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नेपाल न तो किसी की ओर झुकेगा, न किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होगा : प्रधानमंत्री ओली

 

काठमांडू, मंगलवार, २६ चैत २०७८ । काठमांडू में आयोजित “हिमालयन डायलॉग” कार्यक्रम में सोमवार को बोलते हुए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि नेपाल किसी भी पड़ोसी देश की ओर झुकाव नहीं दिखाएगा और न ही वह किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल की विदेश नीति आपसी लाभ और अंतरराष्ट्रीय न्याय के आधार पर संचालित होगी।

प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि भूराजनीतिक चेतना के साथ राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा, “भूराजनीति के नाम पर अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही और न्यायसंगत राष्ट्रीय विचार को छोड़ना जरूरी नहीं है। किसी पड़ोसी से अत्यधिक मित्रता कर एकतरफा झुकाव नहीं होना चाहिए। हम किसी के सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे, हम शांति के पक्षधर हैं।”

उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा, “जब कोई पूछे कि कहीं पेकिंग (बीजिंग) की ओर झुक गए हो? तो हमें कहना चाहिए – मैं तो काठमांडू में हूँ। और जब पूछा जाए कि कहीं नई दिल्ली की ओर तो नहीं झुके हो? तो भी यही कहना चाहिए – नहीं, मैं तो काठमांडू में ही हूँ।”

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इस कार्यक्रम का आयोजन “फॉरेन अफेयर्स मीडिया” और “ब्रांडवर्थ प्रा.लि.” द्वारा किया गया था।

प्रधानमंत्री ने नेपाल की भूराजनीतिक स्थिति को समुद्र के किनारे जैसा बताया। उन्होंने कहा, “समुद्र का किनारा कहां है, इसे पहचानना मुश्किल होता है। आज नेपाल की भूराजनीतिक स्थिति भी वैसी ही हो गई है। समय-समय पर जैसे समुद्र की लहरें किनारे से टकराती हैं, वैसे ही नेपाल की स्थिति पर भी भूराजनीतिक तरंगें असर डालती हैं।”

उन्होंने कहा कि नेपाल को अपने पड़ोसियों की उचित चिंताओं और सरोकारों का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन यह भी आवश्यक है कि सभी संबंध न्यायसंगत और सम्मानजनक हों।

विदेश नीति पर दलों की एकता का आह्वान

इस अवसर पर विभिन्न प्रमुख दलों के नेताओं ने भी विदेश नीति पर अपने विचार रखे और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि मानते हुए दलगत मतभेद से ऊपर उठने का आग्रह किया।

एमाले महासचिव शंकर पोखरेल ने कहा कि सरकार देश की विदेश नीति में सभी दलों को एकजुट करने के प्रयास में सकारात्मक है। उन्होंने कहा, “विदेश नीति में एकता संभव है, और इसका मुख्य आधार राष्ट्रीय हित होना चाहिए।”

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कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रकाशशरण महत ने कहा कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि देश का राष्ट्रीय स्वार्थ क्या है। उन्होंने कहा, “हमें पहले यह पहचानना होगा कि हमारा राष्ट्रीय हित क्या है, तभी हम विदेश नीति में एकरूपता ला सकते हैं। यह नीतियां किसी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के आधार पर तय होनी चाहिए।”

माओवादी केन्द्र के महासचिव देव गुरूंग ने कहा कि नेपाल को ‘ग्लोबल साउथ’ की अवधारणा को अपनाकर अपनी विदेश नीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा, “राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन राज्यों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध होने चाहिए, इसमें कोई समस्या नहीं है।”

राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी के प्रमुख सचेतक सन्तोष परियार ने कहा कि उनकी पार्टी विदेश नीति में राष्ट्रीय एकता के पक्ष में है। उन्होंने कहा, “हमारी विचारधारा जो भी हो, हम विदेश नीति में एकजुट होने को तैयार हैं। हमें श्रम बाजार, उत्पादन, व्यापार और देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए विदेश नीति बनानी चाहिए। हमें यह भी बहस करनी चाहिए कि भारत और चीन के लिए नेपाल क्यों महत्वपूर्ण है और वैश्विक मंच पर नेपाल की भूमिका क्या हो सकती है?”

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पूर्व विदेश सचिव मधुरमण आचार्य ने सुझाव दिया कि नेपाल को फायदे के लिए ‘मल्टी-इंगेजमेंट मॉडल’ अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को सीमित देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल को भूराजनीति से डरने के बजाय, अपनी इच्छानुसार स्वतंत्र विदेश नीति तय करनी चाहिए।

कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया गया कि नेपाल को संतुलित, स्वतंत्र और न्यायसंगत विदेश नीति अपनाते हुए, सभी राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय हित में एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। प्रधानमंत्री ओली और अन्य नेताओं ने देश की भूराजनीतिक संवेदनशीलता को समझते हुए, विदेश नीति में सतर्कता और समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

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