अकेलापन — शक्ति या कमजोरी : निशा अग्रवाल
निशा अग्रवाल, धरान । मनुष्य स्वभाव से ही एक सामाजिक प्राणी रहा है हमेशा उसे आसपास अपने लोग चाहिए होते हैं चाहे उसे अपने मन की बात कहनी हो, चाहे सुननी हो या अपनी किसी भी भावनाओं का आदान प्रदान करना हो वह हमेशा किसी न किसी का साथ चाहता है। और इसी स्वभाव के कारण हमारा समाज या परिवार बनता है ।लेकिन जब यही समाज और परिवार किसी इंसान को अकेला कर दे, उसे बीच मझधार में छोड़ दे, तो क्या करे वह। क्या वह जीना छोड़ दे या फिर किसी जंगल में जाकर अकेले रहने लग जाए। या फिर किसी अपने का साथ पाने के लिए पल-पल तरसता रहे।
इसी द्वंद्व के ऊपर भगवान बुद्ध ने एक अपना विचार रखा कि इंसान अगर अकेला हो और उसे अकेलापन भोगना पड़े तो वह उस अकेलेपन को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय उसे अपनी ताकत बना सकता है। उस अकेलेपन को वह एक चुनौती की तरह एक अवसर की तरह ले तो वह स्वयं के साथ समय व्यतीत कर स्वयं को जान सकता है। अपने अंदर की ताकत, अपने अंदर की मजबूत पहलुओं पर वह काम कर सकता है। चाहे तो वह अपने अंदर के आध्यात्मिकता को ऊपर उठा सकता है।या अगर किसी भी कार्य क्षेत्र में जिसमें उसकी रुचि हो, रुझान हो, वह उस पर काम कर सकता है। अपने अंदर की प्रबल शक्ति को जमा करके उस कार्य में लगा सकता है। ना कि दूसरों का मुंह देखकर रोता हुआ काल्पनिक जीवन व्यतीत करता रहे ।यह बात हम एक कहानी के द्वारा समझ सकते हैं। ‘नीरजा’ एक सामान्य घरेलू औरत। बहुत प्यार करती थी वह अपने परिवार से। भरा- पूरा परिवार था ।पति ,दो हंसते खिलखिलाते बच्चे, सास- ससुर और भी घर में अन्य सदस्य थे।
नीरजा दिनभर घर के कामकाज करती ,सबका ख्याल रखती, सबसे प्रेम करती। एक दिन दुर्भाग्यवश नीरजा किचन में काम कर रही थी और प्रेशर कुकर फट गया जिससे उसका चेहरा काफी हद तक जल गया। काफी इलाज कराया गया पर उसका चेहरा ठीक ना हो पाया। उसका आधा चेहरा लगभग झुलस गया था। शुरू शुरू में तो सब ने उसका ख्याल रखा, सबको यह आशा थी कि वह ठीक हो जाएगी ।लेकिन जैसे-जैसे यह आशा टूटती गई वैसे-वैसे सबका रवैया, सब का व्यवहार उसके प्रति बदलता चला गया ।अब नीरजा को सब उपेक्षा भरी नजरों से देखने लगे। सेवाएं तो सबको उसकी चाहिए थी पर सहारा कोई बनने तैयार न था। पति उससे दूर क्या हुआ ,बच्चे भी उसके पास आने से कतराने लगे। घर में सभी उसे हिकारत भरी नजरों से देखने लगे। नीरजा अपने पति के सामने रोई, बच्चों के सामने गिड़गिड़ाई। घर पर सभी से कहा कि इसमें मेरी क्या गलती है, यह तो दुर्भाग्यवश मेरा शरीर खराब हो गया। परन्तु मेरा मन तो वैसा ही है मैं तो अभी भी आप लोगों से वैसा ही प्रेम करती हूं। क्या आप लोगों को मेरा मन नहीं दिखता? क्या मैं अब भी वैसे ही आप लोगों का ख्याल नहीं रखती? पर किसी को ना उसकी बात सुननी थी ना किसी ने सुनी।सब ने उसे सुनकर भी अनसुना कर दिया। वह दिन प्रतिदिन और अकेली होती चली गई। वह अपने दिन भर घर के काम करती और जैसे ही फुर्सत मिलती वह अकेले बैठकर रोने लगती या तो खुद को कोसने लगती। इसी तरह एक दिन वह अपने मोबाइल पर यूं ही कुछ वक्त गुजर रही थी कि उसके सामने एक भगवान बुद्ध की वीडियो आई जिसमें भगवान बुद्ध ने बताया कि अकेलापन कभी-कभी आपके लिए एक अवसर भी हो सकता है कुछ कर दिखाने का कुछ पा लेने का क्योंकि सत्य यही है कि आप अकेले कभी भी नहीं हो ।क्योंकि आप सब के अंदर वह परमात्मा निवास करता है। जब आपको लगता है कि आप अकेले हो उस वक्त भी आप अपने ईश्वर के साथ होते हैं। तो अपने उस अकेलेपन में उसे ईश्वर से बात करो उससे पूछो क्या हो सकता है तुम्हारे लिए बेहतर ?तुम और भी बेहतर कैसे बन सकते हो? तुम अपने आप को पहचानो अपनी ताकत को पहचानो। अपनी क्षमताओं को पहचानो ।