चीन हर स्तर पर अपनी बढती ताकत का प्रदर्शन कर रहा, विश्व की नजर में चीन
चीन की दूसरे देशों से पंगा लेने की नीति के चलते भारत को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों का नैतिक समर्थन मिल रहा है। भारत लगातार अपने मित्र देशों के संपर्क में भी है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने खुलकर चीनी नीति की आलोचना की है। जबकि कई देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
भारत के पक्ष में वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक समर्थन चीन पर दबाव बढ़ाएगा। हालांकि जानकार मानते हैं कि वैश्विक स्तर पर समर्थन और दबाव से चीन अपनी नीति में कोई सुधार करेगा ये समझना गलत होगा। बल्कि चीन इसकी वजह से और भी आक्रामकता दिखाने की कोशिश कर सकता है। क्योंकि वह अपनी ताकत का संदेश देना चाहता है।
सूत्रों ने कहा, ये जरूर है कि हम विश्व स्तर पर मिल रहे समर्थन का उपयोग अपनी विश्वसनीयता के विस्तार में कर सकते हैं। भारत को अपने आधारभूत ढांचे के निर्माण में भी तेजी लाने का यही सही वक्त है। सूत्रों का कहना है कि चीन पर बहुत तरह का दबाव है, लेकिन वह भारत पर दबाव बनाकर अपनी समस्याओं से ध्यान बंटाना चाहता है। चीन एक साथ कई मोर्चे खोल रहा है। दक्षिण चीन सागर में गतिविधि को लेकर कई देश अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री पोंपियो ने चीन पर कई फ्रंट खोलने का स्पष्ट आरोप भी लगाया है।
सूत्रों का कहना है कि रूस जैसे देश पर्दे के पीछे से कोशिश कर रहे हैं कि भारत और चीन के बीच तनाव न बढ़े। अमेरिका भी इस समय युद्ध जैसी परिस्थितियों के पक्ष में नहीं है, लेकिन अमेरिका ये भी नहीं चाहता कि चीन की आक्रामकता बढ़े। उधर, भारत का रुख इस वक्त रक्षात्मक नहीं है। भारत अपनी ओर से आक्रामकता नही करने की अपनी नीति पर कायम है। लेकिन आत्मरक्षा और संप्रभुता के नाम पर भारत की कूटनीतिक भाषा भी आक्रामक है। इसे चीन के लिए स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों ने कहा, चीन भारत को स्थिति का गलत आकलन न करने की सलाह दे रहा है लेकिन सही मायने में ये सलाह उसपर लागू होती है।

