Wed. Jul 8th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

डा. राउत को मधेश का स्वाभिमान प्यारा है न कि तथाकथित स्वतंत्रता

 

rautश्वेता दीप्ति, १४ अक्टूबर , काठमाणडू । आज जब खबर आई कि डा. सि के राउत को जमानत की रकम जमा करने के पश्चात् रिहा करने का आदेश हुआ है तो मन में यह सवाल आया कि अब क्या होगा किन्तु कुछ क्षण पश्चात् ही  ज्ञात हुआ कि डा. राउत ने इस शर्त पर रिहा होने से इन्कार कर दिया है । डा. राउत के इस कदम से एक ऐसे पक्ष को करारा जवाब तो जरूर मिला जो बार बार उनके बयान पर यह कहकर सवाल उठा रहे थे कि वो अपने बचाव हेतु स्वयं के उठाए गए मुद्दे से पीछे हट रहे हैं । किन्तु डा. राउत के इस कदम पर अब एक और सवाल ऐसे ही पक्ष के द्वारा उठाया जा रहा है कि उन्हें बाहर खतरा है इसलिए वो बाहर आना नहीं चाह रहे हैं और जनता उनके साथ नहीं है । एक कहावत है खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे शायद इसलिए भ्रामक अपवाहों को फैलाकर एक पक्ष अपने आपको संतुष्ट करने में लगा है । खैर, यह तो तय है कि सरकार द्वारा उठाए गए गैरन्यायिक कदम से डा. राउत को जो ख्याति मिली है वह सरकार की मनःस्थिति को विचलित करने के लिए काफी है । और अब तो सक्षम मीडिया वाले भी अपनी शंकास्पद भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं । किन्तु साँच को आँच कैसा ? आज न कल यथार्थ सबके सामने आना ही है । डा. राउत ने जमानत की रकम जमा न करके यह साबित कर दिया है कि उन्हें मधेश का स्वाभिमान प्यारा है न कि अपनी तथाकथित स्वतंत्रता । मधेश के साथ सत्ता की जो विभेदपूर्ण नीति है जिसका ताजा उदाहरण बारा की निर्मम घटना है इससे सभी परिचित हैं और जब डा. राउत की रिहाई बिना शर्त मांगी जा रही है तो ऐसे में जमानत देकर रिहा होना तो अपने आपको दोषी साबित करना है । जो हो पर इस एक कदम ने मधेश को गौरवान्वित किया है । साधुवाद है डा. राउत को ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *