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विध्वंसकारी भूकम्पः नेपाल का सच्चा मित्र भारत

 
Ramashis
रामाशीष

२५ अप्रैल २०१५, तद्नुसार विक्रम संवत्, शनिवार १२ वैशाख २०७२ के दिन, नेपाली समय के अनुसार ठीक ११ बजकर ५६ मिनट पर, आए महाभूकम्प के विध्वंसकारी झटके ने न केवल नेपाल के अति प्राचीन मठ–मंदिरों, ऐतिहासिक राजदरबारों, धरहरा स्तंभ, ऐतिहासिक राजमहलों सहित हजारो मकानों को धूल–धूसरित कर दिया, बल्कि १० हजार से अधिक बाल–बालिकाओं, युवा–युवतियों एवं वृद्ध–वृद्धाओं की भी जानें ले ली । मलवे में दबे हुए हजारो लाशों को निकालने में लगे हंै, नेपाली और भारतीय सेना के अतिरिक्त लगभग तीन दर्जन देशों से बचाव कार्य के लिए आए, सैकड़ो जवान एवं विशेषज्ञ ।
३ मई २०१५ तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मृतकों की संख्या ७ हजार २७६ तक पहुंच चुकी हैं जबकि घायलों की संख्या१४ हजार २७६ बतायी जा रही है । नेपाल के प्रधान सेनापति गौरव शमशेर जबरा  के अनुसार मृतकों की संख्या १० हजार से उपर जा सकती है । नेपाल के कुल ७५ जिलों में से ११ जिले इस महाभूकम्प से प्रभावित हैं जबकि सर्वाधिक जन–धन की क्षति पहाड़ी क्षेत्र सिन्धुपालचौक जिले में हुई है जहां मलवे में दबे शवों की खोज अभी भी जारी है । For Ramashis 2 For Ramashis 3 For Ramashis 4 For Ramashis 5 For Ramashis 6 For Ramashis 1
नेपाल तथा अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया में प्रसारित, प्रकाशित तथा टी.वी. आदि संचार माध्यमों से यह तथ्य सामने आ चुका है कि ‘नेपाल का सच्चा पड़ोसी’ भारत ही वह पहला देश है जिसने सबसे पहले नेपाल के प्रधानमंत्री को सूचित किया कि ‘नेपाल में महाविध्वंसकारी भूकम्प हुआ है । भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सामाजिक संजाल में किए गए ट्वीट से नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला को भूकम्प की जानकारी मिली । मीडिया में यह तथ्य भी सामने आ चुका है कि भूकम्प पीडि़तों की जान बचाने तथा अविलम्ब राहत–बचाव कार्यक्रम संचालन करने पर विचार करने के लिए भारत के केन्द्रीय मंत्रिपरिषद् की बैठक एक घंटे के अन्दर ही बुलायी गई जबकि नेपाल के मंत्रिपरिषद् की बैठक भूकम्प आने के सात घंटे के बाद हुई ।
इसी प्रकार भारत ही वह पहला देश है जिसने अपने वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों के द्वारा राहत एवं बचाव कार्यक्रम युद्धस्तर पर प्रारंभ किया । और, भारतीय राजदूतावास ने तो अपने रूटिन कार्याें को स्थगित कर सभी अफसरों एवं कर्मचारियों को भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में उतार दिया ।
