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खतरे में माेनालिसा, मिलेगी बुलेटप्रुफ सुरक्षा

 

पेरिस, एएफपी।

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दुनिया की सबसे प्रसिद्ध और अनमोल पेंटिंग ‘मोना लीसा’ (The Mona Lisa) खतरे में है। वह नष्ट हो सकती है। लिहाजा उसे बचाने के लिए अब बुलेट प्रूफ शीशे में रखा जाएगा।

दुनिया की सबसे प्रसिद्ध पेंटिंग ‘दि मोना लीसा’ को पेरिस स्थित दुनिया के सबसे बड़े आर्ट म्युजियम दि लुव्र (The Louvre) में उसके कमरे से निकालाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना है। पेंटिंग को निकालने के बाद उस कमरे की सफाई होनी है। शुक्रवार को दि लुव्र म्युजियम ने इसकी जानकारी दी है।

न्यूज एजेंसी एएफपी को दी जानकारी में दि लुव्र म्युजियम ने बताया कि मोना लीसा की विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग को उसके कमरे से निकालकर नजदीक की मेडीसी गैलरी में रखा जाएगा। दोनों के बीच की दूरी तकरीबन 100 कदम है। संग्राहलय के निदेशक जीन-ल्यूक मार्टिनेज (Museum Director Jean-Luc Martinez) ने बताया कि पेंटिंग को 16 जुलाई की रात दूसरी गैलरी में शिफ्ट किया जाएगा।

संग्राहलय के निदेशक जीन-ल्यूक मार्टिनेज ने बताया कि मोना लीसा नाम की ये पेंटिंग 550 साल से ज्यादा पुरानी है और बेहद दुर्लभ है। सुरक्षा के लिहाज से पेंटिंग को उसके अस्थाई स्थान (मेडीसी गैलरी) में बुलेटप्रूफ शीशे में संरक्षित कर रखा जाएगा। संग्राहलय के अनुसार इसी वर्ष अक्टूबर माह में पेरिस के इस सबसे बड़े आर्ट म्युजियम में लियोनार्डो की पेंटिंग की प्रदर्शनी आयोजित होगी। इस प्रदर्शनी के खुलने से ठीक पहले स्टेट्स रूम में मोना लीसा की जगह एक अन्य पेंटिंग फ्लोरेंटाइन नोबल स्थान ले लेगी।

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प्रतिवर्ष एक करोड़ लोग देखने आते हैं पेंटिंग
जीन-ल्यूक मार्टिनेज ने बताया कि पेंटिंग को म्युजियम में चल रहे मरम्मत कार्यों की वजह से हटाना पड़ रहा है। इस कमरे में वर्ष 2000 के बाद से मरम्मत कार्य नहीं किया गया है। इस म्युजियम में प्रति वर्ष 10 मिलियन (एक करोड़) लोग अद्भुत पेंटिंग्स को देखने आते हैं। प्रतिदिन दसियों लोग उस कमरे से गुजरते हैं, जिसमें पेटिंग को पाओलो वेरोनीस के विशाल कैनवास ‘द वेडिंग फेस्टिवल एट काना’ के विपरीत दिखाया गया है।

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16वीं शताब्दी में शुरू हुआ था पेंटिंग का काम
माना जाता है कि विश्व प्रसिद्ध मोना लीसा की दुर्लभ पेंटिंग का काम 16वीं शताब्दी के शुरूआत में हुआ था। वास्तव में लियोनार्डो पेंटिंग को अपने साथ फ्रांस ले गए थे और अपनी मृत्यु से तीन साल पहले वर्ष 1516 के करीब इसे पूरा किया था। वर्ष 1804 में इस पेंटिंग को सबसे बड़े आर्ट म्युजियम दि लुव्र में लाया गया था। इसके बाद इस पेंटिंग को बहुत कम ही हटाया गया है। पिछले 45 वर्षों से इस पेंटिंग को उसके स्थान से हिलाया नहीं गया है। पेंटिंग की देखरेख करने वाले क्यूरेटर इसकी नजाकत को हुए इसे दोबारा उसके स्थान से हटाने का विरोध कर रहे हैं।

प्रसिद्धि बनी दुश्मन
इस पेंटिंग को चिनार के एक पतले पैनल पर बनाया गया है, जो समय के साथ बहुत पतला हो चुका है। अब इसके नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। इस पेंटिंग को 1974 में अंतिम बार रसिया से जापान ले जाया गया था। पेंटिंग ने अंतिम बार यूनाइटेड स्टेट्स में प्रदर्शित करने के लिए 1964 में अटलांटिक पार लाया गया था। पेंटिंग को यूएस लाते वक्त संग्राहलय के क्यूरेटर्स ने इसका काफी विरोध किया था। 1911 में एक इतालवी बढ़ई ने म्युजियम दि लुव्र में काम करने के दौरान इस पेंटिंग को चोरी कर लिया था। जानकार मानते हैं कि इस पेंटिंग की प्रसिद्धि ही इसकी दुश्मन बन चुकी है। यही वजह है कि इस पेंटिंग को पाने के लिए कुछ लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। कई बार इसे चोरी करने का प्रयास किया जा चुका है। कई देश इस पेंटिंग को पाने के लिए दावा करते हैं।

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दैनिक जागरण से साभार

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