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क्या रंग लायेगी नेपाली विदेश मंत्री की भारत यात्रा..?….रुचि सिंह 

 
Interview with Foreign Minister Pradeep Gyawali at Pulchwok, lalitpur on Saturday, February 23, 2019. POST PHOTO: KESHAV THAPA

रुचि सिंह, दिल्ली | काबिलेगौर हैं कि नेपाली विदेश मंत्री की भारत यात्रा पर नेपाल के राजनितिज्ञों के अलावा नेपाली जनता की निगाहें टिकी हुई हैं। उन्हें पूरा विश्वास हैकि नेपाल भारत के बीच जो तल्खी का माहौल बन गया था। उसे दूर करने का समय आ गया है। हिमालचुली घाटी में नेपाली प्रतिनिधि सभा विघटन के पश्चात नेपाल की राजनीतिक रडार पर हाय तौबा का सायरन बज रहा.है । उससे वहां कि सियासी सत्ता में संकट के बादल मंडरा रहे है लेकिन उसे भी दरकिनार करने के लिए नये कदम उठाने होगे।

भारत नेपाल संबधो में जो प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की अपनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर कैकेयी. हठ को बरकरार रखने की एवज में ही संसद को विघटन कर बैठे है ? हालांकि ये नेपाल की अपनी राजनीतिक मामला है ? नेपाली प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली बखूबी इसका हल निकाल लेगे. क्योंकि उन्हें पता है कि अपनी जादू की छड़ी का रूख कब और कैसे कहां करना है। बरहालऐसे माहौल में विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली भारत नेपाल संयुक्त आयोग की छठी बैठक में सिरकत हेतु भारत आ रहे है। नेपाली सियासत में रस्साकशी के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री की यह यात्रा नेपाल भारत संबंधों की मजबूत कड़ी को दर्शाता है कि सदियों से चले आ रहे आपसी रिश्ते धार्मिक सांस्कृतिक भोगौलिक भाषा रोटी बेटी आध्यात्मिक संबंधों की डोर कोई भी पैनी से पैनी धार काट नहीं सकती है। एवं किसी के भी बरगलाने से संबंधों में कुछ पल के लिए तल्खी हो सकती है लेकिन सदैव के लिए ऐसा होना नामुमकिनहै ? बरहाल पडो़सी राष्ट्र भारत शुरू से ही नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और खडा रहेगा. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समय-समय पर कहां है कि भारत का  नेपाल के साथ संबध बहुत खास है। दोनों के बीच न सिर्फ मजबूत संबंध. है बल्कि प्रगाढ़ और प्राचीन संबंध. है।

विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली के भारत आने से पहले नेपाली प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली ने अपने बयान में कहा कि भारत के साथ विदेश मंत्री सीमा विवाद एवं अन्य मुद्दों पर बात करेगे। नेपाल और भारत के संबंध अटूट. है। गौरतलब.है कि 2015से जिस तरह.से डै्गन की कम्युनिस्ट सरकार नेपाल की राजनीति सियासत में अपने खेल को अंजाम दे रही थी। नेपाल में स्थित चीनी राजदूत होउयान्गी नेपाली राजनेताओं के घर घर जाकर ओली के लिए समर्थन जुटाने के अलावा निर्देश तक दे रही थी। दरअसल ह़ोउन्यागी भारत नेपाल रिश्तों में खटास पैदा कर रही थी। अब वह बादल छट गए है ? लिहाजा सवाल यह पैदा होता है कि विगत की नेपाली सरकार ने इन मुद्दों पर अपने कदम क्यों नहीं बढा़ये? नेपाली प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली ने काला पानी लिपुलेक लिम्पियाधुरा को भारत सरकार द्वारा जम्मूकश्मीर का नये नक्शे में काला पानी लिम्याधुरा को अपनी ओर दिखाने पर बहस का मुद्दा बनने लगा था। इस पर दोनों देश आपसी बातचीत से इस.समस्या का समाधान खोज सकते है ? नेपाल के हिस्से में सीमा की लंबी रेखा 395कि.मी.रास्ते को विपक्षी पार्टी कांग्रेस से सर्मथन लेकर 204 वर्ष के बाद यह खेल खेला गयाकि कालापानी नेपाल में है ? पेंच यहां जाकर फंसता है कि आखिर पूर्व उप प्रधानमंत्री उपेंद्र यादव ने नेपाल की संसद में कहा था कि काला पानी का कुछ भाग भारत की तरफ है। नेपाली काग्रेंस पार्टी के सहमति से राष्ट्रवाद का मुद्दा बना कर प्रधानमंत्री ओली ने नया नक्शा नेपाली संविधान सभा से पास करवा लिया था। दरअसल पिथौरागढ़ के पास लिपुलेक में भारत चीन सीमाओं का विभाजन होता.है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी इसी रास्ते से होती है।भारत चीन व्यापार भी इसी रास्ते से होता है।

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भारत कुछ साथ लद्दाख में ताना तनी के बीच चीन ने भारत की एक ओर झंडे दिखा कर भारत को चुनौती दे डाली थी। अपने मास्टर माइंड गेमको चलते हुए डै्गन ने खेल खेलते हुए नेपाल को भ्रमित करना शुरू किया। हांलाकि राजनीति में कोई सगा नहीं. होता है। काबिले गौर है कि नेपाली राजनितिज्ञों ने पडो़सी राष्ट्र भारत के साथ मनमुटाव को खत्म करने के लिए भारत नेपाल संयुक्त आयोग कीबैठक को तब्बजू देना शुरू किया अतः भारत के विदेश मंत्री 2019 में संयुक्त आयोग की बैठक में भाग लेने नेपाल गये थे।आपसी रिश्तों को प्राथमिकता देते हुए नेपाली प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली ने 15अगस्त की बधाई देते हुए भारत को अस्थायी सुरझा परिषद में सदस्य बनने पर बधाई तक दी थी। नेपाल भारत के रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने की शुरुआत हो गई थी। दोनों देशों के उच्च स्तरीय अधिकारियों ने आर्थिक एजेंडे हाइड्रो सोलर सेक्टर के लिए बाजार तक अपनी बनानी है।ग्रिड इंटरकनेक्ट नेपाली सर प्लस पांवर के लिए मार्केट एक्सेस में भारतीय निवेश भी शामिल. है। व्यापार सीमा पार आना जाने के संधियों वाणिज्य संबंधो को कैसे बढा़वा दिया जाए ।अनाधिकृत व्यापार को नियंत्रित करने के लिए व्यापार परागमन सहयोग । रेल सेवा समझौते में संशोधन व्यपार संधि निवेश प्रोत्साहन के लिए संयुक्त व्यापार का गठन भी किया गया है। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृगंला राँ चीफ सेना प्रमुख की नेपाल यात्रा से दोनों देशों के संबंधो में सकारात्मक प्रभाव हुआ है । नेपाली प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली ने कहा है कि उनके विदेश मंत्री ज्ञवाली नेपाल भारत सीमा विवाद के मुद्दों को उठायेगे कि कैसे इस समस्या का समाधान हो। दोबारा समय दोनों देशों को सोचने कि आवश्यकता है? 1962 में भारत चीन लड़ाई के समय नेपाल ने अस्थायी चौकी बनाने के लिए काला पानी पर जगह दी थी। इस पर भी बात होनी चाहिए ऐसा मानना नेपाली प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओलीका है?साथ ही नेपाल सरकार को पूरा भरोसाहैकि कोरोना महामारी के दौरान भारत ने पाल की कोरोना वैक्सीकी 12मिलियन की मांगको जरूर पूरी करेगें।पहले भी भारत ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए 23टन दवाई भी सौंपी थी।

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कोरोना वैक्सीन के लिए नेपाली राजदूत ने वैक्सीन बनाने वाली कंपनी से भी मिले है.उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत के साथ सहमति अवश्य बन जायेगी। स्वास्थ्य झेत्र में भी नयी दिल्ली और काडमांडू के बीच मसौदा तैयार किया जा रहा है। काबिलेगौर है कि डै्गन ने नेपाल को कोरोना वैक्सीन देने की अपनी मंशा जाहिर की थी।नेपाल सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर पड़ोसी मित्र राष्ट्र भारत को संदेश दे डाला। बरहाल नेपाल भारत संबंधों में सर्द हवा में नयी धूप खिलेगी। अब.वक्त आ गया है कि भारत नेपाल के राजनेताओं को सोचने का कि सार्क बिरादरी के नन्हें देश नेपाल को दोनों मित्र अंकमाल कर अन्य पडो़सी राष्ट्र को संदेश दे कि भारत नेपाल संबंध अटूट और अटल है जो श्रद्धा विश्वास रोटी बेटी धार्मिक सांस्कृतिक भौगोलिक की ऐसी स्नेह प्रेम की बेल से लिपटे है जिन्हें अलग करना मुश्किल है। अब गेंद भारत के पाले में हैकि उसे कैसे खेले ? साउथ ब्लॉग को फिर भी अपनी नजर पैनी रखनी होगी। भारत नेपाल दोस्ती में सेंध लगाने वालों की कमी नहीं क्योंकि नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली भारत के साथ समानता के साथ संबंध रखने में विश्वास रखना चाहते है ? विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली भारत से जाते वक्त अपनी झोली में भारत से क्या क्या सौगात लेकर जाते है? नेपाल भारत सबंधो को अब नयी दिशा देनी ही होगी वर्ना नित नये दवाब से नेपाल और भारत की आवाम पिसती रहेगीं। रोटी बेटी का संबंध भी आहिस्ता आहिस्ता ढलान पर है। शतरंज की बिसात बिछ चुकी है ? भारत और नेपाल अपनी अपनी गोट का.इस्तेमाल कैसे करते है यह तो वक्त ही बतलायेगा। इतिहास ज्ञाता नेपाली प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली भी यदि विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली के प्रस्तूतीकरण से संतुष्ट होते है तो उनकी निकट भविष्य में भारत यात्रा की पूरी पूरी संभावना है?…रूचि सिंह वरिष्ठ पत्रकार

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रुचि सिंह ………..वरिष्ठ पत्रकार

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