इन पंक्तियों के लेखक ने अपने चार दशक से अधिक के काठमांडू–कार्यकाल में पहली बार देखा कि ‘भारतीय सेना के विमानों और हेलिकॉप्टरों को काठमांडू की आकाश में देखते’ ही, राजधानी की फुटपाथों पर प्लास्टिक के फटे–पुराने तिरपालों में सिर छुपाए बैठे, डरे–सहमे लोगों की मुंह से सहसा एक वाक्य निकल पड़ता था – ‘मोदी आयो’ । उस विकट घड़ी में भी सामान्य नागरिक भारत की पहल की प्रशंसा करते दिखे और यह कहते हुए पाए गए ‘आखिर निकट पड़ोसी भारत ने अपने को नेपाल का सच्चा मित्र साबित कर दिया । भारत के ५०० मिलीट्री डॉक्टर – इंजीनियर सहित, भारतीय सेना के लगभग १००० हजार आपदा विशेषज्ञ और जवान, राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं । राजधानी में भारतीय सेना के तीन फील्ड हॉस्पीटल भी कार्यरत है जहां बड़े से बड़े ऑपरेशन करने की भी व्यवस्था है । यहां तक कि भूकम्प मुख्य केन्द्र गोरखा जिले के बारपाक गांव में भारतीय मेडिकल टीम कार्यरत है जहां सबसे अधिक जन–धन की क्षति हुई है ।
यही नहीं भारत के कई प्रान्तों से भी भारी संख्या में राहत सामग्री काठमांडू पहुंच चुकी हैं और उन्हें भूकम्प पीडि़तों तक पहुंचाया जा रहा है । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक लाख तिरपाल भेजा है जबकि पंजाब के अमृतसर के शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी, दिल्ली के गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित दर्जनों स्वयंसेवी संघ संस्थाओं की ओर से भी राहत सामग्री तथा लंगर(भोजन) का कार्यक्रम चलाया जा रहा है । विस्थापितों को तिरपाल, कम्बल, अनाज आदि वितरित किए जा रहे हैं । पंजाब सरकार के राजस्व सचिव दिलजान सिंह और पुलिस उच्चाधिकारी नौनिहाल सिंह के नेतृत्व में २६ सदस्यों की एक टोली भी पहुंची हुई है जो नेपाल के गुरूद्वारा के साथ मिलकर हरसिद्धि, धादिंग, सिन्धुपालचैक आदि स्थानों पर लंगर चला रही है । लगभग ३००० विस्थापितों को भोजन रोज भोजन कराया जा रहा है जबकि उन्हें तिरपाल, कम्बल, दबाएं, पाउडर दूध आदि भी दिए गए हैं । आइ ए एस अफसर दिलजान सिंह ने कहा जबतक नेपाल की सरकार उन्हें अनुमति देगी, तभी तक वे लोग भोजन तथा राहत के अन्य कार्यक्रम चलाएंगे । उन्होंने बताया भारतीय सेना के कार्गाे विमान में चार ट्रक राहत सामग्री को सीधे चंडीगढ़ से काठमांडू लाया गया जबकि दो ट्रक सामग्री सड़क मार्ग से काठमांडू पहुंची है । इस टीम में दो डॉक्टरों सहित अच्छी खासी चिकित्सा टीम भी शामिल है ।
इसी बीच भारतीय सहयोग एवं तत्परता की प्रशंसा से तिलमिलाए चीन, पाकिस्तान तथा राजधानी के अन्य पेशेवर भारत विरोधी तत्वों द्वारा बहुत ही बड़े पैमाने पर निराधार खबरों को ऑन लाईन तथा फेसबुक में डालकर, भ्रम फैलाया जा रहा है । जबकि, आम जनता पर इसका कोई असर नहीं दिखता । भारत विरोधी घृणा अभियान को ध्यान में रखते हुए भारतीय राजदूत रणजीत राय ने कहा –
‘‘विनाशकारी भूकम्प के समय भारत ने अन्य कुछ सोचे बिना, एक सीमा में रहते हुए केवल सीधा सहयोगी हाथ बढ़ाया है । ऐसी अवस्था में एक पड़ोसी दूसरे का हर संभव सहयोग किया करता है । इसमें शंका करना उचित नहीं होगा । यह तो हमारे कामों से देखने की बात है ।
