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देखो अप्रतिम सौंदर्य छाया है, मनभावन सावन आया है : रुपा झा

 

मनभावन सावन


श्यामल मेघ संदेश दे गई
दामिनी की चमक छा गई
काले काले घूंघट ओढ़े
बूंदों ने ली  अंगड़ाई है
घटा घनघोर बादल छाया है
मनभावन सावन आया है।

हर्षित हो जाता है यह मन
बारिश की पड़ी फुहारों से
सराबोर हो जाती प्रकृति
आलिंगन कर वसुधा को
देखो, अप्रतिम सौंदर्य छाया है
मनभावन सावन आया है।

फूलों की हर डालियों पर
पड़ी उमंगों की झूले
सावन की हरियाली देख आज
प्रियतम संग प्रीत रस घोले
दिल में अजब कसक सी जागे
देखो मन कैसे इठलाया है
मनभावन सावन आया है।

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कोयल गाए मधुर तान से
पिया मिलन की आस जगे
खिलने लगे कुसुम प्रीत के
नैनो में मीठे रस घोले
हरी-हरी चुनर ओढ
ये जहान मुसकाया  है
मनभावन सावन आया है।

तेज हवा की चाल देख
प्रफुल्लित हुवा अंतःकरण
निर्मल बूंदे तन को छूकर
मधुर अहसास जगाता है
काले काले बादल देख
मन मोर सबका हरसाया है
मनभावन सावन आया है।

रूपा झा
विराटनगर,नेपाल

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