Thu. Jul 16th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

बहू और बेटी

 

कन्हैयालाल ‘बरुण’
ए जी सुनती हो…!
लडÞका जवान हो गया है
नौकरी, व्यवसाय करता है
अब उसकी शादी कर दो
घर में एक नौकरानी चाहिए।
नौकर को हटा दो,
बहुत पगार माँगता है
कपडÞा मांगता है,
आँखे दिखाता है
कर दो छुट्टी
बहू को घर लाओ
मौज करो।
कपडÞे धोएगी, चूल्हा,
चौका उसी पर छोडो।
सुबह-सुबह ‘बेड टी’
भी मिलेगी।
रात में पाँव फैलाकर सोना
कुछ देर पांव भी दवा देगी।पंगु मानसिकता है यह
समाज के दिमाग में कूडÞा भरा है
समझते नहीं !
बहू भी बेटी होती है
वह तो सरस्वती है
दर्ुगा है, सीता है, शाकम्भरी है
बहू को बेटी बनाओ
उसे प्यार दो दुलार दो
वह र्सवस्व छोडÞकर
तेरे बगिया में आयी है।

उसे खुलकर चटखने दो,
सपनों की बगिया में उडÞने दो।
उसके हर मुस्कान पर
फूल बिखरा दो।

नारी को समझो,
उसे प्यार दो, दुलार दो
देखो बहू कैसे बेटी का
रूप रचती है।

व्यंग्यात्मक हाइकू
मुकुन्द आचार्य

१. आदमी
आदमी क्या है –
जैसे भी हो जीना है !
रोना मना है !२. जिन्दगी
सुबह हर्ुइ !
जिन्दगी छुइमर्ुइ !
लो शाम हर्ुइ !३. जवानी
शोख जवानी !
चन्दरोजा कहानी !
सैलाब-पानी !

४. राजनीति
कभी काटती !
कभी खूब चाटती !
ये राजनीति !

५. नेपाल की राजनीति
हम बडेÞ है !
हम भी तो अडÞे हैं !
सब सडेÞ हैं !

६.
मौसम जाडÞा !
राजनीति है गाढÞा !
सत्ता ही प्यारा !!

७. र्सवहारा
पाँच होटल !
दश फैक्ट्री टोटल !र्
र्सवहारा हैं !!

यादों के झरोखे से
चाह नहीं, मैं सुरवाला के
गहनों में गंूथा जाउं,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊं
चाह नहीं सम्राटो के शव
पर, हे हरि, डाला जाउ
चढूं भाग्य पर इठलाऊं
मुझे तोडÞलेना बनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढÞाने,
जिस पथ जाते वीर अनेक।
-माखनलाल चतर्ुर्वेदी

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *