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माँ …. : राजेन्द्र शलभ

 

माँ

राजेन्द्र शलभ

सूरज की तरह
बड़ी सी लाल बिन्दिया
जब माथे पे लगाती थी
मेरी मां बहुत ही सुन्दर दिखती थी
संसार की सब से तेजस्वी नारी ।

लेकिन, बाबुजी के गुजरने के बाद
मां ने लाल बिन्दिया लगाना छोड़ दिया
बिना बिन्दिया के
मलीन दिखता है, मां का चेहरा

जब–जब गोधूली की बेला
माथे पे लाल बिन्दिया लगाए
आकाश को देखता हूं
मुझे मां की याद आती है
लाल बिन्दिया लगाए
आकाश भी सुन्दर लगता है
पर मेरी मां जितना नहीं ।

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राजेन्द्र शलभ

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