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मिथिला माध्यमिकी परिक्रमा आज जनकपुरधाम लौटेगी

 
मिथिला का पंद्रह दिवसीय परिक्रमा

29 फाल्गुन, जनकपुरधाम – मधेश का महाकुंभ माने जाने वाली 15 दिवसीय मिथिला माध्यमिकी परिक्रमा आज जनकपुरधाम लौट रही है।

परिक्रमा के यात्री 14वें दिन कल भारत के बिहार स्थित विसौल में विश्राम करने के बाद आज 15वें दिन जनकपुरधाम पहुंचने वाले हैं। जनकपुरधाम में प्रवेश करने के बाद श्रद्धालु ऐतिहासिक बारहबिघा रंगभूमि मैदान, तिरहुतिया गाछी और अन्य स्थानों पर विश्राम करेंगे।

परिक्रमा यात्रा का प्रारंभ और मार्ग

यह परिक्रमा 15 फाल्गुन को धनुषा जिले के मिथिला नगरपालिका-8, कचुरी स्थित मिथिला बिहारी मंदिर से शुरू हुई थी। जनकपुर में किशोरीजी की डोला सम्मिलित होने के बाद इसे विधिवत रूप से प्रारंभ किया गया।

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फागु पूर्णिमा (होली) के अवसर पर आज जनकपुर लौटने के बाद तीर्थयात्री कल अंतरगृह परिक्रमा करेंगे, जिसे पंचकोशी परिक्रमा भी कहा जाता है। इस परिक्रमा में वे भक्तजन भी शामिल होते हैं जो पूरी माध्यमिकी परिक्रमा में भाग नहीं ले सके थे। इस आयोजन में लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

133 किलोमीटर की यात्रा

15 दिवसीय इस यात्रा के दौरान तीर्थयात्री धनुषा के हनुमाननगर, बिहार के कलना (कल्याणेश्वर), फुलहर (गिरिजास्थान), महोत्तरी के मठिहानी, जलेश्वर, मडैई, ध्रुवकुंड, कंचनवन, धनुषा के पर्वता, धनुषाधाम, सतोखर, औरही और फिर भारत के करुणा, विसौल होते हुए जनकपुरधाम तक 133 किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हैं।

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धार्मिक मान्यता और श्रद्धालुओं की आस्था

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मिथिला बिहारी और किशोरीजी की डोला के साथ परिक्रमा करने से भक्तजन रोग, दुख-कष्ट और समस्याओं से मुक्ति पाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकते हैं। इसी विश्वास के कारण नेपाल के धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, सिरहा, सप्तरी और भारत के बिहार—सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा आदि क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु और संत इस परिक्रमा में भाग लेते हैं।

यात्रा के दौरान श्रद्धालु खान-पान की सामग्री और आवश्यक वस्तुएं साथ लाते हैं। परंपरागत बाजे-गाजे, झांकी, कीर्तन और पारंपरिक परिधानों में विशेष रूप से अधिक उम्र के पुरुष और महिलाएं इस यात्रा में सम्मिलित होते हैं।

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होली के उल्लास में परिणति

शुक्रवार को परिक्रमा पूर्ण होने के साथ ही शनिवार को पूरे मिथिलांचल में होली पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा

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