नेपाली सेना के साथ सहकार्य में हमलोगों ने काफी काम किया है । हम बचाव कार्य में लगे हुए हैं । भारत से उच्च स्तर की सफल टोलियां भी आयी हुई हैं । भारत तत्काल उद्धार, रहने की व्यवस्था और भोजन सामग्री उपलब्ध कराने से लेकर घायलों के उपचार में लगा हुआ है । बचाव कार्य में एक हजार से अधिक भारतीय जनशक्तियां लगी हुई है । यहां राजदूतावास में रह रहे लोग भी सक्रिय रूप में उद्धार कार्य में लगे हुए हैं ।
उन्होंनें कहा हम चौबीसो घंटा बचाव और राहत में लगे हुए हैं । हमलोग कौन भारतीय तथा कौन नेपाली का अन्तर किए बिना ही सहयोग कर रहे हैं । भारत की केन्द्र सरकार ही नहीं, अपितु प्रान्तीय सरकारें भी सहयोग कर रही हैं । आज ही पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी ने एक लाख तिरपाल भेजा है जो कांकड़भिट्ठा नाका के रास्ते नेपाल आ रहा है ।
इसमें नेपाल सरकार की तत्परता भी उतनी ही है । सरकार अपनी ओर से हर संभव उपाय कर रही है । इसी प्रकार नेपाली सेना की जितनी भी प्रशंसा करें, कम होगी । सरकार द्वारा, आए हुए सामानों का कस्टम क्लीयर कराने तथा व्यवस्थापन में दिखायी जा रही तत्परता प्रशंसनीय है । जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, वैसी घटना घटने के बाद, समाधान में असमंजस होना स्वाभाविक है । इसे आलोचना का पात्र नहीं बनाया जाना चाहिए ।
इस समय काठमांडू में भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (नॉर्थ) अभय ठाकुर के नेतृत्व में व्यवस्थापन का कार्य किया जा रहा है । दूतावास वैसे ही सक्रिय रूप में लगा हुआ है । दूतावास के अन्य सभी कार्याें को रोककर, बचाव में लगे रहने की अवस्था है । सरकार के संयोजन में हम काफी स्थानों पर पहुंच चुके हैं ।
भारत, नेपाल में कोई राजनीति नहीं करना चाहता और ऐसा हुआ भी नहीं है । ऐसे समय में इस प्रकार के विषयों के बाहर आने पर काम करनेवालों का हौसला प्रभावित होता है । इसलिए इस प्रकार की अफवाह बाहर नहीं आए, तो अच्छा होगा । यदि किसी का चित्त नहीं बुझा तो सीधा सम्पर्क करने या सूचना को बार–बार भेरीफाई करने का अनुरोध करता हूँ । ऐसी अवस्था में शंका कर, लड़ाईकर, विरोधकर, बैठने से काम नहीं चलेगा, हर हालत में बचाव कार्य में लगना चाहिए ।
मात्र भारत ही नहीं, अन्य मित्र देश भी नेपाल को सहयोग कर रहा है । इसका संयोजन कम चुनौतीपूर्ण नहीं है । फिर भी सरकार इस कार्य को करने में सफल हुई है, यह मानना होगा । वर्तमान अवस्था पुनरस्थापना से भी अधिक अविलम्ब राहत और उद्धार ही है । अब धीरे–धीरे पुनरस्थापना की दिशा में आगे बढ़ना होगा । उसके लिए भी भारत सहयोग करेगा, इसमें कोई दो मत नहीं है । भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभिरुचि लेते हुए यह कहा है कि सहयोग में किसी भी प्रकार की ‘कमी–कमजोरी’ नहीं हो, इसका ध्यान रखा जाए, यह अपने आप में बड़ी बात है । भारत की ओर से निजी सहायता भी आ रही है । इससे भी हमारा द्विपक्षीय संबंध उजागर होता है ।
भारत द्वारा निर्मित ट्रॉमा सेन्टर भी पूर्ण रूप में सेवा दे रहा है । इस कार्य में भारत के ३१ विशेषज्ञ डॉक्टर कार्यरत हैं । इसके साथ अन्य दो स्थानों पर भी मेडिकल सेन्टर स्थापित कर, सेवाएं दी जा रही हैं । सभी उसी प्रकार कार्यरत हैं । नेपाल सरकार चाहे जो कुछ भी मांग सकती है । हमलोगों के पास उपलब्ध राहत हम नेपाल को दे रहे हैं । सभी प्रभावित क्षेत्रों में हमारी बचाव टोलियां पहुंच चुकी हैं । हिमालयन आधार शिविर से लेकर अन्य क्षेत्रों तक पहुंच चुकी हैं । विशेषज्ञों की टोलियां काम कर रही हैं । बचाव सहयोग में आए हुए सभी के साथ धैर्य के साथ सहानुभूति देकर, काम आगे बढ़ाना अत्यन्त आवश्यक है । यहां काफी लोगों के इस समय त्रिपाल में रहने के कारण स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा । इस अवस्था में सभी का ध्यान जाना भी आवश्यक है । महामारी फैलने से बचाव करना भी आवश्यक है । इस दिशा में सभी को सजग होना होगा । मानवीयता में राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए’’ ।
रविवार शाम तक प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतकों की संख्या ७ हजार २५० पहुंच चुकी है । भूकम्प से अति प्रभावित सिन्धुपालचैक में  २ हजार ८२९ लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है तो ७२४ लोग घायल हैं । नुवाकोट में ७९८ व्यक्तियों की मौत हुई है तो १ हजार ३०१ लोग घायल हैं । धादिंग जिले में ६५६ व्यक्ति मारे गए जबकि ६२७ घायल हैं । रसुवा जिले में ३८४ तथा काभ्रे जिले में ३१२ व्यक्तियों की जान गई हैं । काठमांडू घाटी में सबसे अधिक मौतें काठमांडू शहर में हुई है । काठमांडू में १ हजार १९४, भक्तपुर में २७१ और ललितपुर में १७२ लोगों की मृत्यु हुई है ।
‘‘इसी बीच भारतीय राजदूत रणजीत राय ने काठमांडू में कार्यरत विभिन्न देशों के राजनयिकों को भारत सरकार द्वारा महाभूकम्प पीडि़त देश नेपाल को दिए जा रहे सहयोगों और नेपाल सरकार के पूर्ण समन्वय में भारत द्वारा चलाए जा रहे राहत एवं बचाव के कार्याें से अवगत कराया है । उन्होंने बताया कि भारत द्वारा संचालित ऑपरेशन सबसे बड़ा ‘सपोर्ट ऑपरेशन’ है । उन्होंने कहा भारत, अपनी साधन सीमा में नेपाल को कोई भी सहयोग–सहायता करने को तैयार है । उन्होंने बताया भारत की तत्परता का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि भारतीय प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभल और भारत के विदेश सचिव जैसे महानुभावों ने १ मई को नेपाल का दौराकर, जानमाल की क्षति का जायजा लिया ।’’ इस ब्रिफिंग कार्यक्रम में चीन और यूरोपियन यूनियन के प्रमुखों के अलावा अन्य अनेक देशों के मिशन प्रमुख भी शामिल थे । उन्होंने बताया कि राहत और बचाव कार्य में न केवल भारत सरकार बल्कि भारतीय सीमा क्षेत्र से लगे भारतीय राज्यों सरकारों एवं जनता का भी सहयोग रहा है ।
भारतीय राजदूत ने बताया कि भूकम्प होने के छह घंटे के अन्दर ही भारत ने राष्ट्रीय आपदा बल के बचाव एवं राहत विशेषज्ञों की पहली टीम को भारतीय वायुसेना के विमान द्वारा काठमांडू में उतार दिया । उसके बाद भारतीय वायु सेना की ३४ उड़ानों द्वारा ५२० टन राहत सामग्री उतारा गया जिनमें टेन्ट, कम्बल, दबाएं, कूक हाउसेज, भोजन, पानी, हेवी इंजीनियरिंग के उपकरण, एम्बुलेन्स, आर ओ प्लान्ट, ऑक्सिजन जेनेरेटर्स, १८ मेडिकल टीम सहित दो फुल फ्लेज्ड आर्मी फिल्ड हॉस्पीटल्स, १८ इंजीनियरिंग टीम और १६ एन डी आर एफ टीम शामिल है । ये सभी टीमें नेपाल सरकार के समन्वय में लगातार दिन–रात काम कर रही हैं ।
इससे पहले भारतीय दूतावास ने एक विज्ञप्ति जारीकर कहा – ‘‘नेपाल में आए महाभूकम्प के पहले दिन से ही भारत सरकार हर तरह से मित्र राष्ट्र नेपाल को सहयोग करने में जुटी हुई है । गत २५ अप्रैल को भूकम्प आने के साथ भारत ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एन डी आर एफ) सहित विशेष विमान और बचाव एवं राहत सामग्री भेजा था ।
भारत के सम्पूर्ण राहत–बचाव प्रयास, नेपाल सरकार की अनुमति और निगरानी में हो रहा है । सभी भारतीय अधिकारी तथा टोली नेपाली पदाधिकारियों के साथ संयोजन में काम कर रही हैं ।
हाल तक २८० टन राहत सामग्री, जिसमें स्वच्छ पीने का पानी, दूध, बिस्कुट, चाउ चाउ, अत्यावश्यक दबाएं, पाल, त्रिपाल, कम्बल, इत्यादि भारत सरकार भेज चुकी है । इसके अलावा दो क्षेत्र (फील्ड) अस्पताल, १८ सैनिक मेडिकल टीम, १० इंजीनियर की टोली, एक आइ ए एफ तीव्र एक्शन मेडिकल टीम और उत्खनन तथा अन्य आवश्यक मशीनें, काठमांडू और पोखरा में विमान द्वारा अवतरण हो चुका है । नेपाल भारत सीमा स्थित भारतीय अधिकारी भी हर तरह से राहत–बचाव कार्य में उतना ही सहयोग में जुटे हुए हैं ।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की १६ टोलियां, नेपाल के विभिन्न सुरक्षा संस्थानों की टोलियों के साथ मिलकर काठमांडू, यूनेस्को विश्व सम्पदा साइटों– पाटन, भक्तपुर, स्वयंभू तथा धरहरा स्तंभ से ११ लोगों का उद्धार करने में सफल हुई, तथा १२१ मृत शवों को निकाला है ।
महाभूकम्प की केन्द्रविन्दु – गोरखा जिले के बारपाक गांव में तीन भारतीय टोलियों को तैनात किया गया है । इसी प्रकार भारतीय सेना की ३९ टोली स्वेच्छा से अभी भी सगरमाथा बेस कैम्प में फंसे हुए पर्वतारोहियों और पर्यटकों का उद्धार करने में लगी हुई हैं । भारतीय हेलीकॉप्टर, नेपाल के अन्य प्रभावित जिलों – गोरखा, धादिंग, नुवाकोट, सिन्धुपालचैक, रसुवा और रामेछाप आदि में १०० टन राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है ।
पावर ग्रीड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, नेपाल विद्युत प्राधिकरण के साथ संयुक्त रूप में, पूरे नेपाल में विद्युत आपूर्ति की सुलभ व्यवस्था मिलाने के लिए काम कर रहा है । इन दोनों ही संस्थानों ने अभी तक तीन पावर सब स्टेशन काठमांडू, महाभूकम्प के इस भयानक विपत्ति और अपालकालीन घड़ी में भारत सरकार हर रूप में नेपाल को सहयोग करने को प्रतिबद्ध है ।

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