अकेलापन हमेशा दुखद नहीं होता । नीरजा ने जब यह प्रेरणादायक बातें सुनी उसी क्षण उसने निश्चय किया की ना तो अब मैं अपने अकेलेपन से घबराऊंगी ना ही रोऊंगी। अब मैं अपने अकेलेपन में स्वयं को मजबूत बनाऊंगी और उसने वही किया। बचपन से ही उसकी ड्राइंग्स में बहुत रुचि थी। वह बहुत खूबसूरत पेंटिंग बनती थी ।लेकिन शादी के बाद घर परिवार के चक्कर में उसने अपने इस शौक को दर -किनार कर दिया था ।लेकिन अब उसने अपनी इसी कला को वक्त देने का विचार किया। अब वह दिन भर जब भी घर के काम से फुर्सत पाती कमरे में आकर कैनवास पर खूबसूरत पेंटिंग्स बनाने लगी। मन तो उसका शुरू से ही खूबसूरत था और अब वह अपनी मन की खूबसूरती और सकारात्मक सोच को कैनवास पर उतरने लगी। घर के लोगों को उससे कोई मतलब तो था नहीं। काम वह सब के समय पर कर ही रही थी तो फिर वह अकेले में क्या कर रही है, नहीं कर रही है, किसी को इस बात से कोई लेना देना ना था। दिन हो या रात जब भी उसे फुर्सत मिलती ।वह पेंटिंग्स बनाने लगती। अच्छी सोच अच्छी विचार कैनवास पर खूबसूरत रंगों के साथ उतरने लगे ।उसने बहुत सारी खूबसूरत पेंटिंग्स बनाई ।और एक दिन शहर में बहुत बड़ा एग्जिबिशन लगा था ।आर्ट एंड क्राफ्ट का। जिसमें उसने भी हिस्सा लिया और उसने अपनी सारी पेंटिंग्स एग्जीबिशन में लगाई। लोगों को उसकी पेंटिंग्स बहुत पसंद आई। उसकी सकारात्मक सोच ,उसके मन की सुंदरता लोगों को उसकी पेंटिंग्स में नजर आई। वह जो अपने दिल की बात कहना चाहती थी वह पेंटिंग के जरिए लोगों तक पहुंचने लगी। ऊंचे दामों में उसकी पेंटिंग्स की बिक्री हो गई। उसे अपनी मेहनत के अच्छे खासे पैसे तो मिले ही साथ ही साथ अखबार में फोटो के साथ उसकी सराहना भरा पूरा लेख छपा था। जब दूसरे दिन स्कूल में उसके बच्चों के सामने दूसरे बच्चों ने उनकी मम्मी की प्रशंसा की तो उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ। उसके पति को भी उसके दोस्तों ने बताया कि वाह तुम्हारी पत्नी तो बहुत ही बढ़िया आर्टिस्ट है ।और शाम को जब सब घर आए और सबको यह बात पता चली तो सबको बहुत सुखदश्चर्य हुआ। सबने पूछा कब किया तुमने ऐसा और तुम इतनी अच्छी पेंटिंग्स बनाती हो हमें तो पता ही नहीं था। हमने तो तुम्हें कभी देखा भी नहीं पेंटिंग्स बनाते हुए। नीरजा ने हंसते हुए शांत स्वर से कहा मुझे भी अब तक कहां पता था। मुझे भी कुछ दिनों पहले ही पता चला है। कह कर वह शांति से अपने काम में चली गई और और अपनी मन की खूबसूरती ,अपने अच्छे विचार और अपनी सकारात्मक सोच सबको खूबसूरत रंगों के साथ कैनवास पर उतारती रही। उसे पेंटिंग्स के बहुत बड़े-बड़े ऑर्डर मिलने लगे। वह अपनी पेंटिंग्स से कमाए हुए पैसों को उन लोगों की मदद में लगाने लगी जिन्हें इसकी जरूरत थी। आज समाज में नीरजा एक प्रख्यात आर्टिस्ट के रूप में तो जानी पहचानी जाती ही थी, साथ ही लोग उसे एक संवेदनशील समाज सेविका के रूप में भी जानने लगे। आज सारे समाज को, उसके परिवार को उसके ऊपर गर्व था।
यह होता है जब आप अपने आप को जान लेते हैं पहचान लेते हैं आप अपनी क्षमताओं पर विश्वास करते हैं अपने साथ वक्त बिताते हैं।तब आपको पता चलता है कि क्या आपकी कमजोरी है और क्या आपकी ताकत। बस अकेलेपन में आपको अपनी कमजोरी से लड़ना है और अपनी ताकत को बढ़ाना है। यह कोई जरूरी नहीं की अपनी क्षमताओं को जानने के लिए ,अपनी विचारों को समझने के लिए, हमें अकेला होना ही है। लेकिन यह बात जरूरी है कि थोड़ा वक्त हम अपने साथ जरूर बताएं।परिवार में रहकर भी हमें अपने आप से बात करनी नहीं छोड़नी चाहिए और दुर्भाग्यवश अगर आप अकेले हो जाएं तो आप अपने अकेलेपन को अपनी कमजोरी ना बनाकर अपनी ताकत बनाएं और उसका उपयोग अच्छे काम में करें। खुद को समझें और बेहतर बनाएं।अपने जीवन का सदुपयोग खुद भी करें और दूसरों के लिए भी इसे सदुपयोगी बनाएं।


