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प्रदेश नम्बर दाे धनुषाः मिथिला क्षेत्र की पवित्र धर्मस्थली

 

डा श्वेता दीप्ति

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राजा जनक द्वारा आयोजित स्वयंवर में श्रीराम के द्वारा तोड़े गए धनुष के नाम पर नेपाल के इस जिले का नाम धनुषा रखा गया है । जनकपुरधाम, मटिहानी, धनुषा और भारत स्थित सीतामढ़ी रामायण से सम्बन्धित क्षेत्र हैं और मिथिला संस्कृति के पोषक और परिचायक हैं । इस सम्पूर्ण क्षेत्र को मिथिला क्षेत्र कहा जाता है । नेपाल के तराई क्षेत्र में अवस्थित जनकपुर किसी परिचय का मुहताज नहीं है । जनकपुरधाम से १५ किलोमीटर उत्तर पूर्व में धनुषा गाँव है । यहाँ आज भी पत्थरों के टुकड़े और शिलालेख हैं जो इतिहास से हमें परिचित कराते हैं । दधिचि की हड्डी से बने हुए धनुष को यहीं श्रीराम के द्वारा तोड़ा गया है ।

१७वीं सदी में स्वामी चतुर्भुज गिरी ने राम मंदिर की स्थापना की । उसके कुछ समय बाद महात्मा सुरकिशोरदास ने जानकी जन्मस्थल निश्चित किया और वहाँ राजा माणिक सेन ने वि.सं । १७८४ में १४०० बीघा जमीन देकर जानकीमन्दिर की स्थापना की । उसके कुछ समय बाद लक्ष्मण मंदिर, जनकमंदिर आदि बने । यहाँ सीता कुण्ड, विवाहकुण्ड, धनुष सागर, गंगा सागर, विषहरा पोखर, राजदेवी मंदिर आदि का निर्माण हुआ जो आज भी विद्यमान है ।

जनकपुर एक ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर है जिसकी संवृद्धि और सुरक्षा की आवश्यकता है । जनकपुर राजा जनक की राजधानी है । इसे तालाबों की नगरी भी कहा जाता है । जनकपुर में ही राजदेवी मंदिर है । जानकी मंदिर की छटा अपूर्व है । स्थापत्यकला का सुन्दर नमूना है जानकी मंदिर । जानकी मंदिर मुगलकला और हिन्दुकला का सम्मिलित उदाहरण है । जनकपुरधाम से कुछ पूर्व कपिलेश्वर महादेव स्थान पर उत्खनन से कुमार और योगमाया की प्राचीन मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं पुरातत्व विभाग के अनुसार ये मूर्तियाँ १०वीं और ९वीं सदी की हैं । जनकपुर के आसपास कई ऐसी जगहें हैं जिनपर अनुसंधान की आवश्यकता है । इतिहास से सम्बद्ध कई महत्वपूर्ण जानकारी इससे प्राप्त हो सकती हैं । जनकपुर नेपाल के किसी भी जगह से सड़क मार्ग से जाया जा सकता है । काठमान्डू से हवाईयात्रा की भी सुविधा है । यहाँ रहने और खानेपीने की अच्छी व्यवस्था है । इसकी सीमा भारत के बिहार राज्य से जुड़ी हुई है । वर्ष में लाखों की संख्या में यहाँ दर्शनार्थी आते हैं । नवम्वर महीने–कार्तिक शुक्ल पंचमी) में विवाह पंचमी के अवसर पर यहाँ की छटा देखते ही बनी है । माँ जानकी के विवाह के अवसर पर हजारों की संख्या में भारत के अयोध्या से बाराती आते हैं जिनका भरपूर स्वागत यहाँ किया जाता है । हर शाम गंगा आरती होती है । जनकपुर का छठ महोत्सव भी प्रसिद्ध है । किन्तु विवाहपंचमी के समय तो यहाँ की छटा ही निराली होती है । रामनवमी में भी यहाँ काफी संख्या में दर्शनार्थी आते हैं ।

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जनकपुर के पास ही मटिहानी ग्राम है जिसका अत्यन्त महत्व है । मटिहानी पंचकोशी परिक्रमा के अन्तर्गत अवस्थित है । माना जाता है कि माँ जानकी का मटकोर–विवाह में होने वाला एक संस्कार) यहीं हुआ था । मिथिला महात्म में इस जगह को मृत्खनी अर्थात् मिट्टी कोड़ने की जगह बताया गया है । यहाँ की मिट्टी को इतना महत्वपूर्ण माना गया है कि कहा जाता है कि यहाँ आने से या वास करने से सम्पूर्ण जीवनचक्र से मुक्ति मिल जाती है । फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा में होने वाले परिक्रमा में जमात एक दिन के लिए मटिहानी में विश्राम करते हैं जिसमें यहाँ के निवासी जी खोलकर हिस्सा लेते हैं । माना जाता है कि त्रेतायुग में माँ जानकी का जहाँ जहाँ डोला रुका था वहाँ वहाँ परिक्रमा का डोला भी रुकता है जिसमें मटिहानी भी है । इस क्षेत्र के आसपास कई दर्शनीय स्थान हैं । तसमैया कूप, मृतखनी तालाब, विरजा नदी, दुग्धनदी, यमुना नदी आदि । इन नदियों की उत्पत्ति के विषय में कहा जाता है कि ये माँ जानकी की सेवा के लिए अवतरित हुई थीं । मृतखनी तालाब के पास ही वि.सं ।१७६६ में मकवानी राजा माणिकसेन के द्वारा यहाँ लक्ष्मीनारायण का मंदिर निर्माण किया गया था । जो आज भी वहाँ है । सरोवर के नैऋत्य कोण में नागा निर्वाण स्थल है । मिथिला क्षेत्र की यह धरती तपोभूमि के रूप में जानी जाती हैं । यह वैष्णवपीठ है मठाधीश की परम्परा की शुरुआत यहीं से मानी जाती है ।

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यहीं जलेश्वर नामक स्थान है । जलेश्वर तालाब के विषय में कहानी है कि इस तालाब मेें आज भी नाग नागिन का वास है । जो समय समय पर निकलते हैं । यहीं शुकदेव मुनि का तप स्थल है जिनके नाम पर इस जगह का नाम सुगा पड़ा है । भार्गव सरोवर शुकदेव सरोवर और भृगु सरोवर यहीं हैं जिनमें स्नान करने की महत्ता है ।

 

मिथिला का यह सम्पूर्ण क्षेत्र एक गौरवशाली अतीत को अपने अन्दर समेटे हुए है । किन्तु सरकार की उपेक्षा की वजह से इस जगह को जो प्रसिद्धि और महत्ता मिलनी चाहिए थी वो नहीं मिली है । पर्यटन की भरपूर सम्भावना यहाँ है अगर इसे बढ़ावा दिया जाय तो इस क्षेत्र का रंगरूप ही बदल जाएगा । विश्व के मानचित्र पर जनकपुर या धनुषा जिला को ख्याति दिलाने के लिए सरकार को जो प्रयास करने चाहिए वो नहीं हो रहे हैं ।

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