मानना है कि संविधान संशोधन के लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति होनी चाहिए । प्रधानमन्त्री एवं सत्ता–नेतृत्व में रहे राजनीतिक पार्टी से विचार–विमर्श होनी चाहिए, तब भी संशोधन संबंधी प्रस्ताव के बारे में सोचा जा सकता है । समाचार स्रोत के अनुसार प्रधानमन्त्री की जवाफ के बाद मन्त्री यादव भी चूप हो गए हैं ।
अब प्रश्न उठ रहा है कि संविधान संशोधन संबंधी प्रस्ताव अस्वीकार होने के बाद समाजवादी पार्टी अब क्या करेगी ? स्मरणीय बात तो यह भी है कि अगर समाजवादी पार्टी सत्ता से बाहर आएगी तो राजपा को सत्ता में लाने की तैयारी प्रधानमन्त्री ने की है, यह नेकपा निकट स्रोत का कहना है । पिछली बार राष्ट्रीयसभा चुनाव संबंधी प्रसंग में सम्पन्न नेकपा–राजपा सहमति भी इसी की ओर संकेत कर रही है ।

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