Sat. Aug 15th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

६२९ वीं कबीर जयंती एवं विश्व भोजपुरी दिवस २०८३ मनाया गया

 


काठमांडू,आषाढ़ १५ – भोजपुरी प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा आज ६२९ वीं कबीर जयंती एवं विश्व भोजपुरी दिवस २०८३ काठमांडू में मनाया गया । इस अवसर पर भोजपुरी के तीन विधाओं में तीन व्यक्तित्वों को सम्मानित भी किया गया ।
कार्यक्रम भोजपुरी प्रज्ञा प्रतिष्ठान, काठमांडू के अध्यक्ष आनन्द गुप्ता की अध्यक्षता में हुई । इस कार्यक्रम में आयोग के सदस्य मातृका प्रसाद पोखरेल तथा पुष्करराज भट्ट, आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा.गोपाल ठाकुर, पूर्व राज्यमंत्री एवं बंगलादेश के लिए नेपाल के पूर्व राजदूत डा.बंशीधर मिश्र तथा पूर्व सांसद शोभाकर पराजुली के साथ ही अन्य की भी सहभागिता थी ।

यह भी पढें   यूएनएससी ने लाल किले में हुए धमाके के लिए ‘अल-कायदा ’ को जिम्मेदार ठहराया


आज के इस आयोजन में २५ हजार राशी की लीलाधर स्मृति पुरस्कार भोजपुरी मातृभाषा अभियानी दीपक गुप्ता को प्रदान किया गया । इसी तरह १५ हजार राशी की भोजपुरी पत्रकारिता पुरस्कार, २०८३ बारा के अग्रज पत्रकार रामप्रसाद साह को दिया गया तथा १० हजार राशी की अफिमी लाल – परमेश्वरी देवी भोजपुरी सेवा पुरस्कार से भोजपुरी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि बिकाउ गिरी को प्रदान किया गया । शारीरिक असमर्थता के कारण वो काठमांडू नहीं आ पाए, इसलिए उन्हें वीरगंज श्रीपुर स्थित निवास में ही सम्मानित किया गया ।

यह भी पढें   इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, सुनामी की चेतावनी


आज के इस कार्यक्रम को दो सत्रों में बांटा गया था । पहले सत्र में ‘वर्तमान संदर्भ में कबीर’ इस शीर्षक को लेकर परिचर्चा की गई । इस सत्र का पत्रकार रितेश त्रिपाठी ने सहजीकरण किया था । इस परिचर्चा में आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा.गोपाल ठाकुर, त्रिभुवन विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष तथा हिमालिनी मासिक पत्रिका की संपादक डा.श्वेता दीप्ति और भोजपुरी साहित्यकार दिनेश गुप्ता ने भाग लिया । इन सभी ने कबीर के विचारों को लेकर कहा कि आज भी कबीर और उनके विचार जिंदा है । आज ६२९ वीं कबीर जयंती मना रहे हैं इसका अर्थ है कि उन्हें भूला नहीं गया है । उनके दोहों का समाज पर आज भी असर है । वक्ताओं का कहना था कि कबीर ने वर्ग, जाति और धर्म के आधार पर होने वाले भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अपने दोहों के माध्यम से जो संदेश दिए, वे आज भी जीवंत और प्रासंगिक हैं ।

यह भी पढें   नहीं रहे राजेन्द्र विमल, साहित्य जगत ने एक महान विभूति को खो दिया

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com