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अच्छी परवरिश ही बच्चों का भविष्य : निक्की शर्मा रश्मि

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हिमालिनी  अंक  नवंबर  2019 |अच्छी परवरिश ही बच्चों का भविष्य है । बच्चे मन के सच्चे हैं ये आपने भी जरूर सुना होगा । बच्चों का क्या जो देखते हैं, सुनते हैं वही अमल करते हैं । बच्चों का मन गीली मिट्टी जैसा होता है, जिसे आप जिस तरह ढालोगे वही ढल जाएगा । बचपन के संस्कार ही उसे आगे रास्ता सही गलत चुनने में मदद करते हैं । अच्छी परवरिश अच्छा इंसान तो बना ही देता है बाकी आगे उसकी मेहनत । हर बच्चा एक तरह नहीं होता है, कोई चंचल, कोई शांत, कोई उग्र तो कोई व्यवहारिक कोई हर बच्चे को उसके व्यवहार के हिसाब से देखभाल करनी पड़ती है, उसके परिवार वालों को और करनी भी चाहिए, तभी बच्चे बेहतर बनते हैं । समय के हिसाब से बच्चों को अच्छी परवरिश देना एक चुनौती बनती जा रही है । एकल परिवार में बच्चों को हर तरह के संस्कार मिल पाना असंभव सा हो रहा है । बच्चों में सर्वागीण विकास बहुत जरूरी है तभी एक सुंदर समाज के आगे कल्पना की जा सकती है । अच्छी परवरिश के लिए आखिर क्या किया जाए ? यह सवाल भी है । हर माता–पिता अच्छी परवरिश ही देना चाहते हैं, लेकिन कहीं ना कहीं आज हमें अपने आप में भी बदलाव लाने होंगे तभी हम बच्चों को बदल सकते हैं। उनकी कुछ आदतें बदल सकते हैं ।

अपनी इच्छा ना थोपें — चाहे अनचाहे कहीं न कहीं हम अपनी इच्छा अपने बच्चों पर थोपने की कोशिश करते हैं । यह सबसे गलत बात है । समय बदला सिस्टम बदल रहा नई टेक्नोलॉजी ने अपनी जगह बनाई है और हम आज भी अपनी इच्छा बच्चों पर थोप कर कर उन्हें तनाव देते हैं, उन्हें उनके हिसाब से देखने दे, सोचने दे । रुचि किस चीज में, क्या है समझने दे । भागदौड़ वाले समय में उन्हें खुद अपनी रुचि देखकर कदम उसे बढ़ाने दें । उनका साथ दें, उन पर विश्वास रखें, जहां तक हो सके मदद करें ।

‌दुसरे बच्चों की तुलना ना करें— बच्चों की तुलना हर घर की शायद यही कहानी है । कभी न कभी जरूर सुनी जाती है, पर यह अनुचित है । बच्चों के दिमाग पर गहरा असर करती है । तुलना करने पर बच्चे उग्र हो जाते हैं जिससे तुलना आप कर रहें उनके प्रति उनका रवैया बदलता जाता है । बच्चे सभी अलग होते हैं तुलना करना ठीक नहीं है । आप अपने बच्चों पर ध्यान ज्यादा दे रिजल्ट सामने जरूर आएगा ।

‌हर जिद पूरी ना करें— बच्चों के जिद के आगे माता–पिता आज जल्दी घुटने टेक देते हैं । जाने अनजाने उनकी हर जिद पूरी करके उन्हें गलत दिशा में ले जा रहे हैं । कुछ पल शांत करने के लिए उनकी जिद पूरी कर देना आगे के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है । इससे यह उन्हें कभी समझ ही नहीं आएगा क्या उचित है, या अनुचित खुद को उनकी जीद से बचाने के लिए उनकी हर जिद पूरी कर देना गलत है । उन्हें अच्छे, बुरे की समझ आप को ही समझानी होगी । इसलिए जिद पूरी करने की के बजाय समझाने की कोशिश करें । क्या जरूरी नहीं है, और क्या जरूरी है ये बतानी जरूरी है उन्हें ।

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‌अनुशासन— पहले जहां जॉइंट फैमिली में अनुशासन को सबसे ज्यादा तवज्जो दिया जाता था आज एकल परिवार में यह कम ही नजर आता है । बड़े, छोटे का लिहाज संस्कारों में दिख जाते थे । बच्चे अनुशासन बचपन से देखते.. खुद सीख जाते थे । अब आपको बैठकर यह बातें समझानी पड़ती है । छोटे–बड़े बुजुर्गों का लिहाज, केयर उन्हें प्यार से समझाना होगा । बच्चों को समय पर हर काम करने की शिक्षा देनी होगी । क्यों और कैसे उन्हें करके दिखाना होगा । अनुशासन हमेशा आगे बढ़ने में मददगार ही रहा है । समय पर सोना, जागना, पढ़ाई हर चीज समय पर करने की आदत एक बार लग जाए तो ताउम्र रहती है ।

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‌हर चीज में टोकें नहीं— सभी माता–पिता बच्चों को हर बात पर टोकते रहते हैं । यह क्यों ? ऐसे नहीं, वैसे करो… यह आदत हर जगह, हर समय सही नहीं है । कभी–कभी उन्हें खुद फैसला करने दे.. उससे उनकी क्षमता का पता चलता है । आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलती है । छोटे फैसले खुद खुद करने से वह आत्मनिर्भर बनेंगे । सलाह और साथ के लिए आप तो है ही । बच्चा खुद फैसले लेने का आदि होगा । सही गलत आप समझाते रहे बच्चे सीखते जाते है । आज कल के बच्चे बहुत एक्टिव हैं, बच्चों को अपने आप से भावनात्मक रूप से जोड़े, उसे एहसास कराते रहें हर फैसले पर आप उनके साथ है । सही सलाह देते रहें, बताते रहें वह आप से जुड़ा रहेगा । अच्छी परवरिश बच्चों को संस्कारी बनाती है । परिवार को जोड़ें रहती है समाज को नई दिशा देती है । यही युवा वर्ग आगे एक अच्छा समाज देगी । बच्चों को समझें.. केवल स्कूल फीस, ट्यूशन, पिजÞ्जÞा, बर्गर देने से बच्चों की परवरिश सही नहीं होती.. उन्हें क्वालिटी टाइम दें । बच्चों को संतुलित आहार, मानसिक शांति, सुकून, परिवार में ही मिलता है तभी तो आगे बढ़ता है । आपका कर्तव्य केवल फीस भरकर खत्म नहीं हो जाता बच्चों के साथ हमेशा खड़े रहे आत्मविश्वास भरे तभी तो अच्छी परवरिश से आसमान की ऊंचाई तक वो जाएंगे ।

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