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समृद्ध नेपाल, सुखी नेपाली अभियान में भारत का साथः कार्यवाहक राजदूत डॉ. अजय कुमार

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लिलानाथ गौतम/काठमांडू, २७ जनवरी
नेपाल के लिए कार्यवाहक भारतीय राजदूत डा. अजय कुमार ने कहा है कि समृद्ध नेपाल, सुखी नेपाली अभियान में भारत का साथ हरदम रहेगा । भारत की ७१वें गणतन्त्र दिवस के अवसर पर नेपाल भारत मैत्री समाज द्वारा सोमबार काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए कार्यवाहक राजदूत डा. अजय कुमार ने कहा– ‘नेपाल में ‘समृद्ध नेपाल, सुखी नेपाली’ अभियान जारी है, अगर इसमें भारत को सहयोग करने की मौका मिले तो इसमें भारत को भी खुशी मिलेगी ।’ नेपाल–भारत बीच रहे परम्परागत सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंध, विकास निर्माण अभियान, भारतीय सहयोग आदि के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने ऐसा कहा है ।


अपने साढे ३ वर्षीय कार्यकाल को समीक्षा करते हुए डा. अजय कुमार ने यह भी कहा कि भूकंप के कारण क्षतिग्रस्त सर्वसाधारण जनता की ५० हजार घर निर्माण से लेकर वीरगंज–विराटनगर में निर्मित आईसीपी प्रोजेक्ट, अरुण–३ जलविद्युत आयोजना आदि क्षेत्र में हुए प्रगति विवरण ने नेपाल–भारत संबंध को और भी मजबूत किया है । उन्होंने कहा है कि नेपाल भूपरिवेष्ठित देश है, इसीलिए नेपाल को इसकी कठिनाई अनुभूति ना हो, इसमें हरसंभव सहयोग करने के लिए भारत तैयार है । उनका यह भी मानना है कि अरुण–३ जलविद्युत आयोजना नेपाल और भारत दोनों देशों के लिए वीन–वीन प्रोजेक्ट है, जिससे नेपाल भी विद्युत शक्ति में मजूबत हो सकती है ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए सत्तारुढ दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के नेता तथा पूर्व मन्त्री दिनानाथ शर्मा ने कहा कि भारत में स्थापित लोकतन्त्र और गणतन्त्र सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, विश्व के २२ प्रतिशत जनता की लोकतन्त्र है । २१वीं शताब्दी में समावेशी और समानुपातिक लोकतन्त्र की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए उन्होंने आगे कहा– ‘अब निषेध की राजनीति नहीं, सम्मान की राजनीति आवश्यक है, यही २१वीं शदी की लोकतन्त्र भी है । जिसको स्थापित करने के लिए भारत का महत्वपूर्ण योगदान है ।’ उनका यह भी मानना है कि भारतीय लोकतन्त्र से नेपाल भी बहुत कुछ सिख सकता है ।
कार्यक्रम के दूसरे अतिथि राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (संयुक्त) के अध्यक्ष पशुपति शमशेर राणा ने कहा कि जिस तरह भारत ने ७१ साल से लोकतन्त्र को संस्थागत किया है, उसीतरह की प्रणाली नेपाल में भी विकसित होना आवश्यक है । नेपाल–भारत खुला सीमा, साझा सामाजिक तथा सांस्कृतिक संबध आदि पर चर्चा करते हुए अध्यक्ष राणा ने कहा कि अयोध्या–जनकपुर और लुम्बिनी–बोधगया बीच का सम्बन्ध कभी भी टूटनेवाला नहीं है ।


समाजवादी पार्टी की नेतृ तथा पूर्व मन्त्री हिसिला यमी ने भी कहा है कि आज नेपाल में जो गणतन्त्र है, वह भारतीय गणतन्त्र का ही सिख है । उनका कहना है कि जिसतरह भारत में गणतन्त्र संस्थागत हुआ, उसी से नेपाल भी सिख रहा है । उन्होंने यह भी कहा कि भारत की तरह नेपाल भी विविधतापूर्ण देश है । इसीतरह संयुक्त राष्ट्रसंघ के लिए पूर्व नेपाली प्रतिनिधि प्रो. जयराज आचार्य ने कहा कि पड़ोसी देश भारत में राजनीतिक परिवर्तन होने के कारण ही उसका प्रभाव नेपाल पड़ा और नेपाल में भी परिवर्तन सम्भव रहा । उन्होंने कहा– ‘भारत में जो भी परिवर्तन हो, शैक्षिक हो या सामाजिक उसका प्रभाव नेपाल में भी पड़ता है ।’ उनका कहना है कि भारत में महात्मा गांधी जैसे राजनेता के प्रभाव से ही नेपाल में तुलसीमेयर श्रेष्ठ जैसे व्यक्तित्व का जन्म हुआ है । प्रो. आचार्य ने यह भी कहा है कि नेपाल आज भी शैक्षिक गुणस्तर की दृष्टिकोण से पीछे है, इसीलिए भारत को इसमें सहयोग करना जरुरी है । नेपाल की शैक्षिक गुणस्तर और विकास क्रम में भारतीय योगदान पर चर्चा करते उन्होंने ऐसा कहा है ।
इसीतरह ओशो ध्यान केन्द्र नेपाल के अध्यक्ष स्वामी आनन्द अरुण ने कहा कि भारत की लोकतन्त्र और गणतन्त्र सिर्फ भारत के लिए ही नहीं सम्पूर्ण दक्षिण एसियाई क्षेत्रों के लिए है । उनका मानना है कि भारतीय गणतन्त्र की समृद्धि ही दक्षिण एसियाई राष्ट्रों की समृद्धि है । उन्होंने कहा– ‘भारत की गणतन्त्र में ही दक्षिण एसिया की भविष्य अन्तरनिहित है ।’ युरोपीय देशों की एकता पर चर्चा करते हुए स्वामी आनन्द अरुण ने कहा कि अब दक्षिण एसियाई राष्ट्रों के बीच भी एकता आवश्यक है, जिसके लिए छुद्र मनस्थिति त्यागना होगा । स्वामी आनन्द अरुण ने ‘एसियन महादीप’ निर्माण के लिए अग्रसर हाने के लिए भी आग्रह किया ।


इसीतरह भारत के लिए पूर्व राजदूत प्रो. लोकराज बराल, सतीस मोर, लोकबहादुर थापा जैसे वक्ताओं ने भी भारत की ७१वें गणतन्त्र दिवस, नेपाल भारत संबंध आदि के बारे में अपना–अपना विचार प्रस्तुत करते हुए भारतीय जनता को शुभकामना व्यक्त किया । कार्यक्रम में नेपाल भारत मैत्री समाज के अध्यक्ष प्रेम लस्करी ने स्वागत मन्तव्य रखते हुए नेपाल–भारत संबंध को मजबूत बनाने के लिए मैत्री समाज की ओर से किए गए विभिन्न सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्य और विचार–विमर्श आदि के बारे में चर्चा किए । तस्वीरः राजनारायण यादव/हिमालिनी

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