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बसाई-सराई का डरावना आँकड़े, पहाड़ छोड़ने वाले ज्यादा

 
कार्यालय के उपप्रमुख एवं प्रवक्ता ढुंडरीराज लामिछाने

काठमांडू, 25 मार्च । देश में बसाईसराई (आंतरिक प्रवासन) की प्रवृत्ति जारी रहने पर पुश्तैनी घर-बार छोड़कर जाने वालों की बढ़ती संख्या के कारण वृद्धजन ही अपने मूल स्थानों पर रह जाएंगे। यह तथ्य राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा मंगलवार को प्रकाशित “नेपाल में आंतरिक बसाईसराई” रिपोर्ट में सामने आया है।

राष्ट्रिय जनगणना २०७८ के अनुसार, नेपाल में कुल आंतरिक प्रवासन दर 29.2 प्रतिशत है। कार्यालय के उपप्रमुख एवं प्रवक्ता ढुंडरीराज लामिछाने के अनुसार, सबसे अधिक स्थायी आंतरिक प्रवासन पहाड़ी क्षेत्रों में हुआ है। पिछले 10 वर्षों में पहाड़ से 32 प्रतिशत लोग पलायन कर चुके हैं, वहीं तराई से 28.9 प्रतिशत लोग अन्यत्र बस गए हैं। हिमाली क्षेत्र से 13.8 प्रतिशत आबादी ने पलायन किया है।

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बसाईसराई के कारणों में:

  • 25.9 प्रतिशत लोग किसी पर निर्भरता के कारण गए,
  • 24.9 प्रतिशत ने विवाह के कारण स्थान बदला,
  • 19 प्रतिशत रोजगार के अवसरों की तलाश में गए।

हालांकि, नेपाल में कामकाजी आयु वर्ग (15-64 वर्ष) की जनसंख्या 65.2 प्रतिशत है, जबकि 15 वर्ष से कम आयु के लोग 27.8 प्रतिशत और 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग 6.9 प्रतिशत हैं।

लामिछाने ने बताया कि तराई क्षेत्र में अन्य क्षेत्रों की तुलना में जनसंख्या वृद्धि दर अधिक है, जो भविष्य में बोझ बन सकती है। वहीं, नेपाल की प्रजनन दर में लगातार गिरावट देखी जा रही है।

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राष्ट्रिय सांख्यिकी कार्यालय ने मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रिय जनगणना २०७८ से संबंधित पाँच विषयगत रिपोर्ट सार्वजनिक की। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों की सकल जन्म दर 15.7 और शहरी क्षेत्रों की 13.6 दर्ज की गई है।

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