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अक्षय नवमी का व्रत आज

 
अक्षय नवमी का व्रत

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को अक्षय नवमी या आंवला नवमी कहते हैं। इस दिन स्नान, पूजन, अन्न दान करने से सभी मनोकामना पूरी होती है। अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष के साथ श्री हरि विष्णु का पूजा करने का विधान है।

आंवला नवमी के दिन सुबह स्नान कर दाहिने हाथ में जल, चावल, फूल आदि लेकर निम्न प्रकार से व्रत का संकल्प करें-

अद्येत्यादि अमुकगोत्रोमुक (अपना गोत्र बोलें) ममाखिलपापक्षयपूर्वकधर्मार्थकाममोक्षसिद्धिद्वारा श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं धात्रीमूले विष्णुपूजनं धात्री पूजनं च करिष्ये।

ऐसा संकल्प कर आंवले के वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा की ओर मुख करके ॐ धात्र्यै नम:।। श्री विष्णवे नमः।। मंत्र से आवाहनादि षोडशोपचार पूजन करके निम्नलिखित मंत्रों से आंवले के वृक्ष की जड़ में दूध की धारा गिराते हुए पितरों का तर्पण करें। इसके बाद आंवले के वृक्ष के तने में निम्न मंत्र से सूत्र वेष्टन करें।इसके बाद कर्पूर या शुद्ध घी के दिए से आंवले के वृक्ष की आरती करें तथा निम्न मंत्र से उसकी प्रदक्षिणा करें ।
*आंवले पर जल या दुग्ध दान मंत्र*
पिता पितामहाश्चान्ये अपुत्रा ये च गोत्रिण:।

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ते पिबन्तु मया दत्तं धात्रीमूलेक्षयं पय:।।

आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं देवर्षिपितृमानवा:।

ते पिवन्तु मया दत्तं धात्रीमूलेक्षयं पय:।।

दामोदरनिवासायै धात्र्यै देव्यै नमो नम:।

सूत्रेणानेन बध्नामि धात्रि देवि नमोस्तु ते।।

यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।

तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे।।

इसके बाद आंवले के वृक्ष के नीचे ही ब्राह्मणों को दान देकर भोजन भी कराना चाहिए और अंत में स्वयं सपरिवार भी आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करना चाहिए। भोजन से पहले एक पका हुआ कुम्हड़ा (कद्दू) लेकर उसके अंदर रत्न, सोना, चांदी या रुपए आदि रखकर गुप्त दान करें।

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ममाखिलपापक्षयपूर्वक सुख सौभाग्यादीनामुक्तरोत्तराभिवृद्धये कूष्माण्डदानमहं करिष्ये।

कूष्णाण्डं बहुबीजाढयं ब्रह्णा निर्मितं पुरा।

दास्यामि विष्णवे तुभ्यं पितृणां तारणाय च।।

पितरों के शीत निवारण के लिए यथाशक्ति अन्न, वस्त्र, कंबल आदि ऊनी कपड़े भी योग्य ब्राह्मण को देना चाहिए। घर में आंवले का वृक्ष न हो तो किसी बगीचे आदि में आंवले के वृक्ष के समीप जाकर पूजा, दानादि करने की भी परंपरा है । गमले में आंवले का पौधा लगा कर घर में यह कार्य संपन्न कर लेना चाहिए।
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*हरि ॐ गुरुदेव..!